बढ़ती महंगाई से सरकार के लिए मुश्किल हुआ घाटा कम करना, फिस्कल डेफिसिट को पिछले साल के स्तर पर रखने की कोशिश

govt aims to keep FY23 fiscal deficit at last year level

बढ़ती महंगाई की वजह से सरकार के लिए फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) को कम करना काफी मुश्किल हो रहा है. ऐसे में सरकार की कोशिश है कि भले ही घाटा कम करना योजना के अनुसार न हो सके लेकिन इसे पिछले साल के स्तर पर बनाए रखा जाए. रॉयटर्स ने सरकारी सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार बजट (Budget) को अनुशासित रखने के लिए कदम उठा रही है. जिससे देश की क्रेडिट रेटिंग पर कोई नकारात्मक असर न पड़े. इसके साथ ही सरकार के पास इतनी गुंजाइश बचे कि वो आम लोगों पर महंगाई (Inflation) के असर को कम करने के लिए जरूरी कदम उठा सके. फिलहाल कच्चे तेल से लेकर खाने के तेल तक में तेज बढ़त देखने को मिल रही है. सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कमोडिटी पर टैक्स में कटौती जैसे कदम उठा रही है. जिससे उसकी आय में असर पड़ रहा है.

बजट का लक्ष्य पाना मुश्किल

फरवरी में ही सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य 6.4 प्रतिशत रखा था. जो कि पिछले साल के 6.7 प्रतिशत के घाटे से 30 बेस अंक कम था. सरकारी सूत्र के मुताबिक जिस तरह से सरकार आम लोगों को महंगाई के असर से बचाने के लिए खर्च कर रही है उससे ये लक्ष्य पाना संभव नहीं लग रहा है. रॉयटर्स के मुताबिक अधिकारी ने बताया कि अब सरकार कोशिश कर रही है कि घाटा पिछले साल के स्तर से ऊपर नहीं जाए. कीमतों में आई बढ़त की वजह से मई के महीने में सरकार ने पेट्रोल और डीजल की ड्यूटी में कटौती की थी, जिससे आय में 19 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ है. वहीं फर्टिलाइजर पर भी सब्सिडी दी जा रही है जिससे खर्च बढ़ा है. फर्टिलाइजर सब्सिडी में 2.5 लाख करोड़ रुपये के अनुमान से 50 से 60 हजार करोड़ रुपये की बढ़त संभव है. वहीं महंगाई दर के भी 6 प्रतिशत की सीमा से ऊपर बने रहने से भी चिंताएं बढी हैं. इसके देखते हुए सरकार फिलहाल घाटे को लेकर थोड़ा नरम रुख अपना रही है.

रेटिंग और महंगाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश

फिलहाल सरकार की चिंता है कि बढ़ते कर्ज देश की क्रेडिट रेटिंग को बिगाड़ सकते हैं. फिलहाल भारत का डेट टू जीडीपी रेश्यो 95 प्रतिशत के करीब है. वहीं भारत की रेटिंग के बराबर रेटिंग वाले कई अन्य देशों का डेट टू जीडीपी रेश्यो 60 से 70 प्रतिशत के बीच है. सूत्र के मुताबिक अगर सरकार ने राहत के लिए और कदम उठाए तो उसे कर्ज उठाना पड़ेगा जिससे दबाव बढ़ जाएगा ऐसे में सरकार के पास सीमित मौके ही मौजूद हैं.

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