बंगाल के इस जिले में भगवान विश्वकर्मा नहीं, उनके वाहन हाथी की होती है पूजा, खासा है लोकप्रिय

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के डुआर्स इलाके में शनिवार को विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर उनके वाहन हाथियों की धूमधाम और पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई.

फोटोः डुआर्स में भगवान विश्वकर्मा के वाहन हाथियों की हुई पूजा.

Image Credit source: Tv 9 Bharatvarsh

आज विश्वकर्मा पूजा है. पूरे राज्य में विश्वकर्मा पूजा की धूम मची हुई है. पूजा के लिए खास इंतजाम किये गये हैं, लेकिन डुआर्स में विश्वकर्मा पूजा कुछ अलग ढंग से मनाई गई. इन इलाकों भगवान विश्वकर्मा की नहीं, बल्कि उनके वाहन हाथी की पूजा का आयोजन बड़ी धूमधाम से किया गया. पूजा में वन कर्मियों से लेकर ग्रामीणों तक ने भाग लिया. यहां तक ​​कि क्षेत्र में आने वाले पर्यटक भी हाथी पूजा में शामिल हुए. डुआर्स के गरुमारा और जलदापाड़ा इलाकों में कुंकी हाथियों की आज पूजा की गई. गरुमारा, धूपझोरा, मेडला कैंप, टोंडु कैंप में भी पूजा का आयोजन किया गया.

शनिवार को डुआर्स में विश्वकर्मा पूजा कुछ अलग ढंग से मनाई गई. इस दिन किसी भी मूर्ति या मूर्ति की पूजा नहीं की गई है, विश्वकर्मा के वाहन हाथियों की पूजा की गई. इसे लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह था.

डुआर्स क्षेत्र में पालतू हाथियों की हुई पूजा

इस दिन गरुमारा क्षेत्र के 25 कुंकी हाथियों (पालतू हाथी) की पूजा की गई. इसके अलावा जलदापारा क्षेत्र में 39 कुंकी हाथियों की भी पूजा की गई. पूजा में वन कर्मियों के साथ वन मलिन बस्तियों के ग्रामीणों ने भी भाग लिया. उन्होंने प्रार्थना की कि दुआर में हाथी और मानव संघर्ष को कम किया जाए. उन्होंने यह भी प्रार्थना की कि हाथियों के कारण गांव में फसल नष्ट न हो. हाथियों को आज सुबह मूर्ति नदी में स्नान कराया गया. फिर उन्हें रंगीन मिट्टी से सजाया गया. प्रत्येक हाथी का अपना नाम मिट्टी में लिखा गया. फिर वहां से गांव की महिलाएं हाथियों को शंख बजाकर और उलूध्वनि देकर पूजा मंडप में ले आईं. पुरोहित ने सभी नियमों का पालन करते हुए मंत्र जाप कर पूजन किया. इस अवसर पर महिलाओं ने अंजिल दी और पूजा-अर्चना की.

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हाथियों का कराया गया अच्छा भोजन

फिर वे हाथियों के लिए अच्छा भोजन भी उपलब्ध कराया गया. वहां आए पर्यटकों ने हाथियों को केले और सेब समेत अलग-अलग फल खिलाए. अंत में पर्यटक और ग्रामीण एक साथ बैठकर भोजन किया. एक पर्यटक ने कहा, “हम बहुत खुश हैं. इस तरह हाथी पूजा काफी अलग है. यह हर जगह नहीं होती है. हमने भी सुबह से उपवास किया और पूजा में भाग लिया. पूजा में शामिल होकर बहुत अच्छा लगा.” दार्जिलिंग डिवीजन के रेंजर राजकुमार लाइक ने कहा, हर साल इस दिन हम अपने कुंकी हाथियों को तैयार करते हैं और पूजा करते हैं. हाथी को विश्वकर्मा के वाहन के रूप में पूजा जाता है. जलपाईगुड़ी संभाग के गरुमारा राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत 19 हाथियों की पूजा की जाती है. इसमें आम लोगों के अलावा पर्यटक भी हिस्सा लेते हैं.”

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