सामने आई चीन के यातना शिविरों की ‘खौफनाक’ कहानी, आधी रात को गायब कर लोगों की हो रही हत्या, हर साल बेच रहा 150,000 अंग

China

चीन हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए जबरन लोगों के शरीर से अंगों (China Organ Harvesting) को निकालकर उनकी कालाबाजारी कर अरबों डॉलर कमा रहा है. दुनिया के टॉप विशेषज्ञों ने अमेरिकी कांग्रेस में गुरुवार को बताया कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of China) यातना शिविरों में रहने वाले करीब 50,000 लोगों को मारकर उनके अंगों को उनके शरीर निकालकर हर साल बेच देती है. विकटिम्स ऑफ कम्युनिज्म मेमोरियल फाउंडेशन में चाइना स्टडीज के वरिष्ठ रिसर्चर और ‘खूनी हार्वेस्ट’ और ‘हत्या’ जैसे विषयों पर हुए कार्य के सह-लेखक एथन गुटमन ने कहा कि हर स्वस्थ शख्स को मारा जाता है, ताकि उसके शरीर से दो से तीन अंग निकाले जा सकें.

इसका मतलब है कि चीन इन पीड़ितों के शरीर से निकाले गए कम से कम 150,000 अंगों को बेच देता है. गुटमन की तरह कई अन्य विशेषज्ञों ने भी इस मसले पर अहम जानकारी दी. ईस्ट तुर्किस्तान के एक सर्जन एन्वर तोहती ने दावा किया कि उन्हें 1995 में एक राजनीतिक कैदी के शरीर से अंगों को निकालने के लिए मजबूर किया गया था. उन्होंने ये बात रिप्रेजेंटेटिव क्रिस स्मिथ द्वारा आयोजित सुनवाई में कही. इसकी अध्यक्षता मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष टॉम लांतोस ने की. गुरुवार को हुई सुनवाई का शीर्षक ‘चीन में होने वाली अंगों की हर्वेस्टिंग: साक्ष्यों की जांच’ था.

1000 यातना शिविरों का नेटवर्क

कई साल से चीन को लेकर ऐसी खबरें छप रही हैं कि वह यातना शिविर में रहने वाले लोगों के अंगों को निकालकर उनकी कालाबाजारी करता है. ये अंग अमीर खरीदारों को बेचे जाते हैं. अप्रैल में ऑस्ट्रेलिया की नेशनल यूनिवर्सिटी में हुई हालिया रिसर्च में चीन पर ‘दिल निकालने’ के आरोप लगे हैं. चीन ने कब्जे वाले ईस्ट तुर्किस्तान, खासतौर से पश्चिमी क्षेत्र में, जहां बड़ी संख्या में उइगर मुसलमान रहते हैं, वहां करीब 1000 यातना शिविरों का नेटवर्क बनाया हुआ है. इन लोगों पर चीन लंबे समय से अत्याचार कर रहा है, इनका ब्रेन वॉश हो रहा है, गुलाम बनाकर रेप किया जा रहा है, हत्या हो रही है और दूसरे धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के साथ भी यही सलूक होता है.

चीनी अधिकारियों ने भी यातना शिविरों की मौजूदगी से इनकार नहीं किया है लेकिन उनका दावा है कि यह ‘व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र’ हैं. जहां के लोग राजधानी बीजिंग के लोगों से पिछड़े हैं और इन्हें व्यावसायित शिक्षा दी जा रही है, ताकि यह आधुनिक चीनी अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें. यातना शिविर में रहने वाले लोगों के इंटरव्यू का हवाला देते हुए गुटमन ने कांग्रेस से कहा कि साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि चीन यातना शिविर में रहने वाले पीड़ितों की जांच करता है, ताकि ये पता लगाया जा सके उनके अंग ट्रांसप्लांट करने के लिए काम के हैं या फिर नहीं. जो जांच पास कर लेते हैं, वो अचानक गायब हो जाते हैं.

शिविरों मे दो तरह के लोग रहते हैं

गुटमन ने कहा, ‘पहले शिविरों में दो तरह के लोग रहते थे: पहले वो जब काफी युवा थे, जैसे 18 साल की उम्र वाले. लंच के समय उनके ग्रेजुएट होने की घोषणा की जाती थी. कई बार थोड़ी बहुत तालियों से उनका प्रोत्साहन किया जाता था. यहां ग्रजुएट होने का मतलब है कि वह शख्स अब बंधुआ मजदूरी के लिए तैयार है. उससे फैक्ट्री में काम लिया जाता है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘दूसरा ग्रुप में आमतौर पर 28 या 29 साल के लोग होते हैं. इसे चीन अंगों को निकालने के लिए बेहतर उम्र मानता है. मेडिकल जांच के बाद इस ग्रुप के लोग आधी रात को गायब हो जाते हैं. 28 साल के करीब के 2.5% से 5% तक लोग हर साल गायब हो जाते हैं.’

उन्होंने आगे बताया, ‘अगर हम मानें कि 2017 के बाद से किसी भी समय शिविरों में लगभग एक लाख उइगर, कजाख, किर्गिज और हुई लोगों को रखा गया है, तो मेरा अनुमान कहता है कि हर साल यातना शिविर में रखे गए 25,000 से 50,000 बंदियों के अंगों को हर साल निकाला जाता है. शिंजियांग के रहने वाले 28 साल की उम्र के युवाओं को दो से तीन अंग निकालने के लिए मार दिया जाता है. यानी इनके शरीर से कम से कम 50,000 और अधिक से अधिक 150,000 अंग निकाले जाते हैं.’ विशेषज्ञों का कहना है कि इन अंगों को ट्रांस्पोर्ट करने के लिए चीनी एयरपोर्ट पर एक्सप्रेस लेन हैं. खौसतौर से ईस्ट तुर्किस्तान के एयरपोर्ट पर.

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