डॉलर के मुकाबले रुपये में थम नहीं रही गिरावट, बढ़ेगा आयात बिल का बोझ

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डॉलर के मुकाबले रुपये (Dollar vs Rupee) में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है, आज रुपये में लगातार चौथे दिन कमजोरी देखने को मिली और रुपया डॉलर (Dollar) के मुकाबले 76.50 के स्तर तक फिसल गया. रुपये में कमजोरी रूस यूक्रेन संकट (Russia Ukraine crisis) के बीच विदेशी फंड्स के द्वारा घरेलू बाजार से बाहर निकलने की वजह से देखने को मिली है. अनिश्चितता के माहौल और फेडरल रिजर्व के संकेतों की वजह से विदेशी निवेशक इक्विटी जैसी ज्यादा जोखिम वाले निवेश विकल्पों से बाहर निकल रहे हैं. जिसका असर रुपये पर देखने को मिल रहा है. बिकवाली की वजह से आज घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली है. अगर डॉलर के मुकाबले रुपये में ऐसी कमजोरी बनी रहती है तो देश पर आयात बिल का बोझ बढ़ सकता है.

कैसा रहा आज का कारोबार

करंसी मार्केट में आज डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोरी के साथ खुला. कारोबार के दौरान रुपये ने 76.34 के दिन के उच्चतम स्तर को दर्ज किया वहीं गिरावट आने पर 76.53 के स्तर तक फिसल गया. कारोबार के अंत में रुपया 21 पैसे की मजबूती के साथ 76.50 के स्तर पर बंद हुआ है. पिछले सत्र में रुपया 76.29 के स्तर पर बंद हुआ था. वहीं आज डॉलर इंडेक्स 0.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 100.79 के स्तर पहुंच गया. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है. हालांकि ब्रेंट क्रूड अभी भी 111 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है. रूपये में आज घरेलू शेयर बाजार में गिरावट का असर देखने को मिला. आज शुरुआती बढ़त के बाद प्रमुख इंडेक्स 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए हैं. आज विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 5,871.69 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की.

क्या है बाजार के जानकारों की राय

एचडीएफसी सिक्योरिटीड के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार के मुताबिक घरेलू बाजारों से विदेशी फंड्स के बाहर निकलने का रुपये पर दबाव बना है. उनके मुताबिक फिलहाल विदेशी निवेश बढ़ती हुई बॉन्ड यील्ड, महंगाई दर, और युद्ध से मिले संकेतों को देखते हुए विदेशी निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से बाहर निकल रहे हैं. रेलीगेयर ब्रोकिंग की वीपी कमोडिटी सुगंधा सचदेव के मुताबिक इक्विटी मार्केट में बिकवाली से रुपये पर दबाव बना है. वही डॉलर इंडेक्स के 2 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से भी रुपये के लिये सेंटीमेंट्स कमजोर हो गए हैं.

क्या होगा रुपये में कमजोरी का असर

रुपये में कमजोरी से आयात बिल में बढ़त होना तय है, भारत आयात प्रधान देश है ऐसे में भारत के खजाने से अतिरिक्त रकम बाहर निकल सकती है. वहीं कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच रुपये में कमजोरी से क्रूड की खरीद पर भारत को दोहरा नुकसान हो रहा है. हालांकि भारत फिलहाल कई देशों को खाद्यान्न एक्सपोर्ट बढ़ा रहा है. वहीं देश से सर्विस और माल का एक्सपोर्ट भी बढ़ रहा है तो निर्यातकों के लिये रुपय में कमजोरी फायदेमंद साबित हो सकती है.

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