राष्ट्रीय जांच एजेंसी दिवस: ‘NIA ने तोड़ी आतंकवाद की कमर, रोकी टेरर फंडिंग’, गृह मंत्री अमित शाह ने बांधे तारीफों के पुल

Amit Shah

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने गुरुवार को 13वें राष्ट्रीय जांच एजेंसी दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी. गृह मंत्री ने कहा कि NIA देश की सुरक्षा में लगा हुआ है. NIA को अक्सर ही उन केस को सौंपा जाता है, जिसमें सबूतों को ढूंढना बेहद ही कठिन काम होता है. लेकिन इस एजेंसी ने अपने बेहतर काम से सभी आतंक विरोधी जांच एजेंसियों को प्रेरित किया है. उन्होंने कहा कि हमने आतंक के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति अपनाई हुई है. इस दिशा में NIA को किसी भी तरह की सहायता की जरूरत होगी, तो भारत सरकार उसे मुहैया कराने के लिए तैयार है.

अमित शाह ने कहा कि आतंकवाद को लेकर हम लोग सख्त हैं. सरकार जब भी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो मानवाधिकार संगठन आवाज उठाते हैं. लेकिन आतंकवाद से बड़ा मानवाधिकार का उल्लंघन करने वाली कोई चीज नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार ने NIA को भी दृढ़ के साथ आतंक खत्म करने की दिशा में बढ़ने को कहा है. हम चाहते हैं कि NIA सशक्त बने और मजबूत बने, साथ ही दुनियाभर में NIA की पहचान दुनियाभर में एक बेहतरीन आतंक विरोधी एजेंसी के रूप में हो. गृह मंत्री ने कहा कि NIA ने पाकिस्तान के रास्ते कश्मीर में होने वाली टेरर फंडिंग को रोका है, जिससे आतंक से लड़ने में सहायता मिली है.

क्या है राष्ट्रीय जांच एजेंसी?

NIA देश में केंद्रीय आतंकवाद विरोधी एजेंसी है. इसे 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले के बाद बनाया गया था. NIA राज्यों से इजाजत लिए बिना देशभर में आतंकी मामलों की जांच कर सकती है. एजेंसी आतंक से जुड़े मामलों, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के मामलों, परमाणु सुविधाओं पर हमले के प्रयास करने वाले अपराधों आदि की जांच करती है. जांच एजेंसी का मकसद खुद को इंटरनेशनल स्टैंडर्ड वाली एक पेशेवर जांच एजेंसी बनाना है. इसका उद्देश्य आतंकी गतिविधियों पर रोक लगाना है. NIA गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है. इसका मुख्यालय दिल्ली में है और इसकी भारत भर में आठ क्षेत्रीय कार्यालय हैं.

एजेंसी को NIA एक्ट की शेड्यूल बुक में बताए गए विभिन्न अधिनियमों के तहत जांच करने के लिए सभी शक्तियां और विशेषाधिकार दिए गए हैं. राज्य सरकार के अधिकारी NIA एक्ट के तहत निर्दिष्ट कानून की सीमा के भीतर केंद्र सरकार के मंजूरी पर NIA द्वारा जांच की मांग कर सकते हैं. केंद्र सरकार भारत में कहीं भी जांच के लिए मामलों को NIA को सौंप सकती है. इन मामलों की जांच करने वाले अधिकारी आईपीएस और आईआरएस कैडर से होते हैं.

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