थाने में पुलिस की बर्बरता, पहले युवक को पीटा फिर लगवाई 300 उठक-बैठक; बेहोश होने तक पीटते रहे

सीकर जिले में एक युवक की पुलिस हिरासत में पहले तो जमकर पिटाई की गई, फिर युवक से दंड बैठक लगाने को कहा गया. दंड बैठक लगाने के दौरान ही युवक की हालत बिगड़ गई. फिलहाल युवक की हालत गंभीर बनी हुई है.

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राजस्थान के सीकर जिले में पुलिस की दबंगई का मामला सामने आया है. लक्ष्मणगढ़ थाने में एक युवक की पुलिस हिरासत में पहले तो जमकर पिटाई की गई, फिर युवक से उठक-बैठक लगाने को कहा गया. उठक-बैठक लगाने के दौरान ही युवक की हालत बिगड़ गई. इस संबंध में पीड़ित विजेंद्र कुमार के परिजनों ने पुलिस अधीक्षक को एक शिकायती पत्र देकर आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की. पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच सीओ को सौंपी है.

पीड़ित युवक विजेंद्र कुमार की मां शुभिता की ओर से पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनका बेटा विजेंद्र कुमार और उसका दोस्त संदीप सिंह लक्ष्मणगढ़ में उनके वाहन की मरम्मत करवा रहे थे. उन्होंने बताया कि नौ सितंबर की शाम को लगभग पांच बजे लक्ष्मणगढ़ थाने के पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की और उसे थाने ले गए.

पुलिस वालों ने 500 दंड बैठक लगाने को कहा

विजेंद्र कुमार की मां शुभिता ने शिकायत में बताया कि दोनों के साथ दुर्व्यवहार किया गया. उन्हें पीटा गया और 500 उठक-बैठक लगाने के लिए कहा गया, लेकिन 300 उठक-बैठक करने के बाद विजेंद्र कुमार की तबीयत बिगड़ गई. इस पर भी जब पुलिसकर्मियों का मन नहीं भरा तो उन्हें मुर्गा बनने के लिए कहा गया.

जब तक बेहोश नहीं हुआ युवक, तब तक की पिटाई

शुभिता देवी ने बताया कि बाद में पुलिस ने विजेंद्र को पीटना शुरू कर दिया. जब वह बेहोश हो गया तो पिटाई बंद की. शुभिता देवी ने बताया कि विजेंद्र और उसके दोस्त संदीप सिंह को 11 सितम्बर को आईपीसी की धारा 151 (शांति भंग) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया और अगले दिन उन्हें जमानत पर रिहा किया गया.

सवाई मानसिंह अस्पताल में चल रहा इलाज

घर पहुंचने पर परिवार वाले विजेंद्र कुमार को चिकित्सक के पास ले गए. चिकित्सक ने विजेंद्र को 15 सितंबर को सीकर के राजकीय चिकित्सालय में भेज दिया. पीड़ित विजेंद्र फिलहाल जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है. सीकर पुलिस अधीक्षक कुंवर राष्ट्रदीप ने बताया कि युवक का 15 सितंबर से गुर्दा (किडनी) का डायलिसिस चल रहा है.

डॉक्टरी रिपोर्ट में चोट लगने का जिक्र नहीं

पुलिस अधीक्षक कुंवर राष्ट्रदीप ने कहा कि चिकित्सकों ने अपनी रिपोर्ट में किसी के चोटिल होने का कोई जिक्र नहीं किया है. पुलिस ने उन्हें 11 सितंबर को गिरफ्तार किया था और अगले दिन जमानत पर रिहा कर दिया. उन्होंने कहा कि हम परिवार के सदस्यों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच एक वरिष्ठ अधिकारी से करवा रहे हैं.

शांति भंग में पुलिस ने किया था गिरफ्तार

वहीं दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पीड़ित युवक की मां ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने और पिटाई के कारण उनके बेटे की हालत गंभीर हुई है. पुलिस ने दोनों को शांति भंग करने और लोगों को धमकाने के आरोप में गिरफ्तार किया था.

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(भाषा के इनपुट के साथ).

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