टी-सीरीज के एमडी भूषण कुमार के खिलाफ रेप मामले में कोर्ट ने खारिज की क्लोजर रिपोर्ट

Bhushan Kumar

मुंबई की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने टी-सीरीज़ के एमडी भूषण कुमार (MD Bhushan Kumar) के खिलाफ बलात्कार के मामले में पुलिस द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया है और साथ ही साथ कोर्ट द्वारा यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान कई कानूनी पहलुओं के साथ समझौता किया गया है. शिकायतकर्ता महिला ने कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग किया है, यह कहते हुए कोर्ट ने पुलिस को कानून के तहत मामले की पूरी जांच करने को कहा है और इस जांच की निगरानी के लिए जोनल डीसीपी को आदेश दिया गया है. आपको बता दें, एक महिला की शिकायत पर, मुंबई के अंधेरी डीएन नगर पुलिस ने पिछले साल जुलाई में कुमार के खिलाफ IPC के प्रावधानों के तहत बलात्कार और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था.

बता दें, “बी सारांश” (B Summary) रिपोर्ट तब पुलिस की तरफ से दर्ज की जाती है जब केस झूठी हो या फिर आरोपी के खिलाफ कोई सबूत न मिले. मेट्रोपॉलिटन के मजिस्ट्रेट आरआर खान ने इस महीने की शुरुआत में ही इस समरी रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और जिसका पूरा आदेश (Detail Order) सोमवार को उपलब्ध कराया गया था. बी समरी नोटिस मिलने के बाद महिला ने अदालत के समक्ष एक एफिडेविट दायर किया, जिसमें कहा गया कि वह एक अभिनेत्री हैं और उन्होंने भूषण कुमार के खिलाफ “परिस्थितिजन्य गलतफहमी” के कारण आरोप लगाए थे, और उन्हें वापस ले रही हैं. साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बी-समरी के अनुमोदन पर उसे कोई आपत्ति नहीं है.

कथित पीड़िता ने किया कानून का दुरुपयोग

कोर्ट ने इस पूरे मामले को लेकर कहा है कि जहां तक ​​​​पीड़िता का सवाल है, उसने क्रिमिनल लॉ का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया है. उनका यह आचरण यह साबित करता है कि उन्होंने कानून के उन प्रावधानों का दुरुपयोग किया है जो जरूरतमंद के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं. अपने व्यक्तिगत लाभ और फायदे के लिए, इस महिला ने हर उस सीमा को पार कर लिया है जिसका पालन सभी महिलाएं कई सालों से करती आ रही हैं.”

जानिए क्या है मजिस्ट्रेट का कहना

इस दौरान जज ने भूषण कुमार और विटनेस को भी इस पूरे मामले में हस्तक्षेप याचिका दायर करने के लिए फटकार लगाई. उनका कहना था कि इस मामले में हस्तक्षेप याचिका दायर करते हुए उन्होंने सभी हदें पार कर दी. मजिस्ट्रेट ने यह कहा है कि इस पूरे मामले में जहां तक भूषण कुमार का सवाल है, उनको इस अदालत को इस तरह से संबोधित करने का कोई अधिकार नहीं है, उन्होंने पूरे मामले में जिस तरह से लड़ने की कोशिश की है, वह दुर्भाग्यपूर्ण, अनैतिक और अनुचित है.

Similar Posts