विनेश लगातार आलोचना से परेशान, ट्विटर पर बयां किया दर्द, लिखा-हम भी इंसान हैं

विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया पर ऐसे फैंस पर सवाल उठाए हैं जो कि बिना सोचे समझें खिलाड़ियों की आलोचना करते हैं

विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया पर बयां किया दर्द

भारत की स्टार रेसलर विनेश फोगाट वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश लौटीं हैं. देश के लिए वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो मेडल जीतने वाली इकलौती महिला रेसलर को देश से जिस प्यार और समर्थन की उम्मीद ती वह नहीं मिली. इसी से निराश होकर उन्होंने सोशल मीडिया पर दर्द बयां किया है. उन्होंने बताया कि एक खिलाड़ी कितने दर्द सहता है लेकिन उसकी मेहनत का आकलन बस मेडल से होता है. कई बार फैंस खिलाड़ियों की ओर निर्दयी हो जाते हैं.

एथलीट भी इंसान होते हैं

विनेश ने लिखा, ‘एथलीट भी इंसान होते हैं. खेल हमारे जीवन का बड़ा हिस्सा है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम रोबोट हैं और कोई भी टूर्नामेंट आते ही बस उसकी तैयारी में लग जाते हैं. मुझे नहीं पता कि सिर्फ भारत में ही इतने एक्सपर्ट हैं या बाकी देशों में भी ऐसा होता है. चाहे कोई प्रोफेशनल हो या नहीं हर किसी ने अपने जीवन में मुश्किलें, संघर्ष और चुनौतियों का सामना किया है. हालांकि लोग उन्हें कुछ नहीं कहते. पर कई लोग खुद को खेल का एक्सपर्ट मानते हैं और हमारे करियर पर कमेंट करते हैं. वह ऐसा दिखाता है कि हमें और हमारी ट्रेनिंग को समझते हैं.’

मेडल न लाने पर मांगा जाता है जवाब

विनेश ने आगे लिखा कि एक खिलाड़ी के तौर पर उनसे हर बार जवाब क्यों मांगा जाता है. उन्होंने अपने ट्वीट में आगे लिखा, ‘खिलाड़ी के तौर पर हम ऐसे एक्सपर्ट्स को जवाब देने के बाध्य क्यों है. जो लोग हमारा समर्थन नहीं करते साथ नहीं देते वह हमारी ट्रेनिंग पर सवाल क्यों उठाते हैं. यह देखना बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण हैं कि यह सोचते हैं कि तय कर सकते हैं कि कब हमें खेलना चाहिए औऱ कब रिटायरमेंट लेना चाहिए. एक जीत का मतलब यह नहीं होता कि हमने कुछ खास किया है न ही हार का मतलब होता है कि हमने कुछ नहीं किया है. हार और जीत खिलाड़ी के करियर का हिस्सा होती है. खिलाड़ी हर बार अपना बेस्ट देने की कोशिश करता है.’

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दूसरे खिलाड़ियों से होती हैं तुलना

विनेश ने आगे लिखा, ‘हमें मेडल न लाने के लिए आलोचना झेलनी पड़ती है. खुद को फैन और एक्सपर्ट कहने वाले लोगों को लगता है कि वह जानते हैं कि हमारी ट्रेनिंग में कितनी मेहनत लगती है, कैसे हम तैयारी करते हैं. लेकिन क्या वह यह जानते हैं कि जिन खिलाड़ियों के साथ हमारी तुलना करते हैं उनकी ट्रेनिंग कैसे होती है. क्या दूसरे देशों के समर्थक भी उनको ऐसे ही ट्रोल करते हैं जैसे कि हमें किया जाता है.’

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