पारंपरिक खेती छोड़कर मिट्टी रहित पौधे तैयार कर रहा खूंटी का किसान, क्षेत्र के किसानों के विकास के साथ कर रहा बेहतर कमाई

Successful Farmer Khuti Jharkhand

झारखंड के खूंटी जिले में अब किसान (Farmers) अपनी मेहनत और लगन की बदौलत सफलता की नयी कहानी लिख रहे हैं. कभी नक्सलवाद के लिए बदनाम इस जिले में युवा अब मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं और खेती-बारी करके रोजगार कमा रहे हैं. खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड के पांडू गांव के एक ऐसे ही किसान हैं जुवलैन मुकुट तिड़ो, जो उन्नत कृषि (Modern Farming) के जरिए ना सिर्फ अपने लिए रोजगार कमा रहे हैं बल्कि आस-पास के गावों के किसानों के लिए उन्नत किस्म के सब्जियों के पौधे उपलब्ध करा रहे हैं. जिसके जरिए खेती करके आस-पास के गावों के किसान भी अच्छी कमाई कर रहे हैं और एक खुशहाल जीवन जी रहे हैं. अच्छे पौधे मिलने से अच्छी पैदावार हो रही है इससे उनके जीवन में खुशहाली आयी है.

जुवलैन मुकुट तिड़ो का जन्म किसान परिवार में हुआ. माता पिता दोनों ही खेतों में काम करते थे. मुकुट बताते हैं कि उनके माता पिता से ही उन्होंने खेती सीखी और बचपन में ही जब से होश संभाला खेत में उनका हाथ बटाने लगे. उन्होंने कहा कि उनके माता पिता पांरपरिक खेती (Traditional Farming) करते थे. व्यवसायिक तौर पर या मुनाफे के लिए उन्होंने खेती कभी नहीं. बस इतना ही खेती करते थे की उनका खाने-पीने का खर्च चल जाए, साथ ही मुकुट की पढ़ाई का खर्च निकल जाए. उन्होंने इंटर तक की पढ़ाई की है. पर मुकुट ने अपनी खेती में इस ट्रेंड को बदला और मुनाफे वाली खेती की शुरुआत की. आज इससे उन्हें काफी फायदा हो रहा है.

संस्था का मिल सहयोग

मुकुट बताते हैं कि वो सामान्य खेती ही कर रहे थे पर एक बार उनके गांव में नवभारत जागृति केंद्र और सीनी टाटा ट्रस्ट संस्था के लोग आए और बेहतर खेती के लिए प्रोत्साहित किया, उन्हें दोनों संस्थाओं की मदद से एक कुआं मिला, जिससे वो और अधिक खेती करने लगे. हालांकि उनके पास एक कुआं था पर वो सूख जाता था. नया कुआं भी गर्मी के दिनों में सूख जाता है पर अब वो पहले से अधिक खेती कर रहे हैं. इस दौरान उन्हें मिट्टी रहित पौधा तैयार करने का प्रशिक्षण लेने के लिए हरियाणा के करनाल भेजा गया. वहां पर उन्होंने नर्सरी तैयार करने के बारे में जाना. वापस लौटने के बाद उन्हें लगा कि पौधे तैयार करना उनके लिए मुश्किल वाला काम हो सकता है और शायद वो अच्छे से नहीं कर पाए.

ग्रामीण इलाकों में मिल रही मदद

मुकुट को इस बात का डर था की वो यह काम नहीं कर सकते हैं पर संस्था के लोगों ने उन्हें काफी सहयोग किया. उन्हें एक पॉली हाउस दिया था. जिसकी लागत तीन लाख 20 हजार रुपए हैं. इस पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी थी, हालांकि उस वक्त उनके पास उसे देने के भी पैसै नहीं थे. तब उन्होंने दोस्तो और रिश्तेगदारों से मांग कर और कुछ पैसा खुद से जुटाकर 30 हजार रुपए दिए और बैंक से एक लाख 20 हजार रुपए का लोन लिया. इसके बाद उन्होंने सोचा की अगर वो ग्रामीण किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले सब्जियों के पौधे देंगे तो इससे ना सिर्फ उनका भला होगा बल्कि गांव के सभी किसानों का भला होगा. यह सोचकर उन्होंने काम शुरू कर दिया. आज उनके पास आस-पास के गांव के अलावा तोरपा और कामडारा से भी किसान पौधे खरीदने आते हैं. इसके अलावा मुरहू नारी शक्ति नाम की एक संस्था को भी पौधे देते हैं. इस संस्था से जुड़ी महिला किसान खेती करती है.

सोलर लिफ्ट इरिगेशन से आसान हुई सिंचाई

मुकुट बताते हैं कि उनके गांव में उनके खेतों के पास बनई नदी में सीनी टाटा ट्रस्ट संस्था द्वारा एक सोलर लिफ्ट इरिगेशन लगाया गया है. इससे उनके लिए अब सिंचाई आसान हो गयी है. हालांकि बालू की अंधाधुंध खुदाई के कारण यहां की भी वाटर लेवल नीचे चला जाता है. इससे वहां पर सात एकड़ खेत में सिंचाई होती है. मुकुट खुद दो एकड़ जमीन में तरबूज, टमाटर बैंगन और अन्य सब्जियों की खेती करते हैं. उन्होंन कहा कि वो पूरी तरह जैविक खेती अभी नहीं कर पा रहे हैं. वो अपने पास टमाटर, बैंगन, मिर्चा, शिमला मिर्च, पत्ता गोभी और फूल गोभी के पौेधे तैयार करते हैं. वो कोकोपिट डालकर पौधे तैयार करते हैं. इसके साथ ही उन्होंने ग्राफ्टिंग तकनीक से जंगली बैगन और टमाटर के पौधे तैयार किए हैं.

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