चीन को काउंटर करने के लिए ताइवान ने भी दिखाई अपनी मिसाइल की ताकत, दो मिसाइलों का किया टेस्ट

China Flag

क्या व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के मिसाइल टेस्ट के बाद नए कोल्ड वॉर की शुरुआत हो गई? क्या दुनिया तबाह करनेवाली मिसाइलों ने दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया? सबसे जरूरी और बड़ा सवाल, क्या ये कोल्ड वॉर अब किसी भी वक्त वर्ल्ड वॉर (World War) में तब्दील हो सकता है? ये सवाल इसलिए खड़े हुए हैं, क्योंकि आज बाइडेन ने रूस के साथ अदावत को और बढ़ा दिया, जिससे रूस (Russia) और चीन (China) और करीब आ गए. बाइडेन ने कहा कि वो रूस के खिलाफ यूक्रेन को हथियार देते रहेंगे और 800 मिलियन डॉलर की और मदद का ऐलान किया. हथियारों की नई खेप में हेवी आर्टिलरी वेपन के साथ दर्जनों होवित्जर के साथ 1 लाख 44 हजार एम्युनिशन राउंड होगा. इसके साथ टैक्टिकल ड्रोंस भी दिए जाएंगे.

अमेरिका जानता है कि रूस लंबे वक्त की तैयारी कर रहा है, उसने कीव के बाद अपना गोलपोस्ट चेंज कर लिया, लेकिन पुतिन अगले पल क्या कर बैठें इसकी भी तैयारी करना जरूरी है, इसलिए जहां तक मिसाइल की बात है तो अमेरिका के पास भी रूस को टक्कर देने वाली मिसाइल मौजूद है. अमेरिका के पास मिनटमैन थ्री मिसाइल है, जो 9600 किलोमीटर की रेंज के साथ 24,000 किलोमीटर घंटे की रफ्तार से उड़ सकती है. रूस की मिसाइल अगर 15 वॉरहेड ले जा सकती है तो मिनटमैन भी 3 वॉरहेड ले जाने में सक्षम है. जहां तक चीन की बात है तो चीन के पास भी लंबी दूरी की मिसाइल मौजूद है, लेकिन उसने फिलहाल YJ-21 हाइपरसोनिक मिसाइल यानी ईगल स्ट्राइक 21 का प्रदर्शन किया. मिसाइल की रफ्तार 6000 किलोमीटर प्रति घंटे और रेंज 1200-1400 किलोमीटर है. ये मिसाइल किसी भी वॉरशिप को समंदर में डुबा सकती है.

चीन को काउंटर करने के लिए ताइवान ने भी अपनी मिसाइल की ताकत दिखाई

वहीं चीन को काउंटर करने के लिए ताइवान ने भी अपनी मिसाइल की ताकत दिखाई है. ताइवान ने बैक टू बैक Hsiung Sheng नाम की दो मिसाइलों का टेस्ट किया. जहां तक नॉर्थ कोरिया की बात है तो वो मिसाइल टेस्ट के मामले में सबसे आगे हैं. 110 दिन के अंदर उसने 13 मिसाइलों का टेस्ट किया. रविवार को ही टैक्टिकल न्यूक बम ले जाने वाली मिसाइल के टेस्ट का दावा भी किया था. इस बीच भारत ने भी एक दिन में BrahMos supersonic cruise missile के दो टेस्ट किए. दोनों टेस्ट कामयाब रहे, लेकिन भारत की नीति साफ है. किसी को उकसाने के लिए टेस्ट नहीं किए बल्कि अपनी क्षमता को मजबूत करने के लिए मिसाइल टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ा रहे हैं.

9वें हफ्ते में पहुंचा रूस-यूक्रेन युद्ध

रूस-यूक्रेन के बीच विध्वंसकारी युद्ध 9वें हफ्ते में पहुंच गया है. दोनों देशों के बीच 57 दिनों से जारी युद्ध ने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है. यूरोपीय देशों का ब्लड प्रेशर तो जंग के पहले दिन से ही बढ़ा हुआ है, लेकिन आ मारियुपोल से जो खबर आई है वो अमेरिका और यूरोप के लिए और बुरी खबर है. डोनेत्स्क की राजधानी मारियुपोल अब यूक्रेन के कब्जे में नहीं है. मारियुपोल से रूसी सैनिकों और टैंक की जो तस्वीर सामने आई है वो ये बताने के लिए काफी है कि रूस मारियुपोल को जीत चुका है. मारियुपोल में रशियन टैंक फुल स्पीड से दौड़ रहा है. टैंक पलक झपकते ही 360 डिग्री पर घूम जाता है. रूस के इस टैंक का नाम T-80 है. मारियुपोल में रूस का यही टैंक यूक्रेनी सैनिकों के हाइड आउट्स को तबाह कर रहा है.

