रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया भर में बढ़ाई भारतीय गेहूं की चमक, किस देश में कितना हुआ एक्सपोर्ट?

Wheat Export

यूक्रेन और रूस के बीच चल रही जंग के बीच भारत ने दुनिया के बड़े गेहूं बाजार पर कब्जा कर लिया है. गेहूं एक्सपोर्ट (Wheat Export) से होने वाली कमाई एक साल में ही करीब चार गुना हो गई है. दरअसल, यूक्रेन और रूस दोनों वैश्विक स्तर पर गेहूं के व्यापार में 25 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी के साथ गेहूं के प्रमुख निर्यातक भी हैं. लेकिन इस बार इन दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध की वजह से भारतीय गेहूं (Indian Wheat) की मांग बढ़ गई. कई नए देश भारतीय गेहूं के ग्राहक बन गए हैं. इसलिए 2022-23 में गेहूं निर्यात का नया रिकॉर्ड बनने की संभावना है. खास बात यह है कि गेहूं निर्यात करने के लिए कोई बंधन नहीं है. विदेश व्यापार नीति के अनुसार गेहूं का निर्यात ‘मुक्त’ श्रेणी के तहत आता है. इसलिए इसके निर्यात के लिए सरकार से किसी लाइसेंस (License) या प्राधिकारपत्र की आवश्यकता नहीं है.

कारोबारी इस छूट को गेहूं का निर्यात बढ़ाने का अवसर मान रहे हैं. बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं. ताकि देश में विदेशी मुद्रा आए. निर्यात का फायदा किसानों को भी मिले. निर्यात बढ़ने की संभावना की वजह से ही इस बार खुले बाजार में गेहूं का एमएसपी (MSP-Minimum support price) से अधिक दाम मिल रहा है. वर्तमान में गेहूं का एमएसपी 2,015 रुपये प्रति क्विंटल है. इस साल गेहूं एक्सपोर्ट 100 लाख टन के आसपास होने का अनुमान लगाया गया है.

नए बाजार तलाश रही सरकार

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बताया है किभारतीय दूतावासों की भागीदारी के माध्यम से केंद्र सरकार ने गेहूं निर्यात के लिए इंडोनेशिया, यमन गणराज्य, अफगानिस्तान, कतर, ओमान, भूटान और फिलीपींस में नए संभावित बाजारों का पता लगाया है. गुजरात राज्य से गेहूं जीआई किस्म (भालिया) को बढ़ावा देने के लिए केन्या और श्रीलंका को एक परीक्षण शिपमेंट भेजा गया था. हाल ही में मिस्र ने भी भारत से गेहूं मांगा है.

गेहूं एक्सपोर्ट ने कितनी मुद्रा मिली

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार 2020-21 में 568 मिलियन डॉलर का गेहूं एक्सपोर्ट हुआ था, वहीं यह 2021-22 में चार गुना बढ़कर 2119 मिलियन डॉलर हो गया है. एक्सपोर्ट में इतने उछाल की उम्मीद किसी को नहीं थी.

साल 2020-21 में जहां 21.55 लाख टन गेहूं का निर्यात किया गया था वहीं 2021-22 में यह आंकड़ा 21 मार्च तक ही 70 लाख टन के पार हो गया था. वर्ष 2019-20 में महज 217354 टन गेहूं का एक्सपोर्ट हुआ था.

भारत से सबसे ज्यादा गेहूं खरीदने वाले देश

देश टन
बांग्लादेश 39,37,438
श्रीलंका 5,80,819
यूएई 4,69,851
इंडोनेशिया 3,68,274
फिलिपींस 3,57,538
यमन गणराज्य 3,52,910
नेपाल 3,05,360
कोरिया गणराज्य 2,12,155
कतर 1,04,759
ओमान 92,411
Source: DGCIS, 1 अप्रैल 2021 से 21 मार्च 2022 तक

एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए क्या कर रही सरकार

गेहूं निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ उत्पादन और निर्यात में आने वाली चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एपीडा (APEDA) ने एक कार्यदल का गठन किया है. गेहूं निर्यात की आपूर्ति श्रृंखला में मुद्दों के समाधान के लिए व्यापार जगत के साथ नियमित बातचीत हो रही है. निर्यात किए जाने वाले उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एपीडा ने पूरे भारत में 213 प्रयोगशालाओं को मान्यता प्रदान की है. निर्यात परीक्षण और निगरानी योजनाओं के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं को सहायता प्रदान की गई.

Similar Posts