मेहनत के बावजूद नहीं टिकता है पैसा, तो घर पर लेकर आएं महालक्ष्मी यंत्र, जानें इसके फायदे !

Mahalakshmi yantra

माता लक्ष्मी को शास्त्रों में धन की देवी कहा जाता है. मान्यता है कि जिस व्यक्ति पर माता लक्ष्मी (Mata Lakshmi) की कृपा हो जाए, उसके जीवन में भोग विलासिता की कोई कमी नहीं होती. यही वजह है कि संसार में हर कोई माता लक्ष्मी को मनाने में लगा रहता है. अगर आप भी माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो अपने घर पर महालक्ष्मी यंत्र को लेकर आएं. महालक्ष्मी यंत्र को बहुत शक्तिशाली माना गया है. कहा जाता है कि अगर इस यंत्र को शुभ मुहूर्त में सही दिशा में लगाया जाए तो मां लक्ष्मी बहुत प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं.

जानें महालक्ष्मी यंत्र के लाभ

अगर आप काफी मेहनत करते हैं लेकिन आपका भाग्य साथ नहीं देता है, आप पैसा बचाना चाहते हैं लेकिन पैसा नहीं रुक पाता है या असीमित खर्चों के कारण आर्थिक संकट समाप्त नहीं हो पाता है, तो आपको महालक्ष्मी यंत्र की नियमित पूजा करनी चाहिए. इस यंत्र को घर में स्थापित करने से सुख और समृद्धि का वास होता है. आप इसे घर, दुकान या ऑफिस कहीं भी स्थापित कर सकते हैं.

कब और कहां करना चाहिए स्थापित

महालक्ष्मी यंत्र को स्थापित करने के लिए बुधवार या शुक्रवार का दिन सबसे श्रेष्ठ माना गया है. शुक्रवार मां लक्ष्मी का दिन होता है, इसलिए इस दिन ये कार्य आप नि:संकोच होकर कर सकते हैं. वहीं आप ये काम बुधवार को भी कर सकते हैं. बुधवार के दिन का संबन्ध कुबेर से माना गया है और कुबेर को माता लक्ष्मी का भाई कहा जाता है. इसके अलावा दीपावली, धनतेरस, रवि पुष्य योग या किसी विशेष मुहूर्त में भी इस यंत्र को स्थापित किया जा सकता है. इस यंत्र को आप घर, दुकान या ऑफिस कहीं भी उस स्थान पर स्थापित करें, जहां आप धन रखते हैं. यंत्र को स्थापित करने के बाद नियमित रूप से इसका पूजन करें और धूप दिखाएं.

जानें महालक्ष्मी यंत्र का महत्व

महालक्ष्मी यंत्र का महत्व समझने के लिए आपको इससे जुड़ी कथा को जानना चाहिए. कथा के अनुसार एक बार माता लक्ष्मी धरती से वैकुंठ धाम चली गईं. तब माता लक्ष्मी को पुन: वापस लाने के लिए महर्षि वशिष्ठ ने महालक्ष्मी यंत्र को स्थापित करके विधिविधान से इस यंत्र की साधना की. इस साधना से माता लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न हुईं और पुन: धरती पर लौट आईं.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारितहैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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