राम ‘राह’: वन को चले श्री राम रघुराई… दूसरे अंक में पढ़ें अयोध्या से चित्रकूट तक की यात्रा

Ramraah04

टीवी9 डिजिटल की खास सीरीज राम ‘राह’ में हम आपको उस यात्रा पर ले जा रहे हैं, जिस यात्रा पर एक वक्त भगवान राम चले थे. भगवान राम ने पहले सीता विवाह के वक्त अयोध्या से नेपाल के जनकपुर तक की यात्रा की थी, जिसमें उनके साथ थे भाई लक्ष्मण और मुनि विश्वामित्र. इसके बाद दूसरी यात्रा भगवान राम ने 14 वर्ष के वनवास के दौरान पूरी की थी, जिसमें वे अयोध्या से लंका तक गए थे. इस यात्रा में उनके साथ थीं माता सीता और भाई लक्ष्मण. भगवान राम की इसी यात्रा पर हम आपको राम ‘राह’ सीरीज के जरिए लेकर जा रहे हैं. इस सीरीज में हम आपको 10 कहानियों के जरिए बताएंगे कि भगवान राम अपनी जीवन की महत्वपूर्ण यात्राओं (Ram Van Gaman Tour) में कहां-कहां गए थे और आज वो जगह कहां हैं.

राम राह की यात्रा में आपको जानने को मिलेगा कि जहां जहां रघुवर के पांव पड़े थे, वो जगह आज कहां है और उस जगह को लेकर क्या मान्यताएं हैं. साथ ही आपको इस यात्रा में पता चलेगा कि त्रेतायुग यानी रामायण काल में जब भगवान राम वनवास पर गए तो वो भारत के किन-किन हिस्सों से गुजरे थे और रामायण से उन जगह के क्या प्रसंग जुड़े हुए हैं.

पिछली सीरीज में क्या बताया?

पिछले पार्ट में हमने अयोध्या से जनकपुर (नेपाल) के रास्ते के बारे में बताया था, जिसे भगवान राम ने अपने विवाह के दौरान तय किया था. इसमें बताया था कि जब भगवान राम, सीता विवाह के समय मुनि विश्वामित्र के साथ अयोध्या से जनकपुर गए थे तो इस रास्ते में उनके कहां-कहां पड़ाव थे. वो किस रूट से होते हुए जनकपुर (जो आप नेपाल में है) गए थे. इसके साथ ही हमने बताया था कि शादी के बाद भगवान राम और सीता जी वापस लौटे थे तो किस तरह अयोध्या पहुंचे थे. अयोध्या और जनकपुर के बीच दूरी 500 किलोमीटर है, जहां भगवान राम, विश्वामित्र के साथ सीता विवाह के लिए जनकपुर गए थे.

राम ‘राह’ के अंक-2 में क्या है खास?

राम ‘राह’ सीरीज के दूसरे अंक में आज हम शुरू करेंगे, भगवान राम के वनवास की कहानी. इस अंक में आपको बताएंगे अयोध्या से लेकर चित्रकूट तक भगवान राम की वन यात्रा के बारे में. इस अंक में आपको जानने को मिलेगा कि अयोध्या से लेकर चित्रकूट तक भगवान राम किन-किन जगहों पर रुके थे और उत्तर प्रदेश के किन-किन राज्यों से होकर यहां तक पहुंचे थे. साथ ही रामचरितमानस की उन चौपाइयों के बारे में भी बताएंगे, जहां इन जगहों का वर्णन है. इसमें आपको पता चलेगा कि भगवान राम जिस रास्ते से गए थे, आज उन जगह पर क्या है और जहां भी कोई स्थान बना है, वहां की मान्यता क्या है और वहां के रामायण से जुड़े प्रसंग क्या है…

Ram Path graphic

अयोध्या से चित्रकूट तक का भगवान राम का सफर

दशरथ जी का महल (अयोध्या)- 48 सालों से लगातार भगवान राम के तीर्थों पर शोध कर रहे डॉ राम अवतार द्वारा लिखी गई किताब वनवासी राम और लोक संस्कृति और उनकी वेबसाइट के अनुसार, भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या से वनवास की यात्रा शुरू हुई थी. आज इस जगह पर एक मंदिर है और दशरथ जी का महल है. ये ही वो जगह है, जहां भगवान राम का बचपन बीता था. अयोध्या की कई जगहों में भगवान राम से जुड़े प्रसंग हैं और कहा जाता है कि जब अयोध्या से भगवान राम निकले तो वे वेदी कुंड, सीता कुंड, जनौरा आदि स्थलों से होते हुए आगे बढ़े. वनवास की इस यात्रा में भगवान राम के साथ माता सीता और भाई लक्ष्मण भी थे. इसके अलावा कुछ दूर तक अयोध्या के निवासी भी उनके साथ चले थे. (वा.रा. 2/1 से 44 तक सभी पूरे अध्याय, मानस 1/346 दोहा से 2/84 दोहे तक)

