नगर पालिका चुनावों में 21 नगर निकाय चेयरमैन बनकर भाजपा-जजपा गठबंधन को अपेक्षित सफलता तो मिली है, लेकिन उन्हे नही भूलना चाहिए कि 23 नगर निकाय के चेयरमैन उनके खिलाफ भी बने है-वेदप्रकाश विद्रोही

23 जून 2022
स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वेदप्रकाश विद्रोही ने प्रदेश की 18 नगर परिषदों व 28 नगर पालिका चुनावों में सभी विजयी चेयरमैनों व पार्षदों को हार्दिक बधाई देेते हुए आशा प्रकट की कि आने वाले पांच सालों में वे शहरी जनता से किये गए वादे अनुसार नगारिक सुविधाओं के आधारभूत ढांचे को मजबूत करते हुए आमजनों की दैनिक सुविधाओं के ढांचे को मजबूत करने के लिए ईमानदारी व गंभीेरता से काम करेगे। विद्रोही ने कहा कि इन चुनावों में 21 नगर निकाय चेयरमैन बनकर भाजपा-जजपा गठबंधन को अपेक्षित सफलता तो मिली है, लेकिन उन्हे नही भूलना चाहिए कि 23 नगर निकाय के चेयरमैन उनके खिलाफ भी बने है। वहीं भाजपा को उनके दावे के विपरित काफी कम मत मिला है। भाजपा को 26.3 प्रतिशत, जजपा को 3.8 प्रतिशत ही मत मिले है। दोनो को मिलाकर कुल 30 प्रतिशत मत मिलने का अर्थ है कि हरियाणा के 70 प्रतिशत मतदाता भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार से असंतुष्ट है। जब किसी सरकार के खिलाफ 70 प्रतिशत शहरी मतदाता हो तो वह कैसे दावा कर सकती है कि उसको भारी समर्थन मिला है।
विद्रोही ने कहा कि यह हालत तो तब है कि जब प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने 48 नगर निकायो के चेयरमैन का चुनाव ही नही लड़ा। यदि कांग्रेस भी अपने सिममबल पर चुनाव लड़ती तो सहज अनुमान लगा ले कि भाजपा-जजपा का मत प्रतिशत कितना और गिरता। 48 नगरे निकायों के चुनाव बेशक यह इंगित करते है कि जिन शहरीे मतदाताओं में भाजपा को सबसेे ज्यादा जनसमर्थन प्राप्त था, वहां के मतदाताओं में भी भाजपा के प्रति गहरा रोष है। कांग्रेस पार्टी के लिए यह अवसर भी है और चेतावनी भी। प्रदेश के शहरी व ग्रामीण जनता का भाजपा-जजपा सरकार से मोह भंग हो रहा है। लेकिन इस मोह भंग का लाभ कांग्रेस को तभी मिलेगा, जब कांग्रेसी सभी स्तर पर मिलकर एकजुटता से लड़े और आने वाले दो वर्षो तक लगातार जनमुद्दों को लेकर सड़कों पर आमजन के हित के लिए काम करे।
विद्रोही ने कहा कि बेशक इस बार कांग्रेस ने नगर निकाय चेयरमैन चुनाव अपने सिम्बल पर लडऩा उचित नही समझा, लेकिन बदली हुइ राजनीतिक परिस्थितियों व चेयरमैन के हो रहे सीधे चुनाव के मध्यनजर यदि कांग्रेस ने अपनी पुरानी परम्परा को छोडकर भविष्य में सिम्बल पर चेयरमैन पद पर चुनाव लडने का फैसला नही किया तो इससे कांग्रेस को राजनीतिक रूप से नुकसान होना तय है। निचले स्तर के चुनाव सिम्बल पर लडने से पार्टी कमजोर व बटती नही अपितु मजबूत होती है। कांग्रेस को धरातल की इस वास्तविकता को समझना होगा। विद्रोही ने आशा प्रकट की कि नगर निकायों के नवनिर्वाचित चेयरमैन व पार्षद राजनीतिक द्वेष वे भेदभाव बिना सभी नगारिकों के हित व उनको गुणवत्तापरक नागरिक सुविधाएं आसानी से मिले, इस सोच के साथ काम करेंगे।

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