दो शराबी टॉवर पे चढ़े, गांव वाले टेंशन में पड़े, जब तक उतरती नहीं ये उतर ना पड़ें, वरना…

रविवार (18 सिंतबर) की सुबह दो शराबी यवतमाल जिले के भोसा गांव में ऊंचे टॉवर पर चढ़ गए. चढ़ कर खूब चढ़ाई. फिर जब उतरने की बारी आई तो पहले ने दूसरे से पूछा- अबे अब उतरेगा कैसे?

Two Villagers Went Up To A Tower To Take Alcohol But Panchayat Worried

Image Credit source: Tv9 Network

लोग कहते हैं, पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए. लोग सही कहते हैं. लेकिन साथ ही लोग एक बात और नहीं कहते हैं. वो यह कि पीने वालों को पीने का ठिकाना चाहिए. जितना जरूरी पीने के लिए बहाना है, उतना ही जरूरी पीने का ठिकाना है. शराबी पीने के लिए जाना चाहता है वहीं, जहां कोई आता जाता नहीं. यवतमाल जिले के भोसा गांव के दो पीने वाले इसी तरह सही पीने का ठिकाना ढूंढते-ढूंढते आज (रविवार, 18 सितंबर) सुबह-सुबह एक ऊंचे टॉवर पर चढ़ गए.

चढ़ कर दोनों ने चढ़ाई तो दोनों को चढ़ गई. अब एक शराबी दूसरे से पूछता है कि अबे अब उतरेगा कैसे?दूसरे ने कहा कि अबे जब चढ़ रही है तो मजे से चढ़ने दे ना. उतरने-उतारने की बात क्यों कर रिया है. जब उतरेगी तब उतरने की बात करना, अभी तो और गिलास भर ना! दो शराबी गांव के टॉवर पर चढ़ गए ये बात पूरे गांव में जंगल की आग की तरह फैली. पंचायत तक भी पहुंची. पंचायत के सदस्यों ने एक एससीओ (शराबी केयर ओपरेटिंग) समिट बुला लिया और उन शराबियों को उतारने के लिए एक बड़ी प्लानिंग करने लगे. संयुक्त मीटिंग हुई. फिर पंचायत के सदस्यों की वन टू वन मीटिंग शुरू थी.

पंचायत इस जटिल समस्या पर SCO (शराबी केयर ऑपरेटिंग) समिट करते रहे…

समस्या बड़ी थी. हल निकालना था इसलिए एक दूसरे की बात समझने के लिए एक दूसरे की भावनाओं को ट्रांसलेट करने वाली मशीन मंगवाई गई. पंचायत के एक सदस्य को उस मशीन का इयरफोन कान में हियरिंग के लिए घुसेड़ना ही नहीं आ रहा था. बिलकुल शाहबाज शरीफ और व्लादीमीर पुतिन का सीन निकलता जा रहा था. जब घंटे दर घंटे प्लानिंग ही चलती रही और कोई हल निकलता नजर नहीं आया. तो शराबियों के घरवाले सीधे पहुंचे थाने, लगे दुखड़ा गाने, साब जी चलो, वरना…

पुलिस वाले को समस्या ताइवान के भूकंप से बड़ी नहीं लगी, तुरंत फुर्ती नहीं दिखी

पुलिस वाला अपनी धुन में ‘इतिहास तक’ की खबरें देख कर मनोरंजन कर रहा था. जब घर वालों ने ज्यादा जिद की तो वह झल्ला कर बोल पड़ा- अरे शराबी टॉवर पर चढ़ा है, की पड़ी है, उधर देखो ताइवान में भूकंप आया हुआ पड़ा है.

कुछ गांव वालों ने समझा कर कहा – साब जी, अनिकेत गाढवे और राकेश चव्हाण है नाम…चढ़ गए हैं पीने के लिए टॉवर पर. सुबह से चढ़े हैं. तब पुलिस वाले के भी दिमाग की बत्ती जली. कि अरे ये तो वो पृथ्वीराज चौहान नहीं हैं जिनके इलाके में गौरी ने चढ़ाई की थी तो उन्होंने बहादुरी से लड़ाई की थी. ये एक अलग ही चव्हाण है जिसने गांव के एक टॉवर पर चढ़ाई की है क्योंकि पेग लगाने के लिए कोई अच्छा सा ठिकाना पाना था. पुलिस वाले को बात समझ आई फौरन घटनास्थल पर अग्निशमन की गाड़ियां बुलाई गईं.

‘अबे उतरता है कि उतारूं…तू फायर है तो हम फायर ब्रिगेड’

तब गांववालों की भीड़ घटनास्थल पर पहुंच चुकी थी. मामला गंभीर होता हुआ देखकर सुबह से टॉवर पर चढ़े शराबियों की भी थोड़ी बहुत उतर चुकी थी. फिर फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने भी शराबियों को समझाया कि अब, होश में आ जा भई…माना कि तू फ्लावर नहीं फायर है. पर हम भी फायर ब्रिगेड वाले हैं…उतरते हो या अच्छे से उतारें! फिर गांव के ये दो शराबी किसी तरह से फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों की मदद से उतरे.

आखिर में सीरियसली एक बात, गांव की महिलाओं के ये हैं सवालात

गांव के ये दो शराबी अगर नशे में गिर पड़ते तो उनकी जान जा सकती थी. इसलिए सीरियसली महिलाओं की शिकायतों पर ध्यान देना जरूरी है. यवतमाल जिले के इस भोसा गांव की महिलाओं की शिकायत है कि पुलिस की ना सिर्फ नाक के नीचे, बल्कि पुलिस के सहयोग से भोसा में अवैध शराब, गांजा बिक्री के अड्डे चल रहे हैं. इससे गांव के मर्द, युवा और यहां तक कि स्कूल जाने वाले बच्चे तक नशे की लत में रत हैं. नशे की लत की वजह से गांव में चोरी-चकारी जैसे दूसरे अपराध के लिए भी कई लोग प्रेरित हो रहे हैं. लेकिन इन अड्डों को बंद करवाने की कई बार मांग करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही.

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