जहांगीरपुरी हिंसा: कौन हैं रोहिंग्या मुस्लिम जिन पर दंगे का आरोप लगाया जा रहा है और ये यहां कैसे पहुंचे?

Who Are Rohingya Muslims And Why Bjp Blames That They Are Connected To Jahangirpuri Violence All You Need To Know

हनुमान जयंती पर निकली शोभायात्रा में दिल्ली के जहांगीरपुरी (Jahangirpuri) में पथराव हुआ. यहां हुई हिंसा में पुलिसकर्मी समेत 9 लोग घायल हो गए. हिंसा के बीच भीड़ ने घरों-दुकानों में तोड़फोड़ की. अब तक पुलिस 23 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इस पूरे मामले में अब सियासत की एंट्री हो चुकी है. भाजपा और आप आमने-सामने हैं. भाजपा ने हिंसा के पीछे रोहिंग्या मुस्लिमों (Rohingya Muslims) का हाथ बताया है. दिल्ली भाजपा (BJP) अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने आम आदमी पार्टी पर रोहिंग्या मुसलमानों को बिजली और पानी की सुविधाएं देने का आरोप लगाया है। वहीं, आप (AAP) विधायक नरेश बालियान ने भाजपा को जवाब देते हुए कहा, जब पुलिस और CBI आपकी है तो रोहिंग्या और बांग्लादेशी देश में कैसे आ गए?

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये रोहिंग्या मुस्लिम कौन हैं, ये कहां से आए और भारत में क्यों बस गए? जानिए, इन सवालों के जवाब…

कहां से आए रोहिंग्या मुस्लिम?

अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, रोहिंग्या ऐसा समूह है जिसमें सबसे ज्यादा लोग इस्लाम को मानने वाले हैं. इसलिए इनके लिए रोहिंग्या मुस्लिम शब्द का प्रयोग किया जाता है. इनका कनेक्शन म्यांमार के रखाइन प्रांत से है. इस समूह के लोग रोहिंग्या भाषा बोलते हैं जो म्यांमर में सबसे ज्यादा बोली जाती है.

म्यांमार में 135 अलग-अलग समूहों को नागरिकता के लिए मान्यता दी गई है. लेकिन रोहिंग्या इनमें शामिल नहीं है. 1982 में इनसे नागरिकता छीन ली गई थी. इनसे सरकारी नौकरी और शिक्षा समेत कई अधिकार ले लिए गए थे. इसके बाद से देश में रोहिंग्याओं के खिलाफ हिंसा हुई. 2017 में हुए रोहिंग्या नरसंहार के बाद से इन्होंने देश छोड़ना शुरू कर दिया. भारत और बांग्लादेश समेत दूसरे पड़ोसी देशों में यह अपना ठिकाना तलाशने लगे. अभी बांग्लादेश में इनकी संख्या 13 लाख से अधिक है. इसलिए इन्हें बांग्लादेशी मुस्लिम भी कहा जाने लगा है.

जहांगीरपुरी में लोगों के अलग-अलग मत

दिल्ली के जहांंगीरपुरी में रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं या नहीं, इसको लेकर यहां के लोगों में अलग-अलग मत हैं. जहांगीरपुर में रहने वाले एक शख्स का कहना है कि यहां 100 ऐसे परिवार हैं जो 20 साल से मछली पालन का काम कर रहे हैं. इनमें से ज्यादा लोग बांग्लादेशी मुसलमान हैं. वहीं, दूसरे शख्स का कहना है, यहां रहने वाले ज्यादातर मुस्लिम परिवार पश्चिम बंगाल के हैं. यहां बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम नहीं रहते.

इस पर इतिहासकार विवेक शुक्ला कहते हैं, जहांगीरपुरी में रहने वाले मुसलमान कहां के हैं साफतौर पर यह बताना मुश्किल है क्यों ये बांग्ला भाषा भी बोलते हैं. पश्चिम बंगाल और बांग्लादेशी मुसलमानों की भाषा करीब एक ही जैसी होती है. इसलिए भी कंफ्यूजन की स्थिति है.

दिल्ली में कितने हैं रोहिंग्या मुस्लिम?

यूनाइटेड नेशंस हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजीज यानी UNHRC के मुताबिक, दिल्ली में 1 हजार रोहिंग्या शरणार्थी रजिस्टर्ड हैं. यह आंकड़े तो आधिकारिक हैं, हालांकि वास्तविक आंकड़ा इससे ज्यादा हो सकता है. दिल्ली में ज्यादातर ये मजदूरी का काम करते हैं. यहां से प्रवासी के तौर पर आए रोजगार तलाशने के बाद यहां बसना शुरू हो गए. यहां इनकी संख्या बढ़ रही है.

दिल्ली के कई ऐसे इलाके हैं जहां इनकी आबादी ज्यादा है. इनमें जसोला, कंचन विहार, श्रम विहार, यमुना का किनारा और मदरपुर खादर शामिल है.

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