भारत में स्थितियां अनुकूल, नामीबिया-साउथ अफ्रीका से और लाए जाएंगे चीते: लॉरी मार्कर

लॉरी मार्कर ने कहा कि भारत चीते को विलुप्त घोषित किए जाने के बाद से स्थानान्तरण के बारे में सोच रहा था. 2009 में सरकार और वानिकी विभाग के विशेषज्ञों की एक टीम ने योजना बनाई गई थी.

चीता संरक्षण कोष की कार्यकारी निदेशक लॉरी मार्कर .

सात दशक पहले भारत की धरती से चीता लुप्त हो जाने के बाद एक दिन पहले नामीबिया से आठ चीतें भारत लाए गए हैं. इन चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया. चीता संरक्षण कोष की कार्यकारी निदेशक लॉरी मार्कर ने कहा है कि भारत में और अधिक चीते लाने के लिए भारत दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया के साथ काम कर रहा है. आगे आने वाले वर्षों में नामीबिया और चीते भारत को भेजेगा. शनिवार को नामीबिया से भारत में आठ चीतों के आगमन के बाद लॉरी ने कहा कि इसके विलुप्त होने के बाद से आप केवल कहीं और से ही जानवर को ला सकते हैं. उन्होंने कहा कि भारत में चीतों की आबादी बढ़ाने के लिए अभी और चीते लाने होंगे. भारत दक्षिण अफ्रीका के साथ और अधिक काम कर रहा है और नामीबिया भी आने वाले वर्षों में और अधिक चीते भेजने जा रहा है.

उन्होंने आगे कहा कि चीता को बचाने का अर्थ है दुनिया को बदलना. कल हमने 70 साल के विलुप्त होने के बाद चीता को वापस भारत लाए हैं. उनका विलुप्त होना मानव-कारण था और उनका अस्तित्व भी मनुष्यों के हाथों में है. केवल हम ही पृथ्वी को, खुद को और चीता को बचा सकते हैं. अमेरिकी विशेषज्ञ पिछले 12 वर्षों में चीता पुनर्वास परियोजना पर भारत सरकार के सलाहकार रही हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या अफ्रीकी चीते आसानी से भारतीय स्थितियों के अनुकूल हो जाएंगे. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि प्रजातियां अनुकूलनीय हैं और भारत में उनकी उपस्थिति का इतिहास है.

2009 से चल रहा था प्रयास- लॉरी

लॉरी मार्कर ने कहा कि भारत चीते को विलुप्त घोषित किए जाने के बाद से स्थानान्तरण के बारे में सोच रहा था. 2009 में सरकार और वानिकी विभाग के विशेषज्ञों की एक टीम ने योजना बनाई गई थी. अनुकूल परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होगा और हम सभी को अपने क्षेत्र में कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता होगी. निगरानी के प्रयास करने होंगे.

आसपास के लोगों को सता रहा है डर

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में चीतों के आने के उत्साह के बीच आसपास के इलाकों में रह रहे ग्रामीणों के मन में उनकी भूमि के अधिग्रहण का डर और चीतों द्वारा उन पर हमला किए जाने की आशंका समेत कई तरह की चिंताएं हैं. बहरहाल, कुछ ग्रामीणों को उम्मीद है कि चीते आने से केएनपी के प्रसिद्ध होने के बाद वहां पर्यटकों की संख्या में वृद्धि से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को शनिवार सुबह केएनपी में बनाए गए विशेष बाड़ों में छोड़ा. भारत में 1952 में चीते विलुप्त हो गए थे, इसलिए भारत में उन्हें बसाने के लिए प्रोजेक्ट चीता के तहत ये चीते यहां लाए गए हैं.

20-25 चीते रह सकते हैं कूनो नेशनल पार्क में

भारत में अफ्रीकी चीतों के नए बसेरे मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में 20 से 25 चीतों को रखने के लिए पर्याप्त जगह और उनके भोजन के लिए शिकार उपलब्ध है. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. नामीबिया से विशेष बी 747 विमान से लाए गए आठ चीतों को केएनपी में 17 सितंबर को छोड़ा गया, जिससे यह उद्यान पूरी दुनिया में सुर्खियों में आ गया है. इन आठ चीतों में से पांच मादा और तीन नर हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने 1952 में भारत में विलुप्त हुए चीतों की आबादी को फिर से बसाने की परियोजना के तहत नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को शनिवार सुबह केएनपी के विशेष बाड़ों में छोड़ा.

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