ताइवान के उस बंकर पहुंची TV9 भारतवर्ष टीम, परास्त हो गई थी चीन की विशालकाय सेना

सालों से चीन ताइवान के ऊपर दबाव बनाता है. जबरन उसके इलाक़े में घुसपैठ करता है. चीन दादागिरी की दम पर रेत का खनन भी करता है.

ताइवान के बंकर में टीवी9 भारतवर्ष की टीम.

चीन ताइवान के तनाव के बीच टीवी9 भारतवर्ष मातसु द्वीप पहुंचा. ये द्वीप ताइवान स्ट्रेट का सबसे प्रमुख भाग है. भारतवर्ष की टीम ताइवान आर्मी के कमांड सेंटर के मुख्यालय पहुंची. ये मुख्यालय द्वीप के 300 मीटर सबसे ऊंची पहाड़ी के टॉप पर बनाया गया है. जहां पर तरह-तरह के रडार सिस्टम और एंटी मिसाइल सिस्टम भी लगाया गया है. इस कमांड सेंटर की खास बात ये है कि मातसु द्वीप के सबसे ऊंचे स्थान पर होने के चलते पूरी ताइवान स्ट्रेट पर न सिर्फ़ यहां से नज़र रखी जाती है बल्कि मातसु के पोर्ट पर भी पूरे निगहबानी की जाती है. चीन और ताइवान के बीच टेंशन के बीच अमेरिका ने साफ कर दिया है कि अगर चीन ने ताइवान पर अटैक किया तो अमेरिका ताइवान की ओर से युद्ध में उतर जाएगा.

यहां से तरह-तरह के अत्याधुनिक दूरबीन समेत कई तरह यंत्रों से चीन की हर चालबाज़ी और समंदर में उसकी हर गतिविधि कई किलोमीटर दूर रहने पर ही दर्ज की जाती है. उसके आधार पर नेवी और कोस्टगार्ड को सूचना दी जाती है. फिर आगे की कार्रवाई की जाती है. दरअसल, सालों से चीन ताइवान के ऊपर दबाव बनाता है. जबरन उसके इलाक़े में घुसपैठ करता है. चीन दादागिरी की दम पर रेत का खनन भी करता है. एक साल पहले तक ऐसा ही होता आया. लेकिन अब ताइवान की नेवी और कोस्टगार्ड बेहद सख़्त हो गए. इसके बाद 100-100 मीटर लंबे वो जहाज़ जिनसे खनन कर रेत चीन ले जाता है उसे ताइवान की सेना ने अपने कब्जे में से रखा है.

भारी शेलिंग के बावजूद कुछ नहीं बिगाड़ पाया चीन

1960 के दशक में चीन की सेना के द्वारा ताइवान के इलाके में घुसपैठ कब्जा करने के मकसद से चीन ने भारी शेलिंग की थी. लगभग ताइवान के इस मातसु द्वीप तक चीनी सेना पहुंच गई थी, लेकिन ताइवान के लड़ाकों ने अलग-अलग गुप्त बंकरों से मोर्चा लिया और फिर दोनों तरफ से जमकर फायरिंग हुई. इसके बाद चीन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े. इन बंकरों में सबसे बड़े और अहम एक बंकर की भूमिका की थी. युद्ध के बाद इस बंकर का नाम विक्ट्री बॉक्स पड़ गया. एक अकेले बंकर में 18 पोस्ट हैं जहां से जमकर गोलीबारी हुई.

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