रूस ने दावा किया कि हर हाल में मारियुपोल पर कब्जा होगा. रूस ने कहा कि किसी भी कीमत पर मारियुपोल रूस का होगा. और रूस ने जो दावा किया वो सच साबित हो गया. मारियुपोल अब पूरी तरह से रूस के कब्जे में है. रूस के रक्षा मंत्री ने खुद राष्ट्रपति पुतिन से मिलकर इस बात की जानकारी दी है कि मारियुपोल अब मॉस्को के कब्जे में है. रूस के रक्षा मंत्री सर्जेई शोइगु और पुतिन की मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों आमने-सामने बैठकर बातें कर रहे हैं. ब्रिटिश अखबार डेली मेल का कहना है कि मारियुपोल फतह को लेकर प्रेसिडेंट पुतिन ने शोइगु को बधाई दी है. पुतिन ने कहा है कि मारियुपोल में रूस की सेना ने शानदार काम किया है. ब्रिटिश अखबार डेली मेल ने क्रेमलिन सोर्स के दम पर अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि रक्षा मंत्री सर्जेई शोइगु को पुतिन ने सख्त आदेश भी दिया है.

मारियुपोल में हमले करने की बजाए चारों ओर से घेरो- पुतिन

पुतिन ने कहा है कि मारियुपोल में हमले करने की बजाए चारों ओर से घेर लो. पुतिन ने मारियुपोल के अजोवस्टल प्लांट की घेरेबंदी इस कदर करने को कहा है कि मक्खी भी बाहर ना उड़ सके. लेकिन साथ ही ये भी आदेश दिया गया है कि सरेंडर करने वालों को बख्शा जाए. जंग की शुरूआत से ही मारियुपोल पर कब्जे के लिए रूस जी-जान से जुटा हुआ था, जिसकी तस्दीक वहां से आ रही तस्वीरें कर रही थी. अब मारियुपोल आजाद है और अजोवस्टल प्लांट पर रूसी सैनिकों का शिकंजा कसा है. रिपोर्ट में ये भी जानकारी सामने आई है कि अजोवस्टल प्लांट पर अभी भी यूक्रेन के 2000 सैनिक मौजूद हैं. हालांकि पुतिन ने साफ कर दिया है कि रूस अजोवस्टल प्लांट पर कब्जा नहीं करेगा और ना ही शहर के औद्योगिक ईकाइयों को निशाना बनाएगा.

मारियुपोल पर रूस के कब्जे का सीधा मतलब है कि पूर्वी यूक्रेन में सैनिकों तक रसद पहुंचाने में रूस को आसानी होगी. साथ ही अजोव सी के जरिए होने वाले समुद्री कारोबार पर रूस की पकड़ होगी. ब्लैक सी से सटा यूक्रेन का 80 फीसदी तटीय क्षेत्र रूस के पास आ जाएगा. मारियुपोल रणनीतिक और राजनीतिक दोनों कारणों से महत्वपूर्ण है. ईस्ट और वेस्ट कॉरिडोर का सेंटर है. ऐसे में मारियुपोल हाथ से निकलने का मतलब है कि अब यूक्रेन एजोव सी के तटों को खो देगा. आइए अब आपको और डिटेल में बताते हैं कि मारियुपोल को खो देना यूक्रेन के लिए कितना बड़ा झटका है और कैसे ये रूस के लिए गेमचेंजर है?

दरअसल पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर का सेंट्रल नोड जो क्रीमिया को रूस से जोड़ता है. मारियुपोल बंदरगाह 10 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा कार्गो हैंडल करता है. ब्लैक सी से सटा यूक्रेन रूस के पास होगा और यूक्रेन दुनिया से कट जाएगा, जो उसके लिए बड़ी हार होगी. यूक्रेन के इस अहम औद्योगिक केंद्र में 50 से ज्यादा इंडस्ट्रियल साइट्स है. रूस उद्योगों पर कब्जा कर यूक्रेन को आर्थिक रूप से तबाह कर देगा.

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