तेलंगाना के किसानों के लिए बड़ी राहत, राज्य से 40 लाख टन चावल खरीदेगी केंद्र सरकार

Paddy Procurement On Msp In Telangana

तेलंगाना में धान खरीद (Paddy Procurement) को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही उठापटक अब खत्म होती हुई नजर आ रही है. पहले तेलंगाना सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीद की घोषणा की थी और अब केंद्र सरकार ने भी रबी सीजन में उगाए गए धान की खरीद का ऐलान कर दिया है. केंद्र और राज्य के फैसले से तेलंगाना के लाखों को किसानों (Telangana Farmers) को राहत मिलती दिख रही है. पहले धान खरीद को लेकर असमंजस की स्थिति थी, क्योंकि केंद्र ने उसना चावल की खरीद से इनकार कर दिया था. इस मुद्दे को लेकर हैदराबाद से दिल्ली तक राजनीतिक प्रदर्शन हुए.

केंद्र सरकार की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि तेलंगाना से रबी सीजन के केवल कच्चे और फॉर्टिफाइड चावल की खरीद होगी. उसना चावल नहीं खरीदा जाएगा. राज्य से 40 लाख टन चावल की खरीद की बात कही गई है. सामान्य तौर पर रबी सीजन में केंद्र सरकार तेलंगाना से 46 लाख टन चावल खरीदती है, जिससे यह आंकड़ा 6 लाख टन कम है. फिर भी राज्य के किसानों के लिए यह अच्छी खबर है क्योंकि अभी तक तो स्पष्ट ही नहीं था कि केंद्र सरकार की तरफ से खरीद होगी भी या नहीं.

पहले भी केंद्र सरकार कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि उसे उसना चावल को छोड़कर बाकी चावल खरीदने में कोई समस्या नहीं है. बिजनेस लाइन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि तेलंगाना के सिविल सप्लाई कमिश्नर को लिखे पत्र में उपभोक्ता एवं खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि हम सितंबर 2022 तक रबी चावल की खरीद करेंगे.

पिछले साल के मुकाबले घटा है रबी धान का रकबा

पिछले साल केंद्र सरकार की तरफ रबी सीजन के धान खरीदने से मना करने के बाद यह एक बड़ा मुद्दा बन गया था. केंद्र की धान खरीद नीति के खिलाफ तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने दिल्ली में प्रदर्शन भी किया था. केंद्र ने जब उनकी मांग नहीं मानी तो उन्होंने एमएसपी पर धान खरीदने की घोषणा की थी. दरअसल, केंद्र सरकार उसना चावल की सरप्लस उपलब्धता और घटते उपयोग के कारण खरीद से इनकार कर चुकी है.

तेलंगाना के किसान रबी सीजन में भी धान की खेती करते हैं. एक अनुमान के मुताबिक, 55 लाख हेक्टेयर रकबे में रबी सीजन के दौरान धान की खेती होती है. इस बार केंद्र की तरफ से उसना चावल की खरीद से इनकार करने के बाद राज्य सरकार ने किसानों से अपील की थी कि वे धान की जगह वैकल्पिक फसलों की खेती करें. सरकार की अपील के बाद भी धान की रोपाई हुई. हालांकि रकबा घटकर 35-36 हेक्टेयर तक आ गया.

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