योगी सरकार दे सकती है बिजली उपभोक्ताओं को तोहफा, इस साल बिजली की दरें बढ़ने के आसार कम

CM Yogi Adityanath instructed to constitute a board for the welfare of elderly saints and priests

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) सरकार इस साल बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दे सकती है. माना जा रहा है कि यूपी में इस बार बिजली (Electricity) की कीमत ज्यादा नहीं बढ़ेंगी. हालांकि पहले इस बात का अनुमान लगाया जा रहा था कि राज्य में बिजली की दरों में इजाफा होगा. क्योंकि बिजली कंपनियों का कहना था कि उन्हें घाटा हो रहा है. लेकिन अब बिजली कंपनियों ने अपने प्रस्ताव में बिजली की दरों (Electricity Rates) को बढ़ाने का जिक्र नहीं किया है.

असल में चालू वित्त वर्ष के लिए बिजली की दर तय करने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है और बिजली नियामक आयोग ने गुरुवार को टैरिफ प्रस्ताव दिए बिना बिजली कंपनियों द्वारा उनके एआरआर प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब कंपनियों को तीन दिन में इसका विज्ञापन प्रकाशित करना होगा और इस पर सुझाव और आपत्तियां सुनने के बाद आयोग नियमानुसार अधिकतम 120 दिनों में दरें तय करेगा. इस बार कंपनियों ने बिजली दरों से जुड़ा प्रस्ताव नहीं दिया है, इसलिए इस बात की प्रबल संभावना है कि फिलहाल बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी.

बिजली कंपनियों ने 67 हजार करोड़ का घाटा करने का दिया था प्रस्ताव

बिजली कंपनियों ने 8 मार्च को आयोग के पास 85,500 करोड़ रुपये का एआरआर दाखिल किया था और इसके तहत करीब 17 फीसदी घाटा होने का अनुमान लगाते हुए कंपनियों ने मौजूदा बिजली दरों से करीब 6700 करोड़ रुपये के राजस्व अंतर बताया था. जिसके बाद आयोग के कहने पर कंपनियों ने पहले भी एआरआर की कमियों को दूर किया है, लेकिन इस गैप की भरपाई के लिए बिजली दर का प्रस्ताव नहीं रखा. जिसके बाद ये तय हो गया है कि इस बार बिजली की दरों में इजाफा नहीं होगा. वहीं उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री से मांग की थी कि राज्य के बिजली उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर 20,596 करोड़ रुपये बकाया है और इसके बदले सरकार बिजली की मौजूदा दरें कम करे.

बिजली कंपनियों ने नहीं दिया बिजली दरों को बढ़ाने का प्रस्ताव

जानकारी के मुताबिक गुरुवार को आयोग ने कंपनियों के साथ-साथ ट्रांसमिशन और नोएडा पावर कंपनी के एआरआर प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया है. कंपनियों ने एआरआर स्वीकार करने से पहले बिजली दर को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं दिया है, इसलिए अब कंपनियां कानूनन रेट बढ़ाने की बात नहीं कर पाएंगी. वहीं आयोग भी अपनी तरफ से बिजली की दरों में इजाफा नहीं करेगी.

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