महाराष्ट्र कर रहा यूं बिजली संकट से निपटने का प्लान, लेगा अपने हाथ छत्तीसगढ़ की कोयला खान, डिप्टी सीएम का ऐलान

Power demand rises before summer

महाराष्ट्र में बिजली का संकट (Power cut) लगातार गहराता जा रहा है. कई इलाकों में लोगों को घंटों लोड शेडिंग (Load Shedding) का सामना करना पड़ रहा है. बिजसी सप्लाई ठीक तरह से हो सके इसके लिए राज्य सरकार की ओर से कोशिशें शुरू हैं. इसके लिए छत्तीसगढ़ की कोयले की खान को अपने हाथ में लेने की तैयारी शुरू है. साथ ही बत्ती गुल होने की समस्या से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार अन्य देशों से कोयला आयात करने की तैयारी भी कर रही है. आज (22 अप्रैल, शुक्रवार) महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार (Maharashtra Dy CM Ajit Pawar) ने पुणे में मीडिया से संवाद साधते हुए यह जानकारी दी.

दूसरी तरफ महाराष्ट्र में बढ़ते हुए लोड शेडिंग के विरोध में बीेजेपी आक्रामक हो गई है. विधान परिषद में विपक्षी नेता प्रवीण दरेकर (Pravin Darekar BJP) ने राज्य सरकार पर हमला करते हुए आंदोलन करने की चेतावनी दी है. उन्होंने आज मीडिया से कहा कि बीजेपी लोड शेडिंग के खिलाफ राज्य व्यापी आंदोलन करने वाली है.

‘छत्तीसगढ़ की कोयला खान लेंगे अपने हाथ, अन्य देशों से करेंगे आयात’

इससे पहले अजित पवार ने राज्य के बिजली संकट को लेकर यह भी जानकारी दी कि उनकी इस संबंध में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उर्जा मंत्री नितिन राउत के साथ चर्चा हुई है. उन्होंने कहा,’बिजली सप्लाई दुरुस्त किए जाने को लेकर कोशिशें शुरू हैं. देश भर में कोयले की कमी का संकट है. महाराष्ट्र सरकार छत्तीसगढ़ की एक कोयले की खान को हाथ में लेने की प्लान कर रही है. उर्जा मंत्री नितिन राउत इसके लिए कोशिशों में लगे हुए हैं. छत्तीसगढ़ में सरकार कांग्रेस की है. इस वजह से सोनिया गांधी से इस बारे में चर्चा की जा रही है.इसके अलावा विदेश से भी कोयले के आयात पर विचार किया जा रहा है.’

जब अजित पवार से यह पूछा गया कि केंद्र की ओर से राज्य को कोयले की सप्लाई ठीक से नहीं की जा रही है क्या? क्या इसके पीछे कोई राजनीति नज़र आ रही है? इस सवाल का जवाब अजित पवार ने काफी सधे हुए शब्दों में दिया. उन्होने कहा, ‘सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश में ही कोयले की कमी का संकट है. देश के कई राज्यों में केंद्र सरकार कोयले की बढ़ती हुई मांग के मुकाबले उसकी सप्लाई नहीं कर पा रही है. गर्मी बढ़ने की वजह से मांग बढ़ी है. जितना कोयला चाहिए, उतना उपलब्ध नहीं हो रहा है, मैं आरोप करना नहीं चाहता लेकिन यह हकीकत है कि कोयले की कमी का संकट है.’

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