सूरज के ताप को रोकने, जानवरों को संस्कृत पढ़ाने का दावा करने वाले फरार बाबा की कहानी

मोस्ट वॉन्टेड बाबा नित्यानंद उर्फ परमशिवम् उर्फ परमहंस की कहांनियां जो जमाने में आज सोशल मीडिया, मीडिया, देश-विदेश से लेकर, इस दुनिया में हर उस जगह पर फैली हुई है जहां इंसान की मौजूदगी है. बाबा की कहानियों से अदालतें अटी पड़ी हैं.

“ना बाबा ना” देश के कथित मठाधीश ‘बाबाओं’ से सावधान करती टीवी9 भारतवर्ष की विशेष सीरीज में इस बार पेश है, भारत के मोस्ट वॉन्टेड, भगोड़ा घोषित बाबा नित्यानंद की. बाबा कभी खुद को, शिवजी और कभी कृष्ण का रूपावतार बताते रहे हैं. जबकि मोस्ट वॉन्टेड बाबा के ऊपर ऐसे आरोप हैं कि इंटरपोल को “ब्लू कॉर्नर नोटिस” जारी करना पड़ा. बाबा सन् 2019 के अंतिम महीनों से छिपते फिर रहे हैं.

कौन है मोस्ट वॉन्टेड बाबा

मोस्ट वॉन्टेड बाबा नित्यानंद उर्फ परमशिवम् उर्फ परमहंस की कहांनियां जो जमाने में आज सोशल मीडिया, मीडिया, देश-विदेश से लेकर, इस दुनिया में हर उस जगह पर फैली हुई है जहां इंसान की मौजूदगी है. बाबा की कहानियों से अदालतें अटी पड़ी हैं. देश की अदालतों में मौजूद मुकदमों पर नजर डालें तो, तमिलनाडु से लेकर गुजरात तक की अदालतों में बाबा का इंतजार है. स्वंय-भू ‘भगवान’ बने बैठे नित्यानंद की जन्म-तिथि को लेकर भी तमाम तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं. मीडिया में आ चुकी खबरों के मुताबिक बाबा के पासपोर्ट पर जो जन्म-तिथि मौजूद है और उसके बाकी तमाम दस्तावेजों पासपोर्ट वाली जन्म-तिथि से एक दम अलग ही तारीख महीना और सन् दर्ज हैं. आखिर किसी संत या महात्मा का भला ऐसे झूठ या फरेब से भला क्या वास्ता? कहा जाता है कि सन् 1977 में इसका जन्म दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य के तिरुवन्नामलाई में हुआ था. इसके माता-पिता का नाम अरुणाचलम राजशेखरन और लोकनायकी बताया जाता है. कहीं कहीं इसके जन्म की तारीख 1 जनवरी सन् 1978 भी लिखी मिलती है.

नित्यानंद के किशोरावस्था की तस्वीर.

भक्तों का तो यह भी कथित दावा है

इस बाबा के अंधभक्त इसे परमशिव का अवतार बताते रहे हैं. जिसे समाज का एक वर्ग कतई मानने को राजी नहीं है. खुद को हिंदू धर्म का प्रचारक कहने वाला नित्यानंद, एक ट्रस्ट का संस्थापक भी बताता रहा है. नित्यानंद के चाहने वालों का दावा है कि उनके गुरु के पास कई आध्यात्मिक शक्तियां हैं. जिनमें कुंडलिनी जागरण और तीसरा नेत्र जागरण प्रमुख हैं. जबकि इनके पास 400 से ज्यादा असाधारण शक्तियों का भण्डार मौजूद होने का दावा भी भक्त करते रहे हैं. हालांकि इन दावों का ठोस सबूत कोई नहीं है. भक्तों का दावा है कि गुरु अलौकिक अनुभूति और भौतकिता, शरीर की स्कैनिंग, दूर-दृष्टि और कोई हुई वस्तुओं को खोजने की क्षमता भी रखते हैं. सवाल यह पैदा होता है कि आखिर, बाबा ने देश के जजों, कोर्ट-कचहरियों, पुलिस को आखिर क्यों सम्मोहित नहीं किया?