तमसा तट (फैजाबाद)- यह स्थान अयोध्या से कुछ ही दूरी पर है और तमसा नदी के तट पर है. मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनवास में जाते वक्त पहली रात यहां ही विश्राम किया था. अभी इस जगह को मंडाह भी कहा जाता है और ये स्थान अयोध्या से करीब 20 किलोमीटर है. (वा.रा. 2/46/1से 17 तक तथा 28, मानस 2/84 दोहा से 2/84/1,2,3 तथा 2/85 दोहा)

चकिया (फैजाबाद)- अब बात करते हैं पुरवा चकिया की, जो तमसा नदी के तट से कुछ दूर गौराघाट के पास है. कहा जाता है कि यह वो जगह है, जिससे आगे का सफर भगवान राम ने अकेले ही तय किया था. साथ ही उनके पीछे आ रहे अयोध्या के लोगों को यहां से वापस भेज दिया था. यहां अभी भगवान राम का मंदिर है. (वा.रा. 2/46/18/ से 34, मानस 2/84/4 से 2/85 दोहा।)

टाहडीह (फैजाबाद)- चकिया के पास एक जगह है, जिसका नाम है टाडडीह. कहा जाता है कि इस जगह का नाम ‘डाह’ की वजह से पड़ा है. डाह का मतलब होता है एक साथ रोना. इसलिए कहा जाता है कि भगवान राम के चले जाने के बाद यहां काफी लोग एक साथ रोने लगे थे, जिसके बाद इसका नाम टाहडीह पड़ा. यहां अभी राम परिवार का मंदिर है. रामचरितमानस में भी इन घटनाओं का जिक्र है, जो निम्नलिखित है… (वा.रा. 2/47/1 से 13, मानस 2/85/1 से 2/86 दोहा।)

Ramraah03

सूर्य कुंड (फैजाबाद)- टाहडीह से आगे चलने पर 2 किलोमीटर दूरी पर एक कुंड है, जिसे सूर्यकुंड कहा जाता है. कहा जाता है कि जब भगवान राम यहां से आगे जा रहे थे, जब उन्होंने यहां स्नान किया था और सूर्य की पूजा की थी. माना जाता है कि इस वजह से इसका नाम रखा गया है. (वा.रा. 2/46/21 से 34, मानस 2/84/4 परिस्थिति जन्य।)

सीता कुंड (सुल्तानपुर)- यहां गोमती नदी के किनारे महर्षि वालमीकि का आश्रम है. मान्यता है कि इस जगह पर भगवान राम ने गोमती नदी पार की थी.

कलेवातारा (प्रतापगढ़)- माना जाता है कि इस रास्ते से होते हुए भगवान राम वनवास में आगे बढ़े थे. कलेवातारा नदी का वर्तमान नाम बकुलाही है.

श्रृंगवेरपुर (इलाहाबाद)- इस जगह का नाम सिंगरोर है और इलाहाबाद से करीब 20 कि.मी. दूर यह गंगाजी के किनारे है. कहा जाता है कि यहां केवट प्रसंग हुआ था. इसके आसपास भी कई स्थान है, जहां से रामायण के कई प्रसंग जोड़े जाते हैं. (वा.रा. 2/50/28 से 2/52/92 तक, मानस 2/86/1 से 2/101 दोहे तक)

सिंगरोर (इलाहाबाद)- सिंगरोर में एक रामसैया नाम का स्थान भी है, जिसके लिए कहा जाता है कि यहां भगवान राम ने रात में विश्राम किया था. निशाद राज गुह ने यहां घास की शैया तैयार की थी. इसके अलावा इसके पास वीरासन नाम की एक जगह बताई जाती है और कहा जाता है कि रात को लक्ष्मण जी ने वीरासन पर बैठ कर रात को पहरा दिया था. वहीं इसके पास एक सीताकुंड है, जहां सुमंत को वापस अयोध्या भेजा था.

कुरई (इलाहाबाद)- मान्यता है कि श्रृंगवेरपुर में गंगा नदी पार करते समय सीता गंगा पार से एक मुट्ठी रेत लाई थीं. उस रेत की कूरी कर उन्होंने भगवान शिव की पूजा की थीं. अब इस जगह पर भगवान शिव का मंदिर है. इसके बाद राम जोईटा में भगवान राम ने रात का विश्राम किया था. रामचरितमानस में भी इन घटनाओं का जिक्र है, जो निम्नलिखित है… (वा.रा. 2/52/92, 93, मानस 2/101/1 से 2/103/1 2/104 दोहा)

Ramraah02

भरद्वाज आश्रम (इलाहाबाद)- प्रयागराज में एक टीले पर ये आश्रम बना हुआ है और इस जगह के लिए कहा जाता है कि भगवान राम और भरत का मिलन इसी स्थान पर हुआ था और इस जगह का नाम है भरद्वाज आश्रम. इसके अलावा अक्षयवट में पूजा और परिक्रमा की थी और यमुनाघाट पर रात का विश्राम किया था. इसके बाद भगवान राम शिव मंदिर ऋषियन से होते हुए आगे बढ़े थे. (वा.रा. 2/54/5 से 43 2/55/1 से 11, मानस 2/105/4 से 2/108 दोहा)

