सरसों, स्वीट कॉर्न और इन सब्जियों की बुवाई का आ गया है वक्त, ध्यान दें किसान

Mustard Farming

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसलों की बुवाई को लेकर अलर्ट रहने के लिए कहा है. उन्होंने इस मौसम में बुवाई की जाने वाली फसलों और लगने वाले रोगों को लेकर विस्तार से जानकारी दी है. उनके मुताबिक किसान स्वीट कोर्न (माधुरी, विन ऑरेंज) तथा बेबी कोर्न (एचएम-4) की बुवाई कर सकते हैं. सरसों की अगेती बुवाई कर सकते हैं. इसकी उन्नत किस्मों में पूसा सरसों-28 और पूसा तारक शामिल है. अगेती मटर की बुवाई भी की जा सकती है. इसकी उन्नत किस्म पूसा प्रगति है.

बीजों को कवकनाशी केप्टान @ 2.0 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से मिलाकर उपचार करें. उसके बाद फसल विशेष राईजोबियम का टीका अवश्य लगाएं. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक राईजोबियम को बीज के साथ मिलाकर उपचारित करके सूखने के लिए किसी छायेदार स्थान में रख दें. अगले दिन बुवाई करें.

गाजर की बुवाई करने का सही समय

इस मौसम में किसान गाजर की बुवाई मेड़ों पर कर सकते हैं. इसकी उन्नत किस्में- पूसा रुधिरा है. बीज दर 4.0 किलोग्राम प्रति एकड़ है. बुवाई से पूर्व बीज को केप्टान @ 2 ग्राम प्रति किग्रा की दर से उपचार करें. खेत में देसी खाद, पोटाश और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें. गाजर की बुवाई मशीन द्वारा करने से बीज एक किलोग्राम प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है. जिससे बीज की बचत तथा उत्पाद की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है.

गोभी में इस कीट की निगरानी करें किसान

सब्जियों में (टमाटर, बैंगन, फूलगोभी व पत्तागोभी) शीर्ष एवं फल छेदक एवं फूलगोभी/पत्तागोभी में डायमंड़ बैक मोथ कीट की निगरानी हेतू फेरोमोन ट्रैप @ 3-4/एकड़ लगाएं. जिन किसानों की टमाटर, हरी मिर्च, बैंगन व अगेती फूलगोभी की पौध तैयार है, वे मौसम को ध्यान में रखते हुए रोपाई (ऊथली क्यारियों या मेंड़ों) पर करें. इस मौसम में किसान मूली (पूसा चेतकी), पालक (पूसा भारती, आलग्रीन), चौलाई (पूसा लाल चौलाई, पूसा किरण) आदि फसलों की बुवाई कर सकते हैं.

उन्नत बीज की बुवाई करें

कद्दूवर्गीय एवं अन्य सब्जियों में मघुमक्खियों का बडा योगदान है. क्योंकि, ये परागण में सहायता करती हैं, इसलिए मधुमक्खियों को खेत में रखें. कीड़ों एवं बीमारियों की निरंतर निगरानी करते रहें. कृषि ज्ञान केंद्र से संपर्क रखें व सही जानकारी लेने के बाद ही दवाईयों का प्रयोग करें. इस मौसम में फसलों व सब्जियों में दीमक का प्रकोप होने की संभावना रहती है इसलिए किसान फसलों की निगरानी करें. यदि प्रकोप दिखाई दे तो क्लोरपाइरीफॉस 20 ईसी @ 4.0 मिली/लीटर सिंचाई के साथ दें.

लाइट ट्रैप का करें इस्तेमाल

इस मौसम में किसान अपने खेतों की नियमित निगरानी करें. यदि फसलों व सब्जियों में सफेद मक्खी या चूसक कीटों का प्रकोप दिखाई दें तो इमिडाक्लोप्रिड दवाई 1.0 मिली/3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव आसमान साफ होने पर करें. किसान प्रकाश प्रपंच (Light Trap) का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए एक प्लास्टिक के टब या किसी बड़े बरतन में पानी और कीटनाशक मिलाकर एक बल्ब जलाकर रात में खेत के बीच में रखे दें. लाइट से कीट आकर्षित होकर उसी घोल पर गिरकर मर जाएंगे. इस प्रपंच से अनेक प्रकार के हानिकारक कीटों का नाश होगा.