भारत के विरोध के बाद इलहान उमर के PoK दौरे को अमेरिका ने बताया गैर आधिकारिक, भारत-रूस संबंधों पर भी कही ये बड़ी बात

Derek

अमेरिका (United States) की प्रतिनिधि सभा की सदस्य इलहान उमर (Ilhan Omar) के पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के दौरे को लेकर भारत कड़ा विरोध जता रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को इसे भारतीय क्षेत्र की अखंडता का उल्लंघन बताया था. वहीं अब अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) के शीर्ष सलाहकार डेरेक चॉलेट ने कहा है कि इलहान उमर का पीओके का दौरा गैर आधिकारिक है. यह अमेरिकी सरकार की ओर से किसी भी नीति संबंधी बदलाव को नहीं दर्शाता है. इसके साथ ही उन्होंने भारत और रूस संबंधों को लेकर भी बात की है.

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में डेरेक चॉलेट ने कहा है कि भारत और रूस के रक्षा संबंध कई साल से रहे हैं. उस समय अमेरिका एक पार्टनर के रूप में मौजूद नहीं था. भारत के रूस के साथ रहे लंबे संबंधों को अमेरिका पूरी तरह समझता है. दरअसल इससे पहले अमेरिका चाहता था कि यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर भारत रूस के खिलाफ उतरे. गुरुवार को डेरेक चॉलेट ने कहा कि अमेरिका भारत का समर्थन करने के लिए मौजूद है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी में काफी संभावनाएं हैं.

‘अमेरिका भारत का पार्टनर बनने के लिए उपलब्ध नहीं था’

डेरेक ने आगे कहा, ‘हम समझते हैं कि भारत के रूस के साथ कई वर्षों से लंबे रक्षा संबंध रहे हैं और इसका एक हिस्सा इसलिए था क्योंकि अमेरिका पार्टनर बनने के लिए तब उपलब्ध नहीं था. यह दशकों पहले की बात है और आज हम बहुत अलग वास्तविकता का सामना कर रहे हैं.’ उन्होंने कहा, ‘पिछले 10 साल में अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी नाटकीय रूप से बदल गई है. हम दोनों देशों के संबंधों में कई संभावनाएं और अवसर देखते हैं.’ भारत-अमेरिकी संबंधों पर चॉलेट ने दावा किया, ‘हम स्वाभाविक सहयोगी हैं. इस साझेदारी में कई संभावनाएं हैं. हम लगातार आगे बढ़ने पर वास्तव में विश्वास करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका भारत के साथ संपर्क में है.

‘भारत के साथ रहना चाहते हैं’

कुछ रूसी हथियार कारखानों ने कथित तौर पर उत्पादन बंद कर दिया है क्योंकि उन्हें जरूरी सामान के आयात में कठिनाई हो रही है. जब डेरेक से यह पूछा गया कि भारत को आकर्षित करने के लिए अमेरिका हथियारों के निर्यात जैसे अवसर का इस्तेमाल कैसे करना चाहेगा तो उन्होंने कहा कि यह भारत को आकर्षित करने के बारे में नहीं है. हम इस साझेदारी को संगठित रूप से बढ़ते हुए देख रहे हैं. यह कुछ ऐसा है जिसे दोनों पक्षों को हासिल करना है. यह रिश्ता रातोंरात नहीं हो सकता है. इसे पूरा करने में लंबा समय लगेगा और हम अपने भारतीय सहयोगियों के समर्थन के लिए उनके साथ रहना चाहते हैं.

रूसी सैन्य उपकरणों में कमी लाने का सुझाव

इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने भारत को रूसी सैन्य उपकरणों की खरीद में कमी लाने का सुझाव दिया था. इसके लिए उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका नहीं मानता कि ऐसी खरीद भारत के हित में है. उन्होंने कहा था, ‘हमारा मानना ​​​​है कि रूसी उपकरणों में निवेश जारी रखना भारत के हित में नहीं है.’ भारतीय सेना टैंक, तोप और मिसाइल सिस्टम सहित रूस में बने कई हथियारों का इस्तेमाल करती है.

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