चीतों को सांभर चीतल परोसने पर बवाल, कुलदीप विश्नोई ने दागे सवाल

हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हरियाणा के कद्दावर नेता कुलदीप विश्नोई ने ट्वीट कर इस मुद्दे को हवा दे दी है. उन्होंने चीतों को सांभर चीतल परोसे जाने की निंदा करते हुए कहा कि इससे विश्नोई समाज की भावनाएं आहत हो रही है.

हरियाणा के आदमपुर से विधायक हैं कुलदीप बिश्नोई. (फाइल फोटो)

नामीबिया से भारत आए आठ चीतों को लेकर नया बवाल शुरू हो गया है. बवाल की वजह इन चीतों को परोसे जा रहे सांभर और चीतल बने हैं. हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हरियाणा के कद्दावर नेता कुलदीप विश्नोई ने ट्वीट कर इस मुद्दे को हवा दे दी है. उन्होंने चीतों को सांभर चीतल परोसे जाने की निंदा करते हुए कहा कि इससे विश्नोई समाज की भावनाएं आहत हो रही है. उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इसे तत्काल रोका जाए. इससे पहले बिश्नोई महासभा के अध्यक्ष देवेंद्र बूड़िया ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था.

बता दें कि हिरण प्रजाति में आने वाले सांभर और चीतल की संख्या राजस्थान में लगातार घट रही है. कुलदीप विश्नोई ने अपने ट्वीट में इसका उल्लेख करते हुए कहा है कि यदि प्राकृतिक शिकार हो तो उन्हें आपत्ति नहीं होती, लेकिन यहां जानबूझ कर एक विलुप्त जीव को बचाने के लिए दूसरे की बलि चढ़ाई जा रही है.

उधर, बिश्नोई महासभा के अध्यक्ष देवेंद्र बूड़िया ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. इसके लिए नाराजगी जताते हुए बूड़िया ने लिखा है कि आठ चीतों को नामीबिया से लाकर भारत में बसाना अच्छी बात है, लेकिन उनके भोजन के लिए चीतल, हिरण आदि निरीह जीवों को सीमित दायरे में छोड़ना गलत है. इससे विश्नोई समाज की भावनाएं आहत हो रही है. बूड़िया ने लिखा है कि उनका समाज अपने आराध्य गुरु जंभेश्वर भगवान के बताए सिद्धांतों का अनुशरण करते हुए बीते पांच सदी से पर्यावरण और प्रकृति की रक्षा के लिए काम कर रहा है. समाज के 363 शहीदों का उदाहरण किसी से छिपा नहीं है.

चीतों के लिए छोड़े गए हैं 181 चीतल

जानकारी के मुताबिक कूनो नेशनल पार्क के अंदर क्वारंटीन में रह रहे चीतों की खुराक के लिए 181 चीतल छोड़े गए हैं. ये सभी चीतल मध्य प्रदेश के नरसिंह गढ़ स्थित चिड़ीखो अभ्यारण्य से पकड़ कर लाए गए थे. बताया जा रहा है कि मौजूदा दौर में केवल राजस्थान और मध्यप्रदेश में ही हिरणों की यह प्रजाति है. लेकिन शिकार पर प्रभावी रोक नहीं लग पाने की वजह से इनकी संख्या भी लगातार घटती जा रही है.

नामीबिया से लाए गए हैं चीते

गौरतलब है कि करीब 75 साल पहले देश में जिंदा बचे आखिरी चीते की मौत हो गई थी. इसके बाद भारत में इस जीव को विलुप्त घोषित कर दिया गया था. हालांकि इनके विदेशों से लाकर पुर्नवासित करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2009 में प्रोजेक्ट बनाया था. इसी प्रोजेक्ट के तहत हाल ही में नामीबिया से आठ चीतों का आयात किया गया है.

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सीमित दायरे में क्वारंटीन हैं चीते

कूनो नेशनल पार्क में यहां के माहौल और पर्यावरण से अभ्यस्त होने के लिए चीतों को फिलहाल एक छोटी जगह में क्वारंटीन किया गया है. दावा किया जा रहा है कि अगले एक दो महीने में यहां के वातावरण व पर्यावरण से अभ्यस्त होने के बाद इन्हें पूरे जंगल में भ्रमण करने के लिए छोड़ दिया जाएगा. इधर, उनकी खुराक के लिए क्वारंटीन एरिया में हिरण प्रजाति के जीवों को छोड़ने की व्यवस्था की गई है.

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