सिक्किम के मुख्यमंत्री को अयोग्यता पर मिली छूट पर कल होगी अहम सुनवाई, मंत्री रहते हुए गबन का लगा था आरोप

Delhi High Court

सिक्किम (Sikkim) के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग (Prem Singh Tamang) को चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा अयोग्यता कि अवधि में छूट देने के मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को अहम सुनवाई करेगा. ढाई साल पहले अक्टूबर 2019 में इस मुद्दे पर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर तमांग समेत विभिन्न पक्षों से जवाब तलब किया था. उसके बाद से इस मामले में सुनवाई कई बार अपरिहार्य कारणों से टल गई और अंततः 22 अप्रैल को मामले पर सुनवाई होगी.

तमांग कि अयोग्यता को चुनाव आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 (1) (एम) के तहत छह साल से कम करके एक साल एक माह कर दिया था. आयोग के इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. जबकि दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने 12 जुलाई, 2019 को सिक्किम के मुख्यमंत्री के रूप में प्रेम सिंह तमांग की नियुक्ति को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र और सिक्किम सरकार से जवाब मांगा था. दरअसल सर्वोच्च अदालत में दायर याचिका में भी कहा गया कि वह पद संभालने के योग्य नहीं हैं, क्योंकि उन्हें हेराफेरी के लिए दोषी ठहराया गया था. याचिका में तर्क दिया गया कि चुनाव कानून के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो भ्रष्टाचार के अपराधों के तहत दोषी है, उसे छह साल की अवधि के लिए अयोग्य घोषित किया जाएगा. उसकी सजा की तारीख से अगले छह साल तक वह चुनाव नहीं लड़ सकेगा. लेकिन तमांग के मामले में चुनाव आयोग ने छूट प्रदान कर दी.

सुप्रीम कोर्ट से राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में तमांग के किसी भी बड़े नीतिगत निर्णय या अन्य महत्वपूर्ण शासन कर्तव्यों को लेने पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका पर भी पक्षों से जवाब मांगा था. 25 साल तक राज्य पर शासन करने वाली अपदस्थ सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट पार्टी के बिमल डावरी शर्मा की याचिका में आरोप लगाया गया है कि तमांग एक ‘अयोग्य’ व्यक्ति थे जो 2024 तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हैं. याचिका में कहा गया कि तमांग को न केवल चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई है, बल्कि अयोग्य और चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होने के बावजूद उन्हें सिक्किम के मुख्यमंत्री के रूप में गलत तरीके से चुना गया है.

पशुपालन और चर्च विभाग के मंत्री रहते हुए गबन का है आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि दुधारू गायों की खरीद और वितरण में अनियमितताओं के संबंध में तमांग को पशुपालन और चर्च विभाग के मंत्री रहते हुए 9,50,000 रुपये के गबन का दोषी ठहराया गया था. याचिका में कहा गया है कि तमांग को आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक साजिश और एक लोक सेवक के रूप में अपनी स्थिति के ‘घोर दुरुपयोग’ के लिए अपराधों का दोषी ठहराया गया था, जिसे 2017 और 2018 के बीच एक साल की कैद की सजा हुई थी.

तमांग की सिक्किम के मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्ति ‘असंवैधानिक’ थी

याचिका में कहा गया है कि यह स्पष्ट है कि आरपीए यह निर्धारित करता है कि गंभीर आपराधिक अपराधों का कमीशन एक व्यक्ति को चुनाव लड़ने या लोगों के प्रतिनिधि के रूप में जारी रखने के लिए अयोग्य बनाता है. इस तरह का प्रतिबंध आपराधिक तत्वों को सार्वजनिक पद धारण करने से रोकने के लिए आवश्यक निवारक निवारक प्रदान करता है. जिससे प्रतिनिधि सरकार की सत्यनिष्ठा को संरक्षित किया जा सके. याचिका में कहा गया है कि तमांग की सिक्किम के मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्ति ‘असंवैधानिक’ थी और संविधान के मूल मूल का उल्लंघन करती है. याचिका में कहा गया है, सिक्किम राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में तमांग की नियुक्ति राष्ट्र के हित, आम नागरिक हित, सांप्रदायिक सद्भाव और सुशासन की व्यापकता के खिलाफ है.

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