लंपी स्किन डिजीज: दो महीने बाद भी पूरी तरह काबू नहीं हुआ रोग, गायों की मौत का जिम्मेदार कौन?

Lumpy Skin Disease

राजस्थान में तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक लंपी स्किन डिजीज पर काबू नहीं पाया जा सका है. जबकि इसे फैले दो महीने बीत चुके हैं. सरकार दावे पर दावे कर रही है, लेकिन हालात सुधर नहीं रहे हैं. दूसरी तरफ देश में करीब 75 हजार गौवंशीय पशुओं की मौत के बावजूद अब तक केंद्र सरकार ने इसे महामारी नहीं घोषित किया है. जबकि राजस्थान सरकार इसके लिए बार-बार केंद्र को पत्र लिख रही है. न सिर्फ राजस्थान बल्कि गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, पंजाब, हरियाणा और यूपी में पशु इस बीमारी की चपेट में हैं.

उधर, राजस्थान के पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने दावा किया कि राज्य में गौवंशीय पशुओं में फैल रही लंपी स्किन डिजीज को लेकर पशुपालन विभाग द्वारा सजगता एवं संवेदनशीलता के साथ सभी आवश्यक कदम उठाएं जा रहे हैं. कॉन्फेड के माध्यम से जिलों को आवश्यक दवाओं की आपूर्ति जल्द से जल्द करने के साथ तेजी से टीकाकरण किया जा रहा है. प्रदेश में अब तक 13 लाख 63 हजार पशुओं का वैक्सीनेशन किया जा चुका है. प्रतापगढ़ एवं झालावाड़ जिलों में 1 लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण कर दिया गया है.

सूबे में 7.73 लाख पशुओं के ठीक होने का दावा

कटारिया ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज की रोकथाम के लिए राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन एवं पशुपालन विभाग संयुक्त रूप से गौवंशीय पशुओं का लंपी से बचाव के लिए वैक्सीनेशन कर रहे हैं. दावा है कि प्रदेश में लंपी से प्रभावित 13.63 लाख पशुओं में से अब तक 12.49 लाख का उपचार किया जा चुका है, जिसमें 7.73 लाख पशु स्वस्थ हो चुके हैं. दूसरी ओर, मृत पशुओं का निस्तारण वैज्ञानिक विधि से किए जाने में ग्राम पंचायत, पंचायत समितियों एवं स्थानीय निकाय से पूरा सहयोग मिल रहा है.

कहां कितना वैक्सीनेशन

पशुपालन मंत्री ने बताया कि अब तक अजमेर जिले में 55883, कुचामन सिटी में 37697, भरतपुर में 61222, चित्तौड़गढ़ में 86292, अलवर में 80590, जयपुर में 34763, झुंझुनू में 3796, बांसवाड़ा में 88000, राजसमंद में 9328, कोटा में 75233, बूंदी में 75315, बांरा में 98188, झालावाड़ में 102993, प्रतापगढ़ में 100399 और उदयपुर में 70576 पशुओं का टीकाकरण हुआ है.

पशुपालकों को मिलेगी दवाओं की किट

विभाग के शासन सचिव पीसी किशन ने कहा कि संबंधित विभागों के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाओं एवं गैर सरकारी संगठनों से मिल रहे सहयोग से जल्द ही लंपी रोग पर काबू पाया जा सकेगा. लंपी स्किन डिजीज के उपचार एवं फॉलोअप के लिए दवाओं की एक किट बनाकर पशुपालकों को वितरित करने के आदेश जारी किए गए हैं. हाल ही में पशु चिकित्सकों एवं पशुधन सहायकों की नियुक्तियों से टीकाकरण अभियान को गति मिलेगी.