विराट कोहली को सचिन या गावस्कर जैसे लोगों से मदद लेने के लिए ड्रॉइंग बोर्ड पर वापस लौटना चाहिए

Virat Kohli Ipl

किसी प्लेयर का ख़राब फॉर्म और इसके साथ आने वाला संघर्ष उसके जीवन का हिस्सा होता है. फिर भी विराट कोहली (Virat Kohli) जैसे अच्छे प्लेयर को दो साल से अधिक समय से संघर्ष करते देखकर दुख होता है. किसी भी महान खिलाड़ी में वापसी करने की सहज क्षमता होती है. जब प्रशंसकों को उनके फॉर्म में वापसी का बेसब्री से इंतजार था, विराट ने मंगलवार (19 अप्रैल) को लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के खिलाफ रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (RCB) के लिए खेलते हुए बिना शतक बनाए अपने करियर का 100 वां मैच खेला. जाहिर तौर पर रन नहीं बन रहे हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट में जहां दिसंबर 2019 के बाद से पिछले 17 मैचों में उनका औसत 28.03 है.

इसी अवधि के दौरान, 21 एक दिवसीय मैचों में उनका औसत 37.66 है, हालांकि रन काफी कम स्कोर नहीं हुए हैं, क्योंकि उन्होंने 10 अर्धशतक बनाए हैं, जिसमें 89 उनका सर्वोच्च स्कोर है, जो 2020 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो मौकों पर आया था. इसी अवधि के दौरान सबसे छोटे फॉर्मेट T20I में आधा दर्जन नाबाद पारियों – 94*, 70*, 30*, 73*, 77* और 80* – की बदौलत विराट का 25 मैचों में 56.40 का शानदार औसत रहा.

हैरान कर रहे कोहली के आउट होने के तरीके

टेस्ट क्रिकेट में कोहली के खराब प्रदर्शन का परेशान करने वाला पहलू इस अवधि के दौरान छह अर्धशतकों को बड़ी पारियों में बदलने में उनकी अक्षमता रही है. उन्होंने जनवरी 2022 में केपटाउन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सबसे अधिक 79 रन बनाए थे. एक और हैरान करने वाली बात उनके आउट होने का तरीका है. 17 टेस्ट मैचों की 30 से अधिक पारियों में कोहली 17 मौकों में से आठ बार विकेटकीपरों द्वारा, पांच बार पहली या दूसरी स्लिप पर और चार मौकों पर या तो गली या शॉर्ट लेग में लपके गए. घरेलू पिच पर खेलते हुए कोहली 11 पारियों में से आठ मौकों पर स्पिनरों द्वारा आउट हुए, चार बार बोल्ड हुए और अन्य चार पारियों में लेग बिफोर हुए.

सचिन ने 2021 में बताई थीं गड़बड़ियां

ऐसा लगता है कि इसमें एक पैटर्न है. या तो कोहली अपने बॉडी से दूर तेज गेंदबाजों के लिए खेल रहे हैं और स्पिन गेंदबाजों का सामना करने के लिए टर्निंग पिचों पर बहुत अधिक आगे बढ़कर खेलते हुए आउट हो जाते हैं. विराट के खेल में आई तकनीकी कमियों के बारे में बात करते हुए अगस्त 2021 में सचिन तेंदुलकर ने कहा था, ‘विराट की अच्छी शुरुआत नहीं हुई है. यह माइंड ही है जो तकनीकी त्रुटियों की ओर ले जाता है, और अगर शुरुआत अच्छी नहीं है तो आप बहुत सी चीजों के बारे में सोचना शुरू करते हैं. क्योंकि चिंता का स्तर अधिक होता है और आप अपने मूवमेंट के लिए अधिक परेशान दिखते हैं. जब कोई बल्लेबाज अच्छे फॉर्म में नहीं होता है तो आप या तो बहुत दूर चले जाते हैं या अपने पैरों को बिल्कुल भी नहीं मूव करते हैं. फॉर्म आपके मन की स्थिति भी है जो बॉडी के साथ तालमेल बिठाते हुए काम करता है.”

ब्रेक नहीं कमियां सुधारने की जरूरत

क्रिकेट से ब्रेक लेने का फैसला उन्हें और अधिक आउटडेटेड बना सकता है. इसके बजाय विराट को ड्रॉइंग बोर्ड पर वापस जाने और अपने खेल में तकनीकी त्रुटियों को दूर करने की आवश्यकता है. इसके अलावा उन्हें अपने माइंड को अधिक आराम देने की जरूरत है. यह भी आश्चर्य की बात है कि क्या विराट जिम में खुद की ओवरट्रेनिंग कर रहे हैं?

जिस तरह से उन्होंने 2014 के इंग्लैंड दौरे के निराशाजनक दौरे के बाद सचिन तेंदुलकर से मदद मांगी थी, जहां उन्होंने पांच टेस्ट की 10 पारियों में 13.50 का औसत स्कोर बनाया था, ठीक उसी तरह उन्हें सचिन या गावस्कर या उनके कद और विशेषज्ञता के खिलाड़ी तक पहुंचने की जरूरत है. विराट के लिए ‘स्टूडेंट ऑफ द गेम’ मोड को हिट करने, आराम करने और इस तरह से व्यवहार करने की जरुरत है, जिससे उनके इरादे और विश्वास जाहिर हों.

– अनुपम प्रतिहारी

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