व्यापारी ने 100वीं बार रक्तदान कर लगाया शतक; कोरोना काल में भी कम नहीं हुआ हौसला

शहर के व्यवसायी शब्बीर ने क्रिकेट के बल्ले से नहीं, बल्कि सौ रक्तदान कर शतक पूरा किया है. लगभग 26 सालों से रक्तदान कर वे नवजात से लेकर बुजुर्ग व्यक्ति को रक्तदान देकर जान बचा चुके है.

उज्जैन के कारोबारी ने 100वीं बार रक्तदान कर बनाया शतक.

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मध्य प्रदेश में उज्जैन शहर के एक व्यापारी ने क्रिकेट के बल्ले से नहीं बल्कि 100 बार रक्तदान कर एक अनोखा शतक पूरा किया है. दरअसल, साल 1996 में अपनी बुआ को कैंसर के ऑपरेशन के दौरान ब्लड की जरूरत पड़ने पर आई कई समस्याओं से सीख लेकर इस व्यापारी ने हर समय रक्तदान करने का एक संकल्प लिया था, जिसे उन्होंने माधव सेवा न्यास में आयोजित रक्तदान शिविर में 100 वीं बार रक्तदान कर अब तक जारी रखा है. बता दें कि, शब्बीर हुसैन कागजी के रहने वाले कमरी मार्ग स्क्रैप के व्यापारी हैं. जोकि रक्तदान के लिए हमेशा ही तैयार रहते हैं.

दरअसल, शब्बीर हुसैन कागजी का ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव है. जोकि बहुत ही कम लोगों का होता है. इसीलिए शब्बीर हमेशा रक्तदान कर जरूरतमंदों की मदद करते रहते हैं. शब्बीर बताते है कि बोहरा ब्लड ग्रुप के साथ ही वे निरामया रक्त समूह और सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों से जुड़े हुए हैं. जहां किसी भी मरीज को रक्त की जरुरत लगते ही वे तुरंत उन्हें फोन लगाते हैं और वे ब्लड डोनेट करने पहुंच जाते हैं. लगभग 26 सालों से रक्तदान करने वाले शब्बीर अब तक अपनी इस सेवा के माध्यम से नवजात से लेकर बुजुर्ग व्यक्ति की गंभीर सर्जरी तक मे रक्तदान कर कई लोगो की जान बचा चुके है.

कोरोना काल में भी किया था रक्तदान

वहीं, शब्बीर ने बताया कि कोरोना के दौरान कई बार ऐसी स्थितियां बनी जब डिलीवरी केस मे गर्भवती को रक्त की आवश्यकता थी. ऐसे समय में जब पुष्पा मिशन हॉस्पिटल से मुझे फोन आया और कहा गया कि आप रक्तदान करने आए हम आपका पास बनवाकर देते हैं. इस पर मैंने हामी भरी और पास के माध्यम से ही मैं अस्पताल पहुंचा और रक्तदान किया. कोरोना के दौरान अपनी जान की परवाह किए बगैर रक्तदान करने पहुंचने वाले शब्बीर से जब कोरोना मे जान जाने के डर के बारे मे पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराकर कहा कि यह नियमित रक्तदान करने का ही फल है कि आज मैं 42 साल की उम्र में भी पूरी तरह स्वस्थ हूं. रक्तदान करने से हम निरोगी रहते हैं इससे हमे कोई रोग नही होता. वैसे भी मैं लोगों की दुआएं कमाने ही निकला हूं.

गर्भवती महिलाओं के लिए किया सबसे ज्यादा रक्तदान

शब्बीर बताते हैं कि वैसे तो उनके पास जब भी किसी संस्था या अस्पताल से रक्तदान करने के लिए फोन आता है वह तुरंत रक्तदान कर ऐसे लोगो की मुश्किलों को हल करने का प्रयास करते हैं, लेकिन अब तक वह सबसे अधिक बार गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के दौरान रक्तदान कर चुके हैं. डिलीवरी के दौरान ही अधिकतर महिलाओ को ब्लड की जरूरत होती है. ऐसे में यदि उन्हे समय पर रक्त नही चढ़ाया जाता तो डिलीवरी मे कई परेशानियां आ सकती है.

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शब्बीर बोले- रक्तदान करना ही है मेरा मकसद

इस दौरान शब्बीर ने बताया कि रक्तदान समूहो के साथ ही उनके द्वारा अब तक किए गए रक्तदान का रिकॉर्ड जिला चिकित्सालय, चैरिटेबल हॉस्पिटल, आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज, पुष्पा मिशन और शहर के सभी प्राइवेट अस्पतालों में है. जहां ब्लड की आवश्यकता लगते ही वह रक्तदान करने पहुंच जाते हैं. शब्बीर का कहना है कि 100 वी बार रक्तदान कर मैं काफी खुश हूं . उन्होंने बताया कि मेरा यही मकसद है कि आने वाले समय में भी मे लोगों के लिए ऐसे ही काम करता रहूं.

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