बाबा पर कई-कई मुकदमे

नित्यानंद के ऊपर यूं तो तमाम मुकदमें लंबित हैं. जिनमें से मीडिया खबरों में 4 तो बलात्कार के ही कथित मुकदमे बताए जाते हैं. मोस्ट वॉन्टेड नित्यानंद सन् 2010 में एक कथित सेक्स स्कैंडल में गिरफ्तार करके जेल भेजे जा चुके हैं. उसके बाद इसके ऊपर दो मुकदमे बलात्कार के और भी लगाए गए थे. बात अगर बाबा के अनुयायियों की हो तो उसमें हर तबके का भक्त मौजूद मिल जाएगा. रईस, गरीब, शिक्षित अशिक्षित, रोजगारी-बेरोजगारी, बिजनेसमेन आदि-आदि. मतलब बाबा के पास भक्तों लंबी-चौड़ी फौज भी मौजूद है. नित्यानंद को अब से कई साल पहले एक मशहूर अखाड़े ने “महामंडेलश्वर” की उपाधि से नवाजा था.

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कहा जाता है कि नित्यानंद ध्यानयोग की क्लास भी खुद ही लेते हैं. जिसमें बड़ी संख्या में महिला, पुरुष लड़के-लड़कियां सार्वजनिक रूप से नाचते-गाते नजर आते हैं. सिंहासन पर किसी महाराज की तरह सज-धजकर बैठने के शौकीन इस मोस्ट वॉन्टेड बाबा की दुनिया में जितना अंदर झांकिए, उतनी ही इनकी दुनिया रहस्यमयी होती जाती है. बाबा का सिंहासन सिल्वर प्लेटेड चेयर का होता है. जबकि उसके आसपास पड़ी कुर्सियों पर चांदी की परत जड़ी होती हैं. चांदी के बर्तनों में बाबा के मेहमानों को भोजन कराने की परंपरा भी है. मतलब एक बाबा के पीछे उसकी कई-कई अबूझ कहानियां मौजूद हैं. बस पैनी नजर से सबकुछ ताड़ने की इच्छा शक्ति होनी चाहिए. नित्यानंद के बारे में कहा जाता है कि वो दक्षिण भारत की जिस अभिनेत्री के साथ रंगरेलियां मनाते पकड़े जाने पर जेल गये थे, वह उनके साथ एक बार हरिद्वार में भी देखी गई थी.

Life Of Swami Nithyananda And Controversies So Far (2)

कहा जाता है कि सन् 1977 में इसका जन्म दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य के तिरुवन्नामलाई में हुआ था.

बाबा पर आरोपों की बाढ़

सन् 2010 की बात होगी. जब एक दक्षिण भारतीय टीवी चैनल ने बाबा का एक वायरल वीडियो ऑनएअर कर डाला. जिसमें बाबा जी एक वातानुकूलित कमरे के भीतर दक्षिण भारतीय फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री के साथ रासलीला करते दिखे थे. वो सीसीटीवी फुटेज बाबा के ही किसी खुराफाती दिमाग शिष्य ने बना डाला था. उस एक वीडियो ने बाबा की जिंदगी में तूफान ला दिया. एक मामले में बात बढ़ने पर कर्नाटक पुलिस ने बाबा के खिलाफ लुकआउट नोटिस तक जारी करवा डाला था. लिहाजा ऐसा होते ही बाबा बेंगलुरु से भागकर हरिद्वार पहुंच गए. सन् 2018 में कर्नाटक की एक ट्रायल कोर्ट ने नित्यानंद के खिलाफ आरोप तय कर दिए. जिसमें उनके खिलाफ बलात्कार, अप्राकृतिक संबंध बनाने, धोखाधड़ी, साक्ष्य मिटाने जैसी गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चला. तीसरा आरोप नित्यानंद के ऊपर गुजरात में लगा था. उस आरोप में कहा गया था कि इस स्वंयभू धर्मगुरु ने अपने आश्रम में दो बहनों को बंधक बना रखा है. लड़कियों के पिता ने इस बारे में 19 नवंबर सन् 2109 को गुजरात उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की थी.

