रूस के युद्धपोत मोस्कवा को यूक्रेन ने मिसाइल हमले में कर दिया था तबाह, अब भारतीय नौसेना कर रही है अध्ययन

Cruiser Moskva

काला सागर में तैनात रूसी लड़ाकू बेड़े में शामिल युद्धपोत मोस्कवा मिसाइल हमले के बाद डूब गया था. अब कहा जा रहा है कि भारतीय नौसेना के ऑपरेशनल प्लानर्स मोस्कवा के डूबने का अध्ययन कर रहे हैं. इसका उद्देश्य चीनी डीएफ-21 (Chinese DF-21) जैसे एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलों (Anti-Ship Ballistic Missiles) से भारतीय युद्धपोतों की रक्षा करने के तरीके पर ध्यान केंद्रित करना है. यूक्रेन (Ukrain) के साथ रूस के चल रहे युद्ध के बीच डूबे मोस्कवा के चलते गंभीर सवाल उभर कर सामने आए हैं. एंटी-शिप वेपन चीन समेत दुनिया में सभी नौसेना के लिए खतरा बन गया है. चीन की मीडिया ने DF 21 को शिप किलर और DF 26 को इंडो-पैसिफिक में गुआम में यूएस बेस का किलर करार दिया है.

यह कहा जा रहा है कि रूसी मोस्कोवा का डूबना अगले हफ्ते नौसेना कमांडरों सम्मेलन में चर्चा का विषय होगा. हालांकि भारतीय नौसेना समुद्री क्षेत्र में काफी मजबूत है. वह प्रमुख युद्धपोत बराक-1 और बराक-8 सतह से हवा में मिसाइलों के साथ-साथ हवाई और क्रूज मिसाइल खतरों से निपटने के लिए एक क्लोज-इन वेपन्स सूट (CIWS) ले जाते हैं.

भारतीय नौसेना के एक पूर्व एडमिरल का कहना है कि एंटी-शिप मिसाइल युग 1960 के दशक में शुरू हुआ और उनके पूरे करियर में ध्यान इस बात पर रहा है कि जहाजों पर मिसाइल हमलों और आग से कैसे बचा जाए. एनटीआरओ द्वारा संचालित 2021 में लॉन्च किया गया बैलिस्टिक मिसाइल ट्रैकिंग जहाज आईएनएस ध्रुव, भारतीय सेना को भारत और उसके सैन्य प्लेटफार्मों की ओर मिसाइल लॉन्च का पता लगाने में मदद करेगा.

जेलेंस्की ने रूसी युद्धपोत मोस्कवा के डूबने की ओर किया था इशारा

बता दें कि यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमीर जेलेंस्की ने रूसी युद्धपोत मोस्कवा के डूबने की ओर इशारा किया था. हालांकि रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया था कि युद्धपोत एक बंदरगाह पर ले जाते समय आए तूफान में डूब गया. युद्धपोत पर आमतौर पर 500 नाविक तैनात होते हैं और इसके डूबने से पहले ही चालक दल के सभी सदस्यों को सुरक्षित उतार लिया गया था, जिसके बाद उस पर लगी आग पर भी काबू पा लिया गया था. युद्धपोत लंबी दूरी की 16 मिसाइलें ले जाने की क्षमता रखता था. जानकारों ने बताया था कि युद्धपोत के डूबने से काला सागर में रूस की सैन्य क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. इसके अलावा, यह घटना पहले से ही एक बड़ी ऐतिहासिक भूल के रूप में देखे जाने वाले यूक्रेन युद्ध में रूस की प्रतिष्ठा के लिए बड़ा झटका भी है.

Similar Posts