फर्टिलाइजर पर जीएसटी सिर्फ 5 परसेंट तो कीटनाशकों पर 18 फीसदी क्यों? फिक्की ने उठाए सवाल

Ficci Crop Protection Committee

फिक्की की क्रॉप प्रोटेक्शन कमेटी ने कीटनाशकों पर जीएसटी (GST on Pesticides) रेट को घटाकर 5 फीसदी करने की मांग की है. कमेटी ने कहा है कि जब फर्टिलाइजर पर जीएसटी सिर्फ 5 फीसदी है तो फिर पेस्टीसाइड पर 18 फीसदी क्यों? जबकि दोनों एग्री इनपुट है. कमेटी के चेयरमैन आरजी अग्रवाल ने कहा कि ज्यादा जीएसटी की वजह से किसान नकली कीटनाशकों के चक्कर में पड़ जाते हैं जिसकी वजह से न सिर्फ किसानों बल्कि देश का भी नुकसान होता है. उन्होंने कहा कि किसानों की आय (Farmers Income) और कृषि क्षेत्र के निरंतर विकास के लिए फसल सुरक्षा का समाधान महत्वपूर्ण है. जैसे लोगों के बीमार होने पर दवा की जरूरत होती है वैसे ही पौधों के बीमार होने पर उन्हें ठीक करने के लिए दवा की जरूरत है.

एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए अग्रवाल ने कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और किसानों की आय को बढ़ाने के लिए नए मॉलिक्यूल्स के पंजीकरण मे तेजी लाने के लिए केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति (सीआईबी और आरसी) में सुधार की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि यह भ्रम है कि भारत में किसान कीटनाशकों का अधिक इस्तेमाल करते हैं. सच तो ये है कि चीन के मुकाबले भारत में प्रति हेक्टेयर बहुत कम कीटनाशक इस्तेमाल किया जाता है.

छोटे किसानों को होती है दिक्कत

क्रॉप प्रोटक्शन कमेटी (फिक्की) के चेयरमैन ने कहा कि विशेष रूप से फसल सुरक्षा रसायनों पर सेवा कर ज्यादा होने से छोटे और सीमांत किसानों को दिक्कत होती है. कृषि-रसायन पर 18 प्रतिशत का जीएसटी अत्यधिक अनुचित है, क्योंकि वे न केवल फसल सुरक्षा (Crop Protection) के लिए बीमा के रूप में कार्य करते हैं बल्कि उनकी गुणवत्ता, उपज और आय में भी वृद्धि करते हैं. 18 प्रतिशत की यह उच्च दर उचित नहीं है. इसे या तो शून्य होना चाहिए या उर्वरकों के बराबर 5 प्रतिशत तक लाया जाना चाहिए.

कीटनाशकों की गुणवत्ता के लिए मजबूत मशीनरी की जरूरत

पूर्व कृषि आयुक्त डॉ. चारूदत्त दिगंबर माई ने कहा कि कृषि रसायन उद्योग हमारे किसानों के लिए काम करता है. फसल के नुकसान को कम करते हुए बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद के साथ उच्च उपज का आश्वासन देता है. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और कीट रोग के उभरते खतरों को देखते हुए इसका खेती के लिए योगदान अहम हो जाता है. केंद्र सरकार को कीटनाशकों के गुणवत्ता नियंत्रण के लिए तत्काल मजबूत मशीनरी स्थापित करने की आवश्यकता है क्योंकि यह किसानों के साथ-साथ मिट्टी के लिए अच्छा होगा.

सरकारी लैब का स्टैंडर्ड ठीक हो

माई ने कहा कि कीटनाशकों की जांच करने वाली सरकारी लैब के लिए भी एनएबीएल प्रमाणीकरण जरूरी किया जाना चाहिए. केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति (सीआईबी एंड आरसी) में सुधारों की वकालत करते हुए उन्होंने कहा सरकार नए मॉलिक्यूल्स रजिस्ट्रेशन में तेजी लाए, जिससे कि किसानों की उपज गुणवत्ता और आय बढ़ाने में मदद मिले. फिक्की 23 जून को नई दिल्ली में कृषि रसायन उद्योग के लिए पॉलिसी लैंडस्केप’ विषय के साथ अपने 11वें एग्रोकेमिकल्स सम्मेलन का आयोजन कर रहा है. इस मौके पर फिक्की क्रॉप प्रोटक्शन कमेटी के सदस्य राजबीर राठी भी मौजूद रहे.

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