लड़कियों की मां और पिता ने कहा था

याचिकाकर्ता पिता जनार्दन शर्मा और उनकी पत्नी ने अदालत को बताया था कि उन्होंने 2013 में बेंगलुरु में स्वामी नित्यानंद द्वारा संचालित, शैक्षणिक संस्थान में चार बेटियों को 7 से 15 साल की उम्र में भर्ती कराया था. जब उन्हें पता चला कि उनकी बेटियां इस साल अहमदाबाद के दिल्ली पब्लिक स्कूल के परिसर में स्थित योगिनी सर्वज्ञपीठम के नित्यानंद ध्यानपीठम की एक अन्य शाखा में स्थानांतरित हो गईं, तो उन्होंने उनसे मिलने की कोशिश की. हालांकि, संस्थान ने जनार्दन शर्मा और उनकी पत्नी को बेटियों से नहीं मिलवाया. तब फिर पुलिस की मदद से जनार्दन शर्मा ने संस्थान का दौरा किया. दो नाबालिग बेटियों को वापस लाने में यह दंपती कामयाब रहा. बड़ी बेटी लोपामुद्रा जनार्दन शर्मा और नंदिता ने, माता पिता के साथ जाने से इनकार कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी दो छोटी बेटियों का अपहरण कर लिया गया. उन्हें दो सप्ताह से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखा गया.

छद्म वैज्ञानिक दावे

मास्टरमाइंड नित्यानंद अपने छद्म वैज्ञानिक दावों के लिए बदनाम रहे हैं. उन पर आरोप लगाया गया था कि वे इन दावों का इस्तेमाल, अंधविश्वास में गुमराह लोगों को अपने संप्रदाय के लिए बढ़ाने में कर रहे हैं. आज के मोस्ट वॉन्टेड और कल के अपने भक्तों के “बाबा” का दावा तो यहां तक था कि उन्होंने, अल्बर्ट आइंस्टीन का प्रसिद्ध सापेक्षता सूत्र:E=mc2 गलत था. इस दावे के वायरल होते ही दुनिया भर के लोग बाबा के पीछे हाथ धोकर पड़ गए. यहां चर्चा उसी नित्यानंद का हो रहा है कि जिसने कुछ साल पहले सूर्य को 40 मिनट तक बढ़ने से रोक देने जैसा ही वाहियात दावा ठोक दिया. बाबा की ऊट-पटांग हरकतों का जिक्र किया जाए तो उसने, एक बार तो यहां तक दावा कर डाला कि गाय,बैल, शेर बाघ और बंदर तमिल और संस्कृत तक बोलते हैं.

Life Of Swami Nithyananda And Controversies So Far 1

बाबा के अंधभक्त इसे परमशिव का अवतार बताते रहे हैं.

खोखला दावा तो यह भी किया था

नित्यानंद ने यह भी दावा किया किया था कभी कि वह, रहस्यमयी तीसरी आंख सन् 2021 तक खोज लेंगे. जो शरीर विज्ञान में एक बड़ी उपलब्धि होगी. अब 2021 सन गुजर कर सन् 2022 शुरू हो चुका है. मगर अब तो बाबा ही फरार और भगोड़ा घोषित हो चुका है. ऐसे में उसकी उस तीसरी आंख की खोज का क्या हुआ? किसी को नहीं पता. बाबा ने दावा किया था कि उसने एक ऐसी भी खोज की है जिसकी मदद से इंसान स्मॉग को दीवार के आरपास देख सकेगा. नित्यानंद के शिष्यों ने दावा किया था कभी कि गुजरात में दृष्टिहीन 82बच्चों को ‘तीसरी आंख’के माध्यम से ही दीक्षा दी जा रही है. और यह बच्चे कभी भी आइंदा अंधे नहीं होंगे. बाबा के भगोड़ा घोषित किए जाते ही इस दावे की भी हवा निकल गई. हालांकि बाबा के इस तीसरी आंख वाले दावे की हवा तब तर्कवादी प्रोफेसर और कार्यकर्ता नरेंद्र नायक ने भी निकाल दी थी. उन्होंने नित्यानंद को तीसरी आँख की शक्ति साबित करने के लिए चुनौती दे डाली थी.

