दिल्ली: मुंडका की फैक्ट्री में आग का तांडव, 4 मंजिला इमारत से ‘उम्मीद’ की छलांग, लपटों में समा गईं 27 जिंदगियां, NDRF ने संभाला मोर्चा

Mundaka Fire

दिल्ली के मुंडका (Mundaka Fire) में शुक्रवार को लगी भीषण आग में 27 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 85 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका हैं, जिनमें से कई लोगों को उपचार के लिए अस्पताल में भेजा गया है. दिल्ली फायर सर्विस और दिल्ली पुलिस के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक चार मंजिला इमारत में अनुमानित 200 से ज्यादा लोग थे, जिनमें से 85 लोग बचाए जा चुके हैं. सूत्रों ने बताया कि इनमें से कई लोगों को दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग के जॉइंट ऑपरेशन में बचाया गया, जबकि कई लोग खुद ही बिल्डिंग से कूद गए. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. फिलहाल दमकल विभाग ने आग पर काबू पा लिया है ओर 27 शवों को बाहर निकाला जा चुका है.

सूत्रों ने बताया है कि आग इतनी भीषण थी कि अंदर की दीवारें चटक गईं और एक दूसरे पर गिर गईं, ऐसे में मलवा हटाकर रेस्क्यू ऑपरेशन अंदर तक चलाने में दिक्कत आ रही है. उनका कहना है कि तीसरे और चौथे फ्लोर पर रेस्क्यू के बाद घटना में मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है. आग को काबू में करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) को भी लगाया गया है.

बढ़ सकता है मरने वालों का आंकड़ा

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक ये परिसर काफी बड़ा था और इसमें सीसीटीवी बनाने की फैक्ट्री थी. ऐसे में अंदर फंसने वाले लोगों में ज्यादातर मजदूर थे. फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और दिल्ली के दो जिलों की पुलिस भी घटना स्थल पर सुरक्षा की दृष्टि से तैनात की गई है. NDRF को भी घटनास्थल पर बुलाए जाने की जानकारी मिली है.

इस दर्दनाक हादसे के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिश गोयल और वरुण गोयल को गिरफ्तार कर लिया गया है. सूत्रों का कहना है कि इस मामले में अभी और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

पहले फ्लोर से हुई आग लगने की शुरुआत

दिल्ली पुलिस के DCP समीर शर्मा के मुताबिक शुक्रवार शाम पौने पांच बजे PCR पर आग लगने की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही घटना स्थल पर पुलिस और दमकल विभाग के लोग पहुंचे और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. पुलिसकर्मियों ने शुरुआती रेस्क्यू के लिए बिल्डिंग की खिड़कियां तोड़ीं और घायलों को अस्पताल पहुंचाया. पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि बिल्डिंग का इस्तेमाल कमर्शियल तौर पर कंपनियों को स्पेस देने के लिए किया जाता था. आग लगने की शुरुआत पहले फ्लोर से हुई थी, जहां पर CCTV कैमरे और राउटर बनाए और असेंबल किए जाते थे.

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