रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते बढ़ा खाद्य संकट, UNSC में बोला भारत- हमने अफगानिस्तान-म्यांमार को मदद की, खाद्य सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध

Sneha Dubey

रूस और यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine War) की वजह से दुनियाभर में खाने का संकट बढ़ रहा है. युद्ध के चलते उभरे संघर्ष और भुखमरी को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) की एरिया फॉर्मूला मीटिंग हुई है. जिसमें भारतीय मिशन की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे ने भारत का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि यूक्रेन से उत्पन्न हो रहे खाद्य सुरक्षा (Food Crisis) चुनौतियों से निपटने के लिए हमें रचनात्मक रूप से प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता है. जिन चीजों की कमी हो रही है, उन्हें उन रुकावटों से परे जाकर दूर किया जा सकता है, जो हमें वर्तमान में बांध रही हैं.

उन्होंने कहा, भारत ने अफगानिस्तान की बिगड़ती मानवीय स्थिति को देखते हुए उसे 50,000 मीट्रिक टन गेहूं देने का फैसला किया था. ठीक इसी तरह, भारत ने म्यांमार को भी मानवीय तौर पर समर्थन देना जारी रखा है. जिसके तहत उसे 10,000 टन चावल और गेहूं दिए गए हैं. स्नेहा दूबे ने कहा, भारत वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. साल 2023 को बाजरे का अंतरराष्ट्रीय वर्ष घोषित करने के लिए यूएनजीए के प्रस्तावल की अगुवाई का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करना की है.

12 साल में तीसरा बड़ा खाद्य संकट

यूएनएससी की ये बैठक ऐसे वक्त पर हो रही है, जब दुनिया 12 साल में तीसरी बार खाद्य संकट का सामना कर रही है. विश्व खाद्य कार्यक्रम के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में करीब 69 करोड़ लोग रात के भोजन के बगैर जीने को मजबूर हैं. रूस और यूक्रेन युद्ध ने इस संकट को और ज्यादा बढ़ा दिया है. यूक्रेन और रूस दो ऐसे देश हैं, जिन्हें गेहूं के प्रमुख निर्यातक देशों में गिना जाता है. विश्व के गेहूं के व्यापार में जहां रूस की हिस्सेदारी 18 फीसदी है, तो वहीं यूक्रेन 10 फीसदी की आपूर्ति करता है. मिस्र सहित 25 के करीब देशों को उनकी जरूरत के आधे से अधिक गेहूं इन देशों से ही मिलते हैं.

गेहूं की सप्लाई में आ रही दिक्कत

अब चूंकी इन दोनों देशों के बीच युद्ध चल रहा है, इसलिए गेहूं की सप्लाई में भी दिक्कतें आ रही हैं. जिसके कारण इसकी कीमतें पहले ही 42 फीसदी तक अधिक हो गई है. ये बढ़ोतरी 50 फीसदी तक जा सकती है. गेहूं का आयात करने वाले ज्यादातर देश विकासशील हैं. इसकी कीमत बढ़ने से गरीबों पर अधिक भार पड़ रहा है. रूस के खिलाफ भी दुनियाभर के देशों ने प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिसके कारण तेल, गैस और कोयले का व्यापार बाधिक पड़ा हुआ है. ये देश जीवाश्म ईंधन के मुख्य निर्यातकों में गिना जाता है. इस कीमतें अधिक होने से भारत और ज्यादातर अल्प विकसित देशों में खाने का सामान भी महंगा होगा.

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