सीता पहाड़ी (चित्रकूट)- इस जगह के आसपास के इलाकों में सीती रसोई समेत कई प्रसंग बताए जाते हैं. कहा जाता है कि इसके पास स्थिति सीता रसोई में माता सीता ने चावल पसाए थे, जिसे चिकनी शिला कहा जाता है और इसके पास एक सीता पहाड़ी है, जिसके लिए कहा जाता है कि यहां राम ने आराम किया था. (वा.रा. 2/55/23 से 33, मानस 2/109 दोहा से 2/111/1, 2/220/1, 2)

बता दें कि इसके अलावा चित्रकूट में कई ऐसे स्थान हैं, जहां राम जी के आने की कहानियां विद्यमान हैं. चित्रकूट और उसके आस पास का इलाके (कुछ मध्यप्रदेश में भी है) में राम और सीता ने काफी वक्त गुजारा था और यहां कई तरह की कहानियां कही जाती हैं.

Ramraah01

– दशरथ कुंड के लिए कहा जाता है कि ‘लोरी’ के पास ही भगवान राम को दशरथ जी के स्वर्गवास का आभास हो गया था. इसके बाद उन्होंने यहां बिना दर्शन किए दशरथ जी का श्राद्ध किया था.

– वाल्मीकि आश्रम लालापुर में पहाड़ की चोटी पर महर्षि वाल्मीकि का एक प्राचीन आश्रम है. यहां श्रीराम की मुनि से भेंट हुई थी.

– कामद गिरि में लंबे समय तक भगवान राम रहे थे.

– चित्रकूट के कोटितीर्थ में एक कोटि मुनि से मिलने भगवान राम आए थे.

– चित्रकूट के देवांगना में श्रीराम के दर्शन के लिए देव कन्याएं यहां एकत्रित हुई थीं.

– रामघाट चित्रकूट का बहुत ही प्रसिद्ध स्थल है. कहा जाता है कि ये वो स्थान है, जहां वनवास काल में श्री सीता राम जी रहते थे.साथ ही कहा जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास जी को यहां श्री राम लक्ष्मण जी के दर्शन हुए थे. (वा.रा. 2/116/1 से 26, मानस 2/134 दोहा, 2/307/2, 2/311/3, 2/312 दोहा)

– चित्रकूट में एक जगह है भरत कूप, जहां भरत श्रीराम के राज्याभिषेक के लिए सभी तीर्थों का जल लाए थे.

– गुप्त गोदावरी के लिए कहा जाता है कि मां सीता यहां स्नान करती थीं. यहीं मयंक नामक चोर ने उनके वस्त्राभूषण चुराए थे और लक्ष्मणजी ने उसे सजा दी थी.

– अमरावती आश्रम के लिए राम विश्राम की बात कही जाती है. (वा.रा. 3/1, पूरे अध्याय, मानस 3/6/2)

– पुष्करणी टिकरिया के लिए कहा जाता है कि टिकरिया और मारकुंडी के बीच एक विशाल पुष्करणी में राम ने अपने हथियार और कपड़े धोये थे.

– मारकुंडी मारकण्डेय के लिए कहा जाता है कि वहां भगवान राम ने शिव की पूजा की थी.

अगले अंक में क्या होगा?

इस पार्ट में आपको चित्रकूट से आगे की यात्रा पर ले जाएंगे. इस पार्ट में चित्रकूट से लेकर मध्यप्रदेश के उमरिया तक के रास्ते के बारे में बताएंगे, जहां भगवान राम ने दशरथ जी का श्राद्ध किया था. इसके अलावा आपको इस अंक में जानने को मिलेगा कि चित्रकूट से उमरिया तक भगवान राम किन-किन जगहों पर रुके थे और उत्तर प्रदेश के किन-किन राज्यों से होकर यहां तक पहुंचे थे. वहीं, आपको ये भी बताएंगे कि भगवान राम जिस रूट से गए थे, आज उन जगह पर क्या है और जहां भी कोई स्थान बना है, वहां की मान्यता क्या है और वहां के रामायण से जुड़े प्रसंग क्या है…

(आर्टिकल में दी गई जानकारी डॉ राम अवतार के सहयोग से प्राप्त की गई है. डॉ राम अवतार ने भारत सरकार के मानव संसाधन विकास की ओर से वनवासी राम और लोक संस्कृति पर उनका प्रभाव विषय पर शोध योजना की स्वीकृति मिलने के बाद रिसर्च की है. साथ ही रामवन गमन की यात्रा का दौरा किया और भगवान राम से जुड़े स्थानों का दौरा किया है. साथ ही अपनी किताब में इनकी जानकारी दी है और वेबसाइट पर भी ये जानकारी है. ऐसे में यह सीरीज उनके सहयोग के साथ बनाई गई है.)

Similar Posts