सिगरेट में निकोटिन की मात्रा कम करने से क्या इसकी लत को खत्म किया जा सकता है?

Cigarette

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रशासन सिगरेट में निकोटिन (Nicotine In cigarette ) की मात्रा कम करने पर विचार कर रहा है. सिगरेट और अन्य तंबाकू प्रोडक्ट की लत को कम करने के लिए यह योजना बनाई गई है. इसके तहत सिगरेट और कुछ अन्य तंबाकू उत्पादों पर निकोटिन की अधिकतम मात्रा को निर्धारित किया जाएगा. फेडरल ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) का कहना है कि इस योजना के लागू होने से स्मोकिंग करने वाले लोगों को सिगरेट छोड़ने में मदद मिलेगी और इसकी लत भी कम होगी. जब लोग धूम्रपान कम करेंगे तो कैंसर से होने वाली मौतों को भी कंट्रोल में किया जा सकेगा. साथ ही पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा.

भारत में भी सिगरेट पीने वालो की संख्या काफी अधिक है. ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे में बताया गया है कि देश में सिगरेट पीने वालों की संख्या 10 करोड़ से ज़्यादा है. कई मामलों में सिगरेट की वजह से लंग्स कैंसर के केस भी रिपोर्ट किए गए हैं. कई बार लोग इसकी लत को छोड़ना भी चाहते हैं, लेकिन इसमें सफल नहीं हो पाते हैं. ऐसे में क्या सिगरेट में निकोटिन की मात्रा कम करने से इसकी लत और स्मोकिंग की वजह से होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है? ये जानने के लिए Tv9 ने कैंसर एक्सपर्ट से बातचीत की है.

दिल्ली के धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशयलिटी हॉस्पिटल के आन्कोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. अंशुमान कुमार ने बताया कि यह सच है कि निकोटिन की वजह से ही सिगरेट की लत लगती है. निकोटिन शरीर में कई प्रकार के केमिकल को एक्टिव कर देता है. इससे शरीर अलर्ट और एक्टिव हो जाता है. ये फील गुड हार्मोन को भी एक्टिव कर देता है. इससे इंसान को काफी अच्छा फील होता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि निकोटिन की मात्रा कम करने से सिगरेट की लत कम हो सकती है.

ऐसा इसलिए क्योंकि जब कोई इंसान सिगरेट पीना शुरू करता है तो वह कम मात्रा में ही निकोटिन लेता है, लेकिन धीरे-धीरे उसे स्मोकिंग करना अच्छा महसूस लगने लग जाता है और उसके शरीर को निकोटिन की लत लग जाती है. ऐसे में वह सिगरेट पीने की आदत को बढ़ाता रहता है और एक से ज्यादा सिगरेट पीने लगता है. क्योंकि एक बार की स्मोकिंग से उसकी निकोटिन की तलब खत्म नहीं होगी तो वह एक से ज्यादा सिगरेट पीने लगता है. कई मामलों में व्यक्ति चेन स्मोकर भी बन जाता है. क्योंकि कम सिगरेट से उसकी निकोटिन की तलब खत्म नहीं होती है. इसलिए अगर निकोटिन की मात्रा कम भी की गई तो कोई फायदा नहीं है. क्योंकि कम मात्रा होने पर व्यक्ति ज्यादा स्मोकिंग करेगा. इससे सिगरेट की सेल और बढ़ेगी.

सिगरेट में निकोटिन के अलावा और भी खतरनाक केमिकल

डॉ. के मुताबिक, सिगरेट में पाया जाने निकोटिन काफी खतरनाक होता है, जिससे लोगों को हार्ट की बीमारी हो सकती है. लेकिन सिगरेट में सिर्फ निकोटिन ही खतरनाक नहीं होती है, बल्कि इसमें मिले हुए तंबाकू के अंदर 40 से भी ज्यादा खतरनाक केमिकल होते हैं. इनकी वजह से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां होती है. इसके अलावा करीब 4 हजार केमिकल और भी होते हैं, जो शरीर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचाते हैं.इनकी मात्रा को कभी भी कम नहीं किया जा सकता है. ऐसे में निकोटिन अगर कम भी कर दी गई तो भी सिगरेट पीना उतना ही खतरनाक होगा.

Woman Smoking A Cigarette

(धूम्रपान से स्वास्थ्य खराब हो रहा)

तंबाकू उत्पादों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध

डॉ. अंशुमान ने बताया कि तंबाकू का अर्थशास्त्र कहता है कि हर साल तंबाकू उत्पादों की बिक्री से सरकार को जितना राजस्व मिलता है. इससे कहीं ज्यादा पैसा सिगरेट पीने या तंबाकू का सेवन करने से बीमार पड़ने वाले लोगों के इलाज में खर्च हो जाता है. ऐसे में जरूरी है कि तंबाकू उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए. इसका मतलब कै कि तंबाकू की खेती से लेकर इसकी ब्रिकी तक सभी स्तर पर रोक लगाई जाए.

किसान नहीं होगा बेरोजगार

अब इसमें सवाल उठता है कि क्या तंबाकू की खेती खत्म करने किसानों का नुकसान नहीं होगा? इस सवाल के जवाब में डॉ. ने कहा कि ऐसा करने से किसान बेरोजगार नहीं होगा . क्योंकि जिस जमीन पर तंबाकू की खेती होती है होता है वहां दलहन फसलों की खेती भी आसानी से हो सकती है.

Cigarette Smoking

(सिगरेट का धुंआ भी प्रदूषण का एक बड़ा कारण है)

नशा मुक्ति केंद्र से सिगरेट की लत को छुड़ा सकते हैं

डॉ. ने बताया कि अस्पतालों मे सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की लत को छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति केंद्र होते हैं. यहां लोगों का इलाज करके उनके सिगरेट की लत को खत्म किया जा सकता है. इसके लिए काउंसलिंग से लेकर दवाओं तक का सहारा लिया जाता है. इन केंद्र पर लोगों कि लत को काफी हद तक खत्म किया जाता है.

डॉ. अंशुमान ने कहा कि लोगों को सिगरेट छोड़ने के लिए प्रयास करना चाहिए. क्योंकि इससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ता है. जितना पैसा लोग सिगरेट और तंबाकू के सेवन में खर्च कर देते हैं. उससे कहीं ज्यादा पैसा बाद में इनसे होने वाली बीमारियों के इलाज़ में लग जाता है. ऐसे में जरूरी है कि लोग स्मोकिंग की लत को छोड़ने का प्रयास करें और इसके समाधान के लिए सरकारी सहायता या डॉक्टरों से मदद लें.

Similar Posts