बिजनेस में घाटा हुआ तो शुरू कर दी खेती, इन तकनीक का इस्तेमाल कर कमा रहे लाखों रुपए

Successful Farmer Sanjeev Kumar

कृषि क्षेत्र (Agriculture Sector) में काफी संभावनाएं हैं. मेहनत और लगन से खेती-किसानी की जाए तो सफलता मिलनी तय है. बदलते दौर में अलग-अलग क्षेत्रों के लोग खेती से जुड़ रहे हैं और सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के संजीव कुमार की कहानी भी इसी तरह है. वे बीते 10 वर्षों प्राकृतिक खेती (Natural Farming) कर रहे हैं और हर साल उन्हें लाखों का मुनाफा हो रहा है. उनकी कामयाबी को देखकर अन्य किसान भी प्राकृतिक खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं और अपनी आदमनी बढ़ा रहे हैं.

सफल किसान संजीव कुमार का किसानी के क्षेत्र में आना कोई संयोग नहीं था बल्कि ऐसी परिस्थितियां बनीं कि वे कृषि को ही अपना पेशा बना लिए. दरअसल, संजीव लोहे का कारोबार करते थे, लेकिन लोहे के दाम में अचानक आई तेजी से उन्हें व्यापार में घाटा होने लगा. इसी के बाद उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी और खेती से जुड़ गए. आज संजीव कुमार प्राकृतिक खेती के साथ ही देसी बीजों का संरक्षण कर रहे हैं और बीज बैंक बनाने पर भी काम कर रहे हैं.

रासायनिक खेती से हुई थी शुरुआत

संजीव कुमार उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के गुलावटी तहसील के गांव निसुर्खा के रहने वाले हैं. यहां पर वे चौपाल फाउंडेशन नाम से एक संस्था भी चलाते हैं. संजीव बताते हैं कि जब लोहे के कारोबार में घाटा होने लगा तो मैंने खेती शुरू की, लेकिन शुरुआत में रासायनिक खाद का इस्तेमाल कर खेती करने लगा. इसमें लागत ज्यादा आती थी. इस कारण मुनाफा नहीं हो पाता था.

रासायनिक खेती में लाभ होता न देखकर उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी. संजीव कुमार ने अध्ययन करना शुरू किया और खेती-किसानी से जुड़ी गोष्ठियों में शामिल होने लगे. इसी दौरान प्राकृतिक खेती को नया मुकाम देने वाले पद्मश्री सुभाष पालेकर से उनकी मुलाकात हुई. उनसे प्रभावित होकर संजीव ने प्राकृतिक खेती करने की सोची.

खेती के साथ करते हैं गौपालन

कुछ समय के परिश्रम के बाद उन्हें खेती में लाभ होने लगा और खेती में लगने वाली लागत भी कम हो गई. लोहे के कारखाने का अनुभव का प्रयोग करते हुए संजीव ने खेती किसानी में प्रयोग होने वाले कुछ उपकरण भी बना डाले और किसानों को भी इनके प्रति जागरूक किया. संजीव बताते हैं कि उन्होंने अपने खेतों पर ही देसी पद्धति से बना हुआ कोल्हू लगाया है. वे बिना किसी मिलावट के गुड़ व इससे जुड़े अन्य उत्पाद बना रहे हैं.

प्राकृतिक खेती के साथ ही संजीव कुमार गौपालन से अतिरिक्त कमाई करते हैं. इस विधि से खेती करने में गाय के गोबर और उसके मूत्र का भी उपयोग हो जाता है. ऐसे में उनकी लागत में कमी आती है और शुद्ध उत्पाद प्राप्त होते हैं. संजीव कुमार कहते हैं कि मैंने खेती में उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया है. डीजल की कीमतों में वृद्धि के कारण सिंचाई काफी महंगी हो गई है. हालांकि उन पर इसका असर नहीं पड़ रहा है. वे सोलर पंप से अपने खेतों में सिंचाई करते हैं.

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