चिनिया केला की खेती करने वाले किसानों के जल्द आएंगे अच्छे दिन, देश-विदेश में बढ़ जाएगी मांग

Chiniya Kela Hajipur Bihar

बिहार का हाजीपुर जिला केले की खेती (Banana Farming) के लिए मशहूर है. यहां का केला पूरे राज्य में प्रसिद्ध है और लोग बड़ी चाव से खाते हैं. हाजीपुर के किसान (Farmers) एक खास किस्म के केले की खेती करते हैं, जिसे चिनिया केला नाम से जाना जाता है. इस केले की खेती से जुड़े किसानों के जल्द ही अच्छे दिन आने वाले हैं. दरअसल, चिनिया केला को जीआई (Geographical Indication) टैग दिलाने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं और इस दिशा में शुरुआती सफलता भी मिल गई है. इससे किसान उत्साहित हैं और उन्हें उम्मीद है कि जीआई टैग मिलने के बाद चिनिचा केला की वैश्विक पहचान बनेगी और मांग में बढ़ोतरी भी होगी.

नाबार्ड के अधिकारियों के मुताबिक, चेन्नई में स्थित जीआई रजिस्ट्री ने चिनिया केला को जीआई टैग देने के लिए भेजे गए प्रारंभिक प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है. किसानों का कहना है कि अगर जीआई टैग मिल जाता है तो हमारे उत्पाद की पहुंच बड़े बाजार तक हो जाएगी और हमें लाभ मिलेगा. एक किसान ने बताया कि चिनिया केला का उत्पादन पूरे साल होता है. लेकिन जो चिनिया केला जून-जुलाई में पकता है, उसकी बात ही अलग है. उन्होंने कहा कि मेरे जैसे किसानों के लिए यह आजीविका का प्रमुख साधन है. यहां का चिनिया केला देश राज्यों में जाता है.

वैशाली जिला चिनिया केला का हब

बागवानी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि वैशाली जिले के कुछ ब्लॉक चिनिया केला के हब हैं. उनका कहना था कि हाजीपुर के चिनिया केला व्यावसायिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है. हालांकि पानामा रोग के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है. सरकार की तरफ से काफी कोशिश की जा रही है कि चिनिया केला को रोग से बचाया जाए. उनका कहना था कि अगर जीआई टैग मिल जाता था तो इसके कई फायदे होंगे. सिर्फ कमाई ही नहीं बढ़ेगी बल्कि इस पर सरकार का भी विशेष ध्यान रहेगा, जिसका लाभ किसानों को होगा.

अधिकारियों ने बताया कि मुजफ्फरपुर की मशहूर शाही लीची, भागलपुरी जरदालु आम, कतरनी चावल और मगही पान जैसे बिहार के कुछ कृषि उत्पादों को पहले से ही जीआई टैग मिला हुआ है. पिछले साल दिसंबर में मखाना को जीआई टैग मिला था. अब चिनिया केला के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. जीआई टैग मिलने से पहचान स्थापित हो जाती है और किसानों के लिए देश-विदेश में नए बाजार मिल जाते हैं. उत्पादों की मांग बढ़ने से उनकी कमाई पर फर्क पड़ता है.

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