चिंतन शिविर को लेकर सामाजिक संगठनों ने लिखा सोनिया गांधी को पत्र, कहा- रणनीति बनाकर संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करे कांग्रेस

Congress Chintan

उदयपुर में चल रहे कांग्रेस के तीन दिवसीय चिंतन शिविर (congress chintan shivir) को लेकर राजयस्थान के सामाजिक संगठनों और सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सोनिया गांधी (sonia gandhi) को एक पत्र लिखा है. सामाजिक संगठनों ने देश के वर्तमान हालातों और ध्रुवीकरण की राजनीति पर चिंता जाहिर करते हुए एक प्रमुख राजनीतिक दल के रूप में कांग्रेस से दृढ़ता और संकल्पबद्धता के साथ देश में बंधुत्व, समानता, इज्जत से जीने व बोलने की आजादी जैसे संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने की अपील की है. वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लिखे पत्र में कांग्रेस आलाकमान को राजस्थान में लंबे समय से उठ रही जवाबदेही क़ानून की मांग से भी अवगत करवाया है. इसके अलावा गहलोत सरकार (gehlot government) की सामाजिक क्षेत्र की नीतियों और उसके क्रियान्वयन पर राज्य सरकार की सराहना करते हुए अहम सुझाव रखे हैं.

बता दें कि कांग्रेस से 3 दिवसीय चिंतन शिविर में कांग्रेस के रणनीतिकार समिति बनाकर चुनावों को लेकर आगे की रणनीत और संगठनात्मक बदलावों पर चर्चा कर रहे हैं. वहीं अगले साल 2023 में चार बड़े राज्य राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं और 2024 में लोकसभा चुनाव ऐसे में कांग्रेस का चिंतन शिविर पार्टी के लिए काफी अहम माना जा रहा है.

देश में बढ़ती ध्रुवीकरण की राजनीति

सामाजिक संगठनों ने लिखा है कि देश के वर्तमान के हालात बेहद चिंताजनक है और आरएसएस एवं बीजेपी के नेतृत्व में हिंदुत्ववादी ताकतें राज्य और देश में खतरनाक अभियान चला रही हैं. चुनावी लाभ हासिल करने के उद्देश्य से समाज का ध्रुवीकरण और विभाजन किया जा रहा है और संविधान में समाहित भारत की संकल्पना इस समय भयंकर चुनौती का सामना कर रही है.

संगठनों ने कहा कि भारतीय धर्मनिरपेक्षता ,स्वतंत्रता आंदोलन के अंतर्गत हासिल किए गए मूल्यों की धज्जियां उड़ाई जा रही है ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि कांग्रेस दृढ़ता और संकल्प के साथ यह सुनिश्चित करे कि देश में बंधुत्व, समानता, इज्जत से जीने व बोलने की आजादी जैसे संवैधानिक मूल्यों से कोई समझौता नहीं किया जाए और न्याय और क़ानून व्यवस्था को सख्ती से बनाए रखा जाए. पत्र में आगे लिखा है कि कांग्रेस को एक तात्कालिक और दीर्धकालिन रणनीति बनाकर चुनौतियों से निपटने की जरूरत है.

राजस्थान सरकार की योजनाओं की चर्चा

वहीं पत्र के माध्यम से राजस्थान सरकार की तरफ से सामाजिक क्षेत्र की नीतियों और उसके क्रियान्वयन पर किए जा रहे प्रयासों के संबंध में भी आलाकमान को बताया गया है. पत्र के मुताबिक राज्य के पिछले दो बजटों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बजट घोषणाएं की गई है जो पूरे देश में सामाजिक न्याय के लिए एक उदाहरण स्थापित कर सकती हैं.

गहलोत सरकार ने शहरी रोज़गार गारंटी योजना, विकलांगों के लिए मनरेगा के तहत 200 दिनों का काम प्रदान करना, एससीपी-टीएसपी के उपयोग के लिए कानूनी ढांचा, घुमंतू जनजातियों और विमुक्त जनजातियों के कल्याण नीति जैसी सामाजिक पहल की है.

वहीं राज्य सरकार की प्रमुख फ्लैगशिप योजना मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना को सार्वभौमिक बनाना, सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क दवा जैसी जनहितकारी योजनाओं का क्रियान्वन किया है. वहीं स्वास्थ्य का अधिकार और जवाबदेही कानून, कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र में किए प्रमुख वादे हैं.

पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार से जवाबदेही क़ानून पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है और राज्य सरकार ने कानून का मसौदा बनाने के लिए एक समिति का भी गठन किया था जिसने अपनी चर्चाएं कर अपनी रिपोर्ट और जवाबदेही कानून का मसौदा राज्य सरकार को सौंप दिया है ऐसे में अब समय है कि जवाबदेही कानून को तत्काल अधिनियमित और क्रियान्वित किया जाए. वहीं स्वास्थ्य सेवाओं के अधिकार क़ानून को प्राथमिकता के आधार पर पेश करने की भी मांग की गई है.

Similar Posts