देश का विभाजन तो 15 अगस्त 1947 को हुआ… मगर इसकी कहानी 15 जून को लिखी गई! जानें उस दिन क्या हुआ

India Pakistan

भारत आजादी का 75वां वर्ष मना रहा है. 15 अगस्त 1947 को भारत 200 साल की गुलामी से आजाद हुआ, लेकिन साथ में भारत- पाकिस्तान विभाजन (India Pakistan Partition) का दर्द भी था. दरअसल, यह सिर्फ दो मुल्कों का नहीं बल्कि घरों का, परिवारों का, रिश्तों का और भावनाओं का बंटवारा था. रातोरात लोगों की तकदीर बदल गई. कोई बेघर हुआ तो किसी को नफरत की तलवार ने काट डाला. एक रात पहले तक भाइयों की तरह रहने वाले दो समुदायों के लोग दुश्मन बन गए. माना जाता है यह सब 14-15 अगस्त को हुआ, लेकिन इस विभाजन की लकीरों पर मुहर आजादी से करीब दो पहले लग गई थी.

आज ही के दिन यानी 15 जून 1947 को कांग्रेस ने नई दिल्ली में हुए अपने अधिवेशन में बंटवारे के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इस दिन मंजूरी मिलने के बाद विभाजन की प्रक्रिया शुरू हुई और 15 अगस्त तक एक मुल्क दो देशों में तब्दील हो गया. ऐसे में जानते हैं भारत में विभाजन की कहानी कब से शुरू हुई थी और जब देश का बंटवारा हुआ तो इंसानों के साथ दोनों देशों के बीच किन-किन चीजों का भी बंटवारा भी हुआ….

कैसे भड़की थी विभाजन की चिंगारी?

कहा जाता है कि साल 1857 में अंग्रेजों से आजादी दिलाने की मांग के लिए क्रांति की शुरुआत हो गई थी. इसके बाद लगातार अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की जंग लगातार आगे बढ़ती गई, लोग जुड़ते गए और अंत में आजादी मिल ही गई. बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 1885 के आखिर में इंडियन नेशनल कांग्रेस की पहली बैठक मुंबई में हुई थी. उस वक्त पहले कांग्रेस का जोर आज़ादी से ज्यादा ब्रिटिश राज में रह रहे भारतीय लोगों की दशा सुधारने पर था. इसके बाद 1905 में बंगाल विभाजन के बाद आजादी की जंग तेज हो गई, लेकिन हिंदू और मुसलमान का मुद्दा भी जोर पकड़ने लगा.

कब रखी गई अलग मुल्क की मांग

इसका नतीजा ये हुआ कि साल 1906 में भारतीय मुसलमानों के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए मुस्लिम लीग की स्थापना की गई. इसके बाद कई बार मुसलमानों के मुद्दों को लेकर बात हुई और हिंदू-मुस्लिम तनाव की घटना में भी इजाफा हुआ. 1938 में भी महात्मा गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना के बीच मुसलमानों को लेकर बात हुई थी. इसके बाद आजादी के लिए कई आंदोलन होते रहे. मगर हिंदू-मुसलमान का मुद्दा बढ़ने से से 1940 में जाकर देश में मोहम्मद अली जिन्ना ने अलग मुस्लिम मुल्क की पहली बार मांग रख दी.

इसके बाद अलग मुल्क को लेकर कई तरह के विवाद, बहस का दौर शुरू हुआ. कई लोग विभाजन के पक्ष में तो कई विरोध में दिखाई दिए. 1946 के कैबिनेट मिशन प्लान में हिंदू और मुस्लिमों को साथ रहने का प्रस्ताव दिया गया. 1946 में मुस्लिम लीग ने कैबिनेट मिशन की योजना से खुद को अलग कर लिया और आंदोलन छेड़ दिया जिसके बाद देश भर में मारकाट शुरू हो गई. इसकी वजह से अगस्त 1947 में बंगाल में जबरदस्त सांप्रदायिक तनाव फैला और 5000 लोग मारे गए. यह लड़ाई कई राज्यों में फैल हो गई.

इसके बाद 29 जनवरी को मुस्लिम लीग ने संविधान सभा को भंग करने की मांग की, फरवरी में पंजाब में भी सांप्रदायिक हिंसा शुरू हो गई. फिर अंत में लंबी बहस के बाद धर्म के आधार पर दो देश बनाए जाने पर फैसला हुआ. बंटवारे के उस दुखद इतिहास में 15 जून का दिन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कांग्रेस ने 1947 में 14-15 जून को नयी दिल्ली में हुए अपने अधिवेशन में बंटवारे के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इसके बाद 15 अगस्त को दोनों देश अलग हुए.

बंटवारे में क्या क्या बंटा?

इस विभाजन में लोग, क्षेत्र, जमीन और भावनाओं के साथ कई सामान का भी बंटवारा भी हुआ. भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दौरान जन-धन, जल-जमीन के साथ-साथ सभी ऑफिसों की कॉपी-किताब,मेज-कुर्सी से लेकर टाइपराइटर और पेंसिल तक का बंटवारा हुआ था. इसके साथ ही टॉस के जरिए बग्गियों का बंटवारा हुआ, यहां तक की किताबों को फाड़-फाड़कर आधा आधा किया गया. साथ ही पगड़ी, बल्ब, पेन, लाठी, बांसुरी, मेज, कुर्सी, रायफल जैसी छोटी-छोटी चीजों का बंटवारा भी हुआ.

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