यूक्रेन संकट पर भारत को लेक्चर नहीं देगा ब्रिटेन, अपनी यात्रा पर दिल्ली का रुख जानेंगे ब्रिटिश PM बोरिस जॉनसन

Boris Johnson

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) गुरुवार यानी आज से दो दिवसीय भारत दौरे पर आने वाले हैं. ऐसे में यूक्रेन संकट (Ukraine Crisis) भी उनके इस दौरे के दौरान चर्चा का विषय हो सकता है. हालांकि, यात्रा के दौरान भारत-प्रशांत को मुक्त रखने और द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. ब्रिटिश पीएम की यात्रा की शुरुआत गुजरात से होगी. यहां पर वह गुजरात बायोटेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी और एक फैक्ट्री का दौरा करेंगे. इसके अलावा, वह व्यापार जगत के दिग्गजों के साथ भी मुलाकात करने वाले हैं. इसके बाद जॉनसन नई दिल्ली जाएंगे. यहां पर वह अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे.

यूक्रेन पर रूसी हमले और विश्व व्यवस्था पर उसके प्रभाव का भारतीय समकक्षों और वार्ताकारों के साथ जॉनसन की बातचीत में शामिल होना तय माना जा रहा है. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि ब्रिटिश पीएम अपनी विदेश मंत्री लिज ट्रूस के नक्शेकदम पर भी चलेंगे. दरअसल, पिछले महीने भारत की यात्रा पर ब्रिटिश विदेश मंत्री लिज ट्रूस ने इस बात पर ध्यान दिया था कि ब्रिटेन लेक्चर देने या किस देशों को क्या करना है, ये बताने का काम नहीं करने वाला है. जॉनसन यूक्रेन पर ब्रिटेन की स्थिति बताएंगे और साथ ही भारत का पक्ष भी जानेंगे, ताकि दोनों ही मुल्क एक दूसरे की स्थिति को बेहतर ढंग से समझ पाएं.

यूक्रेन को हथियार की सप्लाई कर रहा ब्रिटेन

मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा, ‘यूक्रेन संकट के दीर्घकालिक नतीजों पर चर्चा की जाएगी. ब्रिटेन ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और वो ये है कि लंदन यूक्रेन की स्वतंत्रता का समर्थन करता है.’ उन्होंने आगे कहा कि यूक्रेन संकट में रूस का व्यवहार भविष्य की कार्रवाई तय करेगा. युद्ध की शुरुआत होने के बाद से ही ब्रिटेन ने बड़ी मात्रा में हथियार और जरूरी सामान को यूक्रेन पहुंचाया है. हाल ही में पीएम जॉनसन कीव गए थे, जहां उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमीर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) से मुलाकात की थी. इस दौरान दोनों नेताओं के कीव की सड़कों पर घूमते हुए भी देखा गया था.

भारत के रुख पर कई

भारत ने रूस के कदमों की सार्वजनिक रूप से आलोचना करना बंद कर दिया है. हालांकि, भारत ने बूचा में आम लोगों की हत्याओं की निंदा की है. साथ ही लगातार दुश्मनी को खत्म करने और बातचीत शुरू करने की गुजारिश की है. भारत ने यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से तेल आयात किया है. भारत के कदम को लेकर कई देशों ने नाराजगी जताई है. अमेरिका ने भी इशारों-इशारों में भारत के रुख पर आपत्ति जताई है. लेकिन भारत की तरफ से ये स्पष्ट कर दिया गया है कि वह स्वतंत्र विदेश नीति की पालन करता है.

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