बाबा का यह भी एक बवाल

पहले दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री के साथ रंगरेलियां मनाते नित्यानंद की सीडी वायरल होने से मचा बवाल. और फिर उसके बाद अहमदाबाद पुलिस द्वारा दो बहनों को बंधक रखे जाने के मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने ने, नित्यानंद को बदनाम कर दिया.दो बहनों को अपहरण के आरोप में अहमदाबाद पुलिस ने इस फरार घोषित नित्यानंद के आश्रम पर छापा भी मारा था. उसकी दो महिला अनुयायी भी गिरफ्तार की गईं. इन तमाम तथ्यों की पुष्टि कभी खुद डिप्टी एसपी (ग्रामीण)अहमदाबाद केटी कमरिया ने भी की थी, उन्होने बताया था कि, “नित्यानंद और उसकी दोनो सेविकाओं के खिलाफ थाना विवेकानंद में एफआईआर नंबर 38 पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया था. जिसमें बाबा व उसकी सेविकाओं के खिलाफ आईपीसी की धारा 365 (अपहरण), 344, 504, 506, 323, 114 व चाइल्ड लेबर एंड रेगुलेशन एक्ट का सेक्शन-14 भी लगाया गया.” अहमदाबाद देहात के थाना विवेकानंद में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, “बाबा और उसकी दोनों गिरफ्तार सेविकाओं के खिलाफ, तमिलनाडु निवासी जनार्दन राम कृष्ण शर्मा ने एफआईआर दर्ज करायी थी.

भाई-बहन से भीख मंगवाने का आरोप

डिप्टी एसपी के टी कमरिया ने तब आगे बताया था कि,”नित्यानंद की गिरफ्तार सेविकाओं का नाम प्राण प्रियानंद और प्रियातत्व रिद्धि है. दोनों को अहमदाबाद आश्रम से गिरफ्तार किया गया था.” शिकायतकर्ता पिता ने विवेकानंद थाना पुलिस को बताया था, “जनवरी सन् 2019 में बाबा के आश्रम में उसकी 15 साल की बेटी और 12 साल का बेटा पहुंचा था. कुछ समय बाद जब वह दोनो बच्चों को लेने बाबा के अहमदाबाद स्थित आश्रम पहुंचे तो आश्रम वालों ने उन्हें भगा दिया.” इस बात से पिता जनार्दन शर्मा को बाबा और उसके आश्रम की गतिविधियां संदिग्ध लगीं. पुलिस ने जब बाबा के आश्रम पर छापा मारा तो, वहां दोनो भाई बहन एक कमरे के भीतर बंधक की हालत में बरामद हो गए. यह बात है नवंबर सन् 2019 की, आश्रम के कब्जे से छूटे भाई-बहन ने पुलिस को बताया था कि, बाबा की दोनों गिरफ्तार सेविकाएं उनसे जबरदस्ती भीख मंगवाती थीं.

लड़की को विदेश भेजने का आरोप

खुद को स्वंयभू “बाबा, स्वामी और संत” करार दिए बैठा नित्यानंद पर तमिलनाडु के एक दंपती ने तो यहां तक आरोप लगाया कि, उसकी एक बेटी को नित्यानंद ने अपने गुर्गों के जरिए विदेश भी भिजवा दिया है. उस वक्त 19 साल की उम्र की यह लड़की नित्यानंद के बेंगलुरू स्थित आश्रम में रह रही थी. आज इंटरपोल के ‘ब्लू नोटिस होल्डर’ नित्यानंद के अतीत पर जहां जहां नजर डालिए. वहीं वहीं झोल नजर आने लगेगा. आरोप है कि बाबा को एक निजी स्कूल ने लीज पर जमीन दी थी. जिसके ऊपर बाबा ने आश्रम बनाने का प्लान बनाया था. बाबा का कारनामे सुनने के बाद स्कूल ट्रस्ट ने अपनी जमीन वापिसी के लिए भी बाबा को नोटिस थमा दिया.

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पहले दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री के साथ रंगरेलियां मनाते नित्यानंद की सीडी वायरल होने से मचा बवाल.

टापू खरीद कर अपना देश बना डाला!

