पाकिस्तान क्रिकेट में नहीं रही वो बात, अब ऑस्ट्रेलिया से होती है भारत की असली टक्कर

Rohit Sharma Afp Ind Vs Aus

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अब टी20 सीरीज की बारी है. 3 मैच की सीरीज का पहला मैच मंगलवार को मोहाली में खेला जाएगा. इस सीरीज को दोनों ही टीम टी20 विश्व कप की तैयारी के लिहाज से देख रही हैं. आईसीसी रैंकिंग्स में भारत टी20 फॉर्मेट में दुनिया की नंबर एक टीम है. जबकि ऑस्ट्रेलिया छठी पायदान पर है. रैंकिंग्स के हिसाब से दोनों टीम में बड़ा फर्क दिखता है लेकिन पिछले डेढ़ दशक में इन दोनों टीम के बीच के मुकाबले का स्तर कुछ और कहानी कहता है. विश्व क्रिकेट में आज बादशाहत की जंग में ये दोनों टीमें अक्सर आमने-सामने होती हैं. दोनों में जबरदस्त कांटे की टक्कर रहती है. क्रिकेट की रिकॉर्ड बुक में ये दर्ज है कि विश्व क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया ने कई साल तक राज किया है. उसकी बादशाहत को अगर किसी ने चुनौती दी है तो वो भारतीय टीम ही है. ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में हराने से लेकर और भी कई अहम मैच में भारतीय टीम बीस साबित हुई है. यही वजह है कि पिछले कुछ साल में भारतीय टीम के लिए चिर प्रतिद्ंदी या ‘आर्क-राइवल’ के तौर पर पाकिस्तान नहीं बल्कि ऑस्ट्रेलिया की टीम है. आइए समझते हैं कि ये बदलाव कैसे हुआ?

कभी पाकिस्तान होता था भारत का दुश्मन नंबर एक

भारत पाकिस्तान के बीच क्रिकेट के मैदान में नोंक झोंक का इतिहास पुराना है. दर्जनों किस्से हैं. दर्जनों कहानियां हैं. किरण मोरे और मियांदाद की उछल कूद है. आमिर सोहेल और वेंकटेश प्रसाद का ‘बाउंड्री वार’ है. लेकिन आम हिंदुस्तानी क्रिकेट फैंस के जेहन में दो यादें हमेशा ताजा रहीं. एक जब 80 के दशक में जावेद मियांदाद ने चेतन शर्मा की मैच की आखिरी गेंद पर छक्का लगाया और पाकिस्तान को जीत दिला दी. दूसरी जब 90 के दशक में पाकिस्तान ने सिर्फ 12 रन से चेन्नई टेस्ट मैच में जीत हासिल की. उस टेस्ट मैच में भारत को जीत के लिए दूसरी पारी में 271 रन चाहिए थे. सचिन तेंडुलकर ने शानदार शतक लगाया था. लेकिन सकलैन मुश्ताक की गेंदबाजी के आगे उनका शतक फीका पड़ गया. सचिन के आउट होते ही बाजी पलटी और पाकिस्तान ने वो टेस्ट मैच जीत लिया. इन दो मैचों का नतीजा भारतीय क्रिकेट फैंस के जेहन में कई साल तक छाया रहा. कोई भी मैच फंसता तो पहला भाव यही आता कि मैच पाकिस्तान जीत जाएगा. यही वो दौर था जब पाकिस्तान की टीम में ‘किलर इंस्टिक्ट’ की बात कही गई. लेकिन 21वीं सदी के पहले दशक में ये सोच बदल गई. 2004 में भारतीय टीम के पाकिस्तान दौरे ने ये सोच बदली. इसके पीछे था कराची का वो वनडे मैच जब पाकिस्तान को आखिरी ओवर में जीत के लिए 9 रन चाहिए थे. नेहरा ने वो 9 रन नहीं बनने दिए. पाकिस्तान को अपने घर में हार का सामना करना पड़ा. इस एक मैच ने भारत-पाकिस्तान मुकाबलों की तस्वीर को ही बदल दिया.

2004 के बाद तेजी से बदले रिकॉर्ड

आंकड़ों के आधार पर इसी बात को समझिए. 2004 को टर्निंग प्वाइंट मान लेते हैं. 2004 से पहले भारत पाकिस्तान के बीच खेले गए कुल वनडे मैच में भारत के खाते में सिर्फ 30 जीत थी. जबकि 52 मैच में उसे हार का सामना करना पड़ा था. टेस्ट मैच में भारत के खाते में 5 जीत थी और 9 हार. लेकिन 2004 के बाद के आकड़े अगर आप खंगालें तो पता चलता है कि भारत ने 25 वनडे मैच जीते जबकि 21 में उसे हार का सामना करना पड़ा. ऐसे ही पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच में 4 जीत और 3 हार उसके खाते में है. यानी ज्यादा मैच में भारत को जीत मिलने लगी. ये बड़ा फर्क था. धीरे धीरे इसका भरोसा भारतीय खिलाड़ियों में भी आने लगा. 2007 में टी20 विश्व कप में जब मैच बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंचा तो जीत भारत के खाते में आई. बात चाहे बॉल आउट में मिली जीत की हो या फिर फाइनल में मिली जीत की. ये भरोसा भारतीय फैंस तक भी पहुंचा. धीरे धीरे वो स्थिति भी आ गई कि भारतीय फैंस को लगने लगा कि पाकिस्तान के खिलाफ तो भारत जीत ही जाएगा. भारतीय टीम ने मैदान में वो दम-खम भी दिखाया कि फैंस का ये भरोसा बना रहे. आज हालात ये है कि पिछले दस साल में भारत पाकिस्तान के बीच 11 वनडे मैच खेले गए हैं. इसमें से 7 मैच में भारत को जीत मिली है. यानी करीब 65 फीसदी मैच भारत ने जीते हैं. पिछले पांच साल में ये आंकड़ा 100 फीसदी का है. भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 3 वनडे मैच खेले हैं. तीनों में भारत को जीत मिली है. यहां ये जानना भी जरूरी है कि 2007 के बाद से भारत पाकिस्तान ने टेस्ट मैच नहीं खेला है.

ऑस्ट्रेलिया ने ली पाकिस्तान की जगह

अब क्रिकेट फैंस को पाकिस्तान के मुकाबले ऑस्ट्रेलिया की टक्कर देखने में ज्यादा मजा आने लगा. भारतीय क्रिकेट का स्तर और सुधरा. उसने पिछले एक दशक में कमाल किया. पिछले दस साल में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 34 वनडे मैच खेले गए हैं. दोनों टीम को 16-16 मैच में जीत मिली है. टी20 में भारत का पलड़ा भारी है. 17 मैच में 10 जीत भारत के खाते में हैं. 6 मैच में उसे हार का सामना करना पड़ा है. टेस्ट मैच में भी भारत को ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले दोगुने मैच में जीत मिली है. पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में अब फैंस को बस भावनात्मक लगाव रहा, ज्यादातर मैच का नतीजा लोगों को पहले से पता रहता था. पिछले दो दशक में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड भी पाकिस्तान के मुकाबले काफी आगे निकल गया. दोनों बोर्ड में पहले भी काफी अंतर था लेकिन अब वो अंतर जमीन आसमान के अंतर जैसा हो गया. 2009 में लाहौर में श्रीलंका की टीम पर हुए हमले ने स्थिति को और खराब किया. पाकिस्तान में क्रिकेट और कमजोर हुआ. इस पूरी कहानी का निचोड़ ये है कि अगले तीन मैच जबरदस्त रोमांचक रहने वाले हैं. कमर कस लीजिए.