महाकालेश्वर मंदिर में 16 पुजारी, 22 पुरोहित और 55 ब्राह्मण कर रहे हैं महारुद्राभिषेक, 5 दिन तक गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित

Ujjain

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) में 16 पुजारी, 22 पुरोहित और 55 ब्राह्मणों की विशेष उपस्थिति में मुख्य पुजारी पं. घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में गुरुवार से पांच दिवसीय महा रुद्राभिषेक प्रारंभ हुआ है. श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित घनश्याम शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि उज्जैन कलेक्टर श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष आशीष सिंह, प्रशासक गणेश कुमार धाकड, मंदिर प्रबंध समिति सदस्य पुजारी प्रदीप गुरू, राजेंद्र शर्मा (गुरू) और पुजारी राम शर्मा ने पूजा-अर्चना कर इस अनुष्ठान की शुरुआत की. पंडित शर्मा ने बताया कि यह अनुष्ठान आगामी 27 जून तक इसी तरह जारी रहेगा. रोजाना 16 पुजारी, 22 पुरोहित और 55 ब्राह्मण इस अनुष्ठान को संपन्न कराएंगे.

पंडित श्री शर्मा ने बताया कि इस अनुष्ठान की शुरुआत में बाबा महाकाल को मंत्रोच्चार के साथ बिल्वपत्र, चंदन, इत्र, कस्तूरी पंचामृत अर्पित किया. जिसके बाद ही यह अनुष्ठान शुरू होता है. यह अनुष्ठान सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी और पुरोहितों के माध्यम से संपन्न किया जा रहा है.

श्रृंगी ऋषि की भी होती है पूजा-अर्चना

श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश पुजारी ने बताया कि अनुष्ठान में श्रृंगी ऋषि का विशेष महत्व है. श्रृंगी ऋषि के मस्तक पर जन्म से ही सींग था, जिसके कारण उनका नाम श्रृंगी ऋषि पड़ा. ऋषि के आह्वान से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं. इस कारण श्रृंगी ऋषि की प्रतिमा पर भी भगवान श्री महाकालेश्वर के साथ सतत सहस्त्र जलधारा से अभिषेक किया. ब्राह्मणों द्वारा पर्जन्य मंत्रों के संपुट के साथ अभिषेक किया जाता है. पंडित महेश पुजारी ने बताया कि इस अनुष्ठान में उन सभी वस्तुओं का उपयोग किया जाता है, जो कि भगवान शिव को पसंद है. जलधारा अर्पित करने के साथ ही अनुष्ठान करने वाले ब्राह्मण मंत्रों से आह्वान कर भगवान को प्रसन्न करते हैं और उत्तम जलवृष्टि के साथ ही संपूर्ण विश्व के कल्याण की कामना भी करते हैं.

गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित

अनुष्ठान को देखते हुए मंदिर समिति ने 23 से 27 जून तक 5 दिन महाकाल मंदिर के गर्भगृह और नंदी हाल में श्रद्धालुओं के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है, जिस पर आज पालन होता दिखाई दिया. आज नंदी हाल में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद रह, जिससे उन्हें पीछे लगे बेरिकेट्स से ही दर्शन कराए गए. ज्ञात रहे कि इस आयोजन का खर्च मंदिर समिति उठाएगी.

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