सन् 2019 में पता चला कि कथित धर्मगुरु ने दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर और त्रिनिदाद के पास एक टापू खरीद लिया है. इस टापू को नया देश घोषित कर नाम दिया था और उसे नाम दिया कैलासा. अब खुद यह भगोड़ा बाबा अपने अनुयायियों को कैलासा (Nithyananda Kailasa) आने के लिए वीजा एप्लाई करने की अपील करता फिर रहा है. बताना जरुरी है कि नित्यानंद अपने आश्रम की सेविका साध्वी के साथ संबंधों को लेकर पहले से ही देश दुनिया में बदनाम हैं. खबरों के मुताबिक नित्यानंद ने एक वीडियो जारी कर अपने भक्तों को, कैलासा पहुंचने के लिए चार्टर्ड प्लेन सर्विस की भी घोषणा कर डाली थी. इस वीडियो में उन्होंने बताया कि कैलासा पहुंचने के इच्छुक शख्स को तीन दिन तक ठहरने की सुविधा दी जाएगी.

बाबा के कैलासा की रहस्यमयी कहानी?

मोस्ट वॉन्टेड नित्यानंद का दावा तो यहां तक है कि कैलासा कोई आश्रम या अड्डा नहीं, अपितु एक राष्ट्र है. जिसका अपना संविधान है, खुद का झंडा है. अपनी मिलिट्री है. प्रधानमंत्री और अपनी सरकार है. बाबा के दावे के मुताबिक तो कैलासा एक हिंदू राष्ट्र है. जिसमें दुनिया के तमाम हिस्सों से बेदखल हो चुके हिंदुओं को विशेष रुप से शरण मिलेगी. कैलासा और बाबा की वेबसाइट की मानें तो, पर्यटकों को कैलासा में रहने और खाने की सुविधा फोकट में दी जाएगी. हालांकि वेबसाइट पर आध्यात्मिक नागरिकता की बात कही गई है. खुद को योग वेद तंत्र शैव दर्शन का मास्टर बताने वाला बाबा आज अपने ही देश से फरार घोषित हैं. .

कैसे बने मठाधीश?

बताया जाता है कि नित्यानंद ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किए हैं. हालांकि, इस डिग्री को भी खबरों में अब तक फर्जी ही माना जाता रहा है. साल 2000 में उन्होंने कर्नाटक के बिदादी में नित्यानंद ध्यानपीठम की स्थापना की थी. जहां योग, मेडिटेशन और अन्य फिटनेस कोर्स की कक्षाएं लगाई जाने लगी थीं. सन् 2003 में अमेरिका के लॉस एंजिलिस में उन्होंने “लाइफ ब्लिस फाउंडेशन” की भी स्थापना की. रिपोर्ट्स के मुताबिक नित्यानंद पीठ कई देशों में मंदिर, आश्रम व गुरुकुल भी बनवाने का दावा किया . नित्यानंद के करोड़ों फॉलोअर्स रहे हैं इसमें कोई शक नहीं है.

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बताया जाता है कि नित्यानंद ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है.

अनुयायी भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका समेत दुनिया के अन्य कई देशों में फैले

ऐसे डरावने स्वामी नित्यानंद के अनुयायी भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका समेत दुनिया के अन्य कई देशों में फैले बताए जाते हैं. सन् 2012 में नित्यानंद पर उसी के एक भक्त ने रेप का आरोप लगाया तो बचाव की खातिर बाबा ने खुद को नपुंसक बताने की कोशिश की थी, लेकिन सन् 2014 में जांच के दौरान उनका यह दावा फर्जी निकला. पता चला कि बाबा यौन क्रिया कर पाने में पूर्णत: समर्थ हैं. बेंगलुरु की एक कोर्ट ने सीआइडी को आदेश दिया कि वह नित्यानंद की संपत्तियों का पूरा ब्योरा पेश करे. यह बात है अब से दो साल पहले की. यानी फरवरी सन् 2020 की. उससे पहले 19 फरवरी सन् 2020 को अदालत ने नित्यानंद की गिरफ्तारी के लिए वारंट भी जारी कर दिया था. मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने, सुप्रीम कोर्ट का आदेश पढ़कर सुनाया जिसमें ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया था कि, नित्यानंद की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं. इसके बाद रामनगर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आरोपी नित्यानंद की लगातार अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए, सीआईडी टीम को आदेश दिया कि वो नित्यानंद की तमाम चल और अचल संपत्तियों का पूर्ण ब्यौरा पेश करे. इसके अलावा उसके बिड़दी और देश के अन्य हिस्सों में मौजूद आश्रमों की भी पूर्ण जानकारी और परि-संपत्तियों का ब्यौरा सीआईडी द्वारा संबंधित कोर्ट के सामने पेश किया जाए. इससे पहले कर्नाटक हाइकोर्ट ने 5 फरवरी सन् 2020 को नित्यानंद की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी जिसके, बाद रामनगर की अदालत ने 19 फरवरी 2020 को उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था. यहां बताना जरुरी है कि नित्यानंद, 2019 के नवम्बर महीने के आखिर से गायब चल रहे हैं.

