वर्ल्ड लिवर डे 2022: अगर आप कम समय में ज्यादा शराब पीते हैं तो सबसे ज्यादा लिवर प्रभावित होता है

Liver

मस्तिष्क के बाद लिवर (Liver) हमारे शरीर का दूसरा सबसे अहम अंग है. यह भोजन को पचाने में मदद करता है. जहरीले पदार्थों को फिल्टर करता है. दवा को डायल्यूट करता है. इसके अलावा ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल का लेवल नियंत्रित करने के साथ-साथ संक्रमण और बीमारियों से लड़ने में मदद करता है. यह ऑर्गन इथेनॉल (Alcohol) मेटाबॉलिज्म की प्राइमरी साइट है. ज्यादा शराब पीने से लगभग सभी अंगों को नुकसान पहुंचता है, लेकिन लिवर सबसे पहले और सबसे गंभीर रूप से प्रभावित होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि शराब का सेवन करने से दुनिया भर में 33 लाख लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और संख्या लगातार बढ़ रही है.

ज्यादा शराब पीने और लिवर की बीमारी के बीच काफी गहरा संबंध हैं. शराब के ज्यादा सेवन को मापने के लिए ‘स्टैंडर्ड ड्रिंक’ नाम की यूनिट का इस्तेमाल किया जाता है. यह 14 ग्राम शुद्ध इथेनॉल युक्त ड्रिंक जितनी होती है. एक स्टैंडर्ड ड्रिंक बनाने वाले अल्कोहलिक ड्रिंक की मात्रा नीचे दी गई है. लिवर की बीमारी होने के पीछे सबसे अहम कारण शराब की मात्रा और उसके सेवन का पैटर्न है. अनुमान है कि अगर पुरुष एक दिन में 40-80 मिलीलीटर और महिलाएं रोजाना 20-40 मिलीलीटर शराब का सेवन करती हैं तो 10 से 12 साल में उन्हें लिवर की गंभीर बीमारी से जूझना पड़ सकता है. अनियंत्रित तरीके से शराब पीना या कम समय में काफी ज्यादा मात्रा में शराब का सेवन करने से लिवर पहले भी खराब हो सकता है.

शराब के कारण लिवर खराब होने का पैटर्न इन तीन स्टेज में बताया जा सकता है:

अल्कोहलिक फैटी लिवर (Alcoholic fatty liver): यह पहली स्टेज है और कई साल तक काफी ज्यादा शराब पीने की वजह से होता है. इस स्थिति में काफी ज्यादा वसा लिवर में जम जाती है और उसके काम में रुकावट डालती है. यदि शराब पीना बंद कर दिया जाए तो लिवर खुद-ब-खुद पहले जैसी स्थिति में आने लगता है.

एक्यूट अल्कोहलिक हेपेटाइटिस: (Acute alcoholic hepatitis) यह बेहद गंभीर स्थिति है, जिसके चलते लिवर की सूजन आ जाती है और इससे लिवर को काफी नुकसान होता है. इसकी वजह से लिवर काफी ज्यादा डैमेज हो जाता है, जिससे लिवर फेल भी हो सकता है.

अल्कोहलिक सिरोसिस:(Alcoholic cirrhosis) यह अल्कोहलिक लिवर डिसीज (ALD) का आखिरी और सबसे गंभीर रूप है. इसमें लिवर में जख्म हो जाते हैं और उसका काम बुरी तरह प्रभावित होता है. इस स्तर पर लिवर को हुए नुकसान को ठीक नहीं किया जा सकता है. सिरोसिस से लिवर खराब हो सकता है और संबंधित व्यक्ति की मौत भी हो सकती है.

लिवर की बीमारी के अन्य सामान्य कारणों का जिक्र करें तो इनमें इंफेक्शन (हेपेटाइटिस बी और सी वायरस), दवाएं, विषाक्त पदार्थ और कुछ आनुवंशिक और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर शामिल हैं. हाल के वर्षों में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर बीमारी (NAFLD)महामारी की तरह फैल रही है, जो चिंताजनक है. इस तरह के मामलों में लिवर में फैट की वजह से सूजन आ जाती है, जिससे लिवर को धीरे-धीरे नुकसान होता है और आखिर में यह सिरोसिस की स्थिति में पहुंच जाता है.

जल्दी पहचान और इलाज से लिवर की बीमारी ठीक हो सकती है

एक बार सिरोसिस होने के बाद इसकी प्रक्रिया में बदलाव नहीं हो सकता है. मरीजों में पीलिया, पैरों में सूजन, फेफड़ों और सीने में तरल पदार्थ का जमा होना, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग (उल्टी या काला मल), मांसपेशियों में कमी और कमजोरी जैसे लक्षण विकसित होने लगते हैं. सिरोसिस किडनी, ब्रेन और लंग्स के कार्य को प्रभावित कर सकता है, जिससे गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जो घातक साबित हो सकती हैं. लिवर सिरोसिस की वजह से लिवर कैंसर भी हो सकता है. अगर इसका पता जल्द नहीं लगा तो हालात काफी ज्यादा बिगड़ सकते हैं.

सिरोसिस के इलाज के दौरान नमक और पानी के सेवन पर प्रतिबंध लगाया जाता है, जिससे पैरों और पेट की सूजन कम होती है. इसके अलावा ब्लीडिंग और गैस्ट्रो-इनटेस्टाइल ब्लीडिंग का जोखिम कम करने के लिए दवाएं दी जाती हैं. जैसे-जैसे लिवर की बीमारी गंभीर होती जाती है, मेडिकल मैनेजमेंट के विकल्प सीमित और कम प्रभावी होते जाते हैं.

लिवर ट्रांसप्लांटेशन एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें मरीज का डैमेज लिवर हटाकर डोनर का स्वस्थ लिवर लगा दिया जाता है. इस तरह के मामलों में डोनर परिवार का सदस्य हो सकता है, जिसका ब्लड ग्रुप मरीज से मैच करना चाहिए. वह (महिला या पुरुष) अपने लिवर का एक हिस्सा डोनेट कर सकता है. इसके अलावा दूसरा मामला कैडवरिक डोनर का हो सकता है, जिसमें मरीज का खराब लिवर हटाकर ब्रेन डेड डोनर का लिवर लगा दिया जाता है. लिवर ट्रांसप्लांटेशन बेहद अहम सर्जिकल प्रोसिजर है, जिसमें मरीजों को अहम संसाधनों की जरूरत होती है. साथ ही, इस तरह की सर्जरी में काफी जोखिम भी होता है.

अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को शराब पीने की आदत है तो मदद के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें. हमें याद रखना चाहिए कि लिवर फॉरगिविंग ऑर्गन है, लेकिन एक बार लिवर खराब हो जाता है तो इससे आपकी जिंदगी पर बेहद खराब असर पड़ता है.

(डॉ. विवेक शेट्टी, लेखक जसलोक अस्पताल में कंसल्टेंट गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन हैं.)

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