लड़की ने ठुकराया प्यार का प्रपोजल तो 10वीं के छात्र ने कर लिया सुसाइड

Suicide

एकतरफा प्यार में लोग क्या कुछ नहीं करने को मजबूर हो जाते हैं. यहां तक कि अपनी जान भी दे देते हैं. ऐसी ही एक घटना महाराष्ट्र के मुबंई के अंधेरी वेस्ट इलाके से सामने आई है, जहां एक किशोर ने एकतरफा प्यार में आत्महत्या कर ली. हालांकि किशोर के अंतिम पलों की कहानी दर्दभरी और रौंगटे खड़ी कर देने वाली है. पुलिस ने किशोर के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. परिवार से शिकायत न मिलने पर पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है.

दरअसल, एकतरफा प्यार में आत्यहत्या का मामला मुबंई के अंधेरी वेस्ट इलाके का है. कक्षा 10 में पढ़ने वाला छात्र एक लड़की से प्यार करता था. रविवार रात को छात्र ने वॉट्सऐप पर लड़की से अपने प्यार का इजहार किया, लेकिन लड़की ने उसके प्रपोजल को यह कहते हुए रिजेक्ट कर दिया कि वह दोनों सिर्फ अच्छे दोस्त हैं. वह उससे प्यार नहीं करती है. लड़की द्वारा प्रपोजल ठुकराए जाने से छात्र सदमे में आ गया. छात्र ने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

हाउसिंग सोसाइटी में रहता था छात्र

वहीं मामले को लेकर पुलिस ने बताया कि 10वीं कक्षा का छात्र अपने माता-पिता और बहन के साथ एक हाउसिंग सोसाइटी में रहता था. यह घटना रविवार रात करीब 9.44 बजे हुई. पुलिस को मौके पर छात्र की डायरी, एक कोल्ड ड्रिंक, सोडा की दो बोतलें और उसकी चप्पलें मिलीं. पुलिस सूत्रों ने बताया कि छात्र ने वॉट्सऐप पर अपनी एक दोस्त को प्यार का इजहार किया था, लेकिन लड़की ने उसके प्यार को ठुकरा दिया. इसी वजह से उसने आत्महत्या कर ली.

छात्र के पास से मिली एक डायरी

पुलिस ने बताया कि छात्र के शव के पास एक डायरी मिली, जिसमें उसने अंग्रेजी में कुछ नोट लिखे थे. आत्महत्या करने से पहले उसने अपने परिवार और दोस्तों के वॉट्सऐप ग्रुप में एक मैसेज भेजा था. साथ ही एक दोस्त को फोन भी किया था, लेकिन जब तक उसका दोस्त फोन उठाता छात्र ने कॉल कट कर दी. पुलिस ने बताया कि छात्र के शव को कब्जे में लेकर कूपर अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. वहीं छात्र के पिता ने किसी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं दी है. ऐसे में पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है.

स्कूलों को अपने बच्चों की जांच करनी चाहिए

दशकों से कई कॉलेजों में आत्महत्या की रोकथाम के लिए सक्रिय रूप से काम करने वाले मनोचिकित्सक डॉ. हरीश शेट्टी ने कहा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के लिए सभी स्कूलों को अपने बच्चों की जांच करनी चाहिए. सभी स्कूलों में एक मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को शामिल करने की आवश्यकता है. बच्चों के लिए नियमित रूप से मानसिक स्वास्थ्य शिविरों की आवश्यकता होती है, जो उनके कल्याण में सुधार के लिए प्रारंभिक पहचान, जागरूकता, शिक्षा और मनोरंजक गतिविधियों के लिए होंगे. स्वच्छ भारत अभियान की तरह ही आत्महत्या के लिए एक जन आंदोलन होना चाहिए.

स्कूलों में नियमित साइबर जागरूकता की आवश्यकता

वहीं साइबर मनोवैज्ञानिक निराली भाटिया ने कहा कि साइबर शिष्टाचार पर स्कूलों में नियमित साइबर जागरूकता की आवश्यकता है. उदाहरण के लिए, चैट में, हम नहीं जानते कि दूसरे व्यक्ति का इरादा क्या है या वह क्या महसूस कर रहा है, जब वह हमसे बात कर रहा है. निराली भाटिया ने कहा कि अधिक से अधिक युवा व्यक्तिगत बैठकों में चैट करना पसंद करते हैं. इसलिए हमें उन्हें संदेशों को बेहतर ढंग से संवाद करने और समझने के लिए साइबर शिष्टाचार पर शिक्षित करना चाहिए.

सोशल मीडिया के बारे में जागरूक हों माता-पिता

साइबर मनोवैज्ञानिक निराली भाटिया ने कहा कि साथ ही माता-पिता को सोशल मीडिया के बारे में पता होना चाहिए. बच्चों पर पढ़ाई का बहुत अधिक दबाव है और अब सोशल मीडिया के आगमन के साथ अच्छा दिखने, लोकप्रिय होने और सोशल मीडिया पर अपने साथियों द्वारा स्वीकार किए जाने का भी दबाव है. हमें ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों दुनिया में आज के युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने की जरूरत है. माता-पिता को सतर्क और शामिल होने की जरूरत है, लेकिन उनके जीवन में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.