अरबपति बाबा!

कहा जाता है कि साधु संतों का धन दौलत से भला क्या वास्ता? उन्हें तो बदन पर एक लंगोट भर की जरुरत होती है. मगर भारत के मोस्टवॉन्टेड बाबा नित्यानंद की संपत्तियों का ब्योरा देख सुनकर हर कोई हैरत में रह जाता है. हालांकि इसकी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा इसके खिलाफ मुकदमों की सुनवाई कर रही अदालतें भी मांग चुकी हैं. बाबा की एक जगह पर कहीं चल अचल संपत्तियों की कीमत दर्ज मिल पाना भले ही मुश्किल क्यों न हो. मगर मीडिया की अलग अलग खबरें इसकी चुगली करने के लिए काफी हैं. जिसके मुताबिक कर्नाटक के बिदादी में ही नित्यानंद का आश्रम जिस जगह पर मौजूद है वही करीब 21 एकड़ का एरिया है. जोकि करोडों रुपए की जमीन बताई जाती है. इसकी पुष्टि डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट भी करती है. जिसमें बताया गया है कि बाबा की इस संपत्ति से संबंधित कागजात भी अखबार के पास हैं. डेक्कन हेराल्ड की ही रिपोर्ट के मुताबिक, यह जमीन बाबा ने 15 अक्टूबर सन् 2003 को रजिस्टर्ड कराई थी. नित्यानंद ने अपने आश्रम के लिए यह जमीन लेते समय खुद को किसान बताया था. बाद में जब मामला खुला तो पता चला कि नित्यानंद ने यह जमीन किसी रामलिंगा गुप्ता, एन मुकुंद, शाहनथ, शाहनथ कुमार गुप्ता, केआर शशिधर, एन प्रताप, एस विनायक, एचए विजयेंद्र और इंदर हरि इंदर से खरीदी थी. इन सबने भी खुद को किसान ही बताया था. इस संपत्ति की खरीद में सिविल वकील ने दावा किया था कि नियम कानूनों की धज्जियां उड़ाई गई हैं. साथ ही Sections 79(A)(B) and 83 of the Karnataka Land Reforms Act, 1961. Section 79(B) का खुला उल्लंघन किया गया है.

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क्या कहते हैं कानूनविद….

इस बारे में टीवी9 भारतवर्ष ने बात की दिल्ली हाईकोर्ट के वरीष्ठ क्रिमिनल लॉयर और दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड डीसीपी एल एन राव से. डीसीपी राव ने कहा, ” सिर्फ नित्यानंद ही क्यों, इसके जैसे और भी तमाम चार सौ बीस और आपराधिक किस्म के बाबाओं का अपना कोई ईमान धर्म नहीं होता है. यह धर्म की आड़ में इंसान की भावनाओं को खरीदने बेचने का काला कारोबार कर रहे हैं. इस टाइप के बाबा कुछ दिन तो अंधभक्तों की आंखों पर परदा डालकर उन्हीं की जेबों से खूब खाते-कमाते हैं. लेकिन जब यह अपने ही कुकर्मों के चलते कानून के शिकंजे में फंसते हैं तो आसाराम, रामपाल और नित्यानंद से बदनाम बाबा बनकर जमाने के सामने आते हैं. जहां तक बात सिर्फ नित्यानंद की है तो, इसके खिलाफ दुष्कर्म से लेकर अपहरण तक के मुकदमे दर्ज हैं. इंटरपोल का ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी है. हिंदुस्तानी पुलिस सहित कई एजेंसियां इसे तलाश रही हैं.

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