जानिए क्या है कंपनियों से जुड़ा निधि नियम जिसमें बदलाव से आप पर पड़ेगा असर

Nirmala Sitharaman (pti)

सरकार ने निधि नियम 2014 (Nidhi Rules 2014) में बड़ा बदलाव किया है. इसकी घोषणा कंपनी मामलों के मंत्रालय (Corporate Affairs Ministry) ने की. आम लोगों की भलाई के लिए और उनके हितों की रक्षा के लिए निधि नियम में बदलाव किया गया है. नए नियम में कहा गया है कि अगर कोई सरकारी कंपनी निधि कंपनी के रूप में काम करना चाहती है तो उसे किसी तरह का फंड लेने से पहले केंद्र सरकार से डिक्लेरेशन लेनी होगी. यह डिक्लेरेशन अनुमति के तौर पर होगी जो सरकार की तरफ से मिलने पर ही कोई सरकारी कंपनी निधि कंपनी के रूप में काम कर सकेगी. कंपनी कानून, 2013 के तहत, शुरू में किसी कंपनी (Public Companies) को निधि कंपनी के रूप में काम करने के लिए केंद्र सरकार से घोषणा पाने की कोई जरूरत नहीं थी.

कंपनी कानून, 1956 के तहत एक निधि या म्यूचुअल बेनेफिट सोसाइटी का अर्थ एक ऐसी कंपनी है जिसे केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर आधिकारिक गजट में निधि या म्यूचुअल बेनिफिट सोसाइटी के रूप में घोषित किया है. पहले इन कंपनियों के लिए सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती थी. ऐसी कंपनियों को केवल निधि के रूप में शामिल करना जरूरी होता था और निधि नियम के तहत आवश्यकताएं पूरी करनी होती थीं, जैसे कि 200 की न्यूनतम सदस्यता, 10 लाख रुपये की शुद्ध स्वामित्व वाली निधि (एनओएफ), एनओएफ को 1:20 के अनुपात में जमा करना होता था और निधि नियम, 2014 के शुरू होने के एक वर्ष के भीतर 10 प्रतिशत भार मुक्त जमा राशि बैंकों या डाकघरों में जमा करनी होती थी.

पहले क्या था नियम

कंपनी कानून, 1956 के तहत लगभग 390 कंपनियों को केवल निधि कंपनी घोषित किया गया था. 2014-2019 के दौरान, दस हजार से अधिक कंपनियों को शामिल किया गया. हालांकि, घोषणा के लिए केवल 2,300 कंपनियों ने एनडीएच-4 फॉर्म में आवेदन किया. फॉर्म एनडीएच-4 की जांच से पता चला है कि कंपनियां कानून और निधि नियम, 2014 (संशोधित) के लागू प्रावधानों का पालन नहीं कर रही हैं. आम जनता के हितों की रक्षा के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि इसका सदस्य बनने से पहले किसी को भी केंद्र सरकार द्वारा एक कंपनी को निधि के रूप में घोषित करना सुनिश्चित करना चाहिए. इसके लिए नियमों में कुछ बदलाव किए गए हैं जो निधि (संशोधन) नियम, 2022 के बाद शामिल की जाने वाली कंपनियों पर लागू है.

अब क्या हुआ बदलाव

इन बदलावों में कहा गया है कि 10 लाख रुपये की शेयर पूंजी के साथ निधि के रूप में शामिल एक सरकारी कंपनी को खुद को निधि के रूप में घोषित कराने के लिए शामिल होने के 120 दिनों के भीतर 20 लाख रुपये का एनओएफ के साथ सबसे पहले 200 की न्यूनतम सदस्यता के साथ फॉर्म एनडीएच-4 में आवेदन करना होगा. कंपनी के प्रमोटरों और निदेशकों को नियमों में निर्धारित फिट और उचित व्यक्ति के मानदंडों को पूरा करना होगा. समय पर निपटान के लिए संशोधित नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि केंद्र सरकार एनडीएच-4 के रूप में कंपनियों द्वारा दायर आवेदनों की प्राप्ति के 45 दिनों के भीतर कोई निर्णय नहीं लेती है, तो मंजूरी को स्वीकृत माना जाएगा. यह ऐसी कंपनियों के लिए लागू होगा जिन्हें निधि (संशोधन) कानून, 2022 के बाद शामिल किया जाएगा.

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