श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद: मथुरा कोर्ट उपासना अधिनियम पर 26 अप्रैल को करेगा सुनवाई, ये है सुन्नी वक्फ बोर्ड की मांग

Mathura

श्री कृष्ण जन्मभूमि को लेकर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मथुरा न्यायालय में दाखिल वादों पर सुनवाई लगातार जारी है. उपासना अधिनियम पर अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी. दरअसल इस मामले पर बहुत से लोगों ने अपने-अपने वाद दाखिल किए हैं, हिंदू पक्ष ने मथुरा में बनी शाही ईदगाह मस्जिद को श्री कृष्ण की जन्मभूमि पर बना हुआ बताया है. साथ ही कहा है कि वह भूमि श्री कृष्ण जन्मभूमि (Sri Krishna Janambhoomi) की है. इसी को लेकर मंगलवार को मथुरा कोर्ट (Mathura Court) में श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के वाद में सुनवाई हुई. इसके साथ ही शाही ईदगाह मस्जिद और सुन्नी वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों ने भी अपना-अपना पक्ष रखा.

इस दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अदालत से श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के दावे को खारिज करने की मांग की और कहा कि यह मुकदमा सुनवाई के योग्य नहीं है. वहीं श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास और शाही ईदगाह मस्जिद और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच कोर्ट में घंटों तक बहस चली. इसी बीच उपासना अधिनियम स्थल पर बहस करने की भी मांग की गई. कोर्ट में मौजूद शाही ईदगाह मस्जिद के पदाधिकारियों ने उपासना स्थल अधिनियम पर सुनवाई करने की बात कही. इस पर सुनवाई के लिए अदालत ने 26 अप्रैल की तारीख तय की है.

26 अप्रैल को उपासना स्थल अधिनियम पर सुनवाई

मामले में जानकारी देते हुए श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उनको बहस के लिए कम समय दिया गया था. अब मामले पर बहस के लिए कोर्ट ने 26 अप्रैल की तारीख तय की है, इस दौरान उपासना अधिनियम पर पक्ष रखा जाएगा. बता दें कि कोर्ट में श्री कृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ जमीन को मुक्त कराने और शाही ईदगाह मस्जिद में नमाज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका दायर की गई थी. इसी मामले पर सभी पक्ष अपनी-अपनी दलीलें देते हैं.

‘श्रीकृष्ण जन्मस्थल पर सदियों से हो रहे आक्रमण’

बता दें कि 26 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान उपासना स्थल अधिनियम पर सुनवाई के लिए 19 अप्रैल की तारीख तय की गई थी. इससे पहले श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति समिति की ओर से कोर्ट में दावा पेश करने वाले एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा था कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थल पर सदियों से आक्रमण होते रहे हैं. जिनकी निशानी के रूप में बहुत से पुरातात्विक साक्ष्य मौजूद हैं और वर्तमान में शाही ईदगाह प्रत्यक्ष प्रमाण के रूप में मौजूद है. अब उपासना स्थल अधिनियम पर 26 अप्रैल को कोर्ट सुनवाई करेगा.

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