चारा की बढ़ती कीमतों के कारण डंठल नहीं जाल रहे किसान, 3000 रुपए क्विंटल तक पहुंच गया है भूसा का दाम

Wheat Harvesting With Combine Machine

पंजाब (Punjab) सहित कई राज्यों के किसान खेतों में गेहूं के डंठल नहीं जला रहे हैं. पशु चारा की कमी और भूसा की बढ़ती कीमतों को देखते हुए किसान (Farmers) फसल अवशेष को जलाने से बच रहे हैं. यहीं कारण है कि डंठल जलाने की घटनाओं में कमी आई है. किसान अब इसे जलाने की बजाय बिक्री कर अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं. इस सीजन में भूसा (Fodder) की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह 2500 रुपए से लेकर 3000 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा है.

कंबाइन हार्वेस्टर से गेहूं की कटाई के कारण खेतों में डंठल रह जाते हैं. कंबाइन काफी ऊपर से फसल की कटाई करता है. खेत तैयार करने से पहले किसान बचे हुए डंठल को जला देते थे, लेकिन इस बार ऐसा होता हुआ नहीं दिख रहा है. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के आंकड़ों से भी इस बात की पुष्टि होती है. गेहूं के डंठल की ऊंची कीमतों के कारण फसल कटाई के बाद पंजाब में केवल 67 खेतों में आग लगने की घटनाएं देखी गई हैं.

डंठल जलाने की घटनाओं में आई है कमी

2019 में पंजाब में 8,921 खेतों में आग की घटनाएं सामने आई थीं, जबकि 2020 में यह संख्या बढ़कर 11,014 हो गई. 2021 में थोड़ी सी कमी आई और आंकड़ा 9,806 रहा. पीपीसीबी के अधिकारियों ने बताया कि इस भी डंठल जलाने की घटनाएं हुई हैं, लेकिन वह एक छोटे से क्षेत्र में दर्ज की गई हैं. अधिकारी ने कहा कि पशु चारे की कमी और डंठल की मांग को देखते हुए किसान बिक्री करने पर जोर दे रहे हैं.

पीपीसीबी के सदस्य सचिव करुंडेश गार ने द ट्रिब्यून से बातचीत में कहा कि मालवा और दोआबा क्षेत्र से गेहूं का भूसा राजस्थान जा रहा है. यहां पर किसानों को भूसा का 2500 से 3000 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहा है. वहीं अन्य किसान राज्य के अलग-अलग बाजारों में इसकी बिक्री कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जागरूकता अभियानों का असर भी दिख रहा है. यह भी कारण है कि किसान गेहूं के डंठल को नहीं जला रहे हैं.

भूसा बेचकर अतिरिक्त कमाई कर रहे किसान

75 वर्षीय किसान जसबीर सिंह के मुताबिक गेहूं के ठंडल से बने f मवेशियों के लिए गेहूं का भूसा एक महत्वपूर्ण चारा है. पिछले सीजन में भूसा 1100 से1500 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा था, जो अब 2800 रुपए से 3,000 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है.

एक अन्य किसान ने बताया कि एक एकड़ खेत में करीब दो क्विंटल भूसा होता है. कंबाइन से कटाई के बाद हम डंठल को जला देते थे. इससे हमें कुछ हासिल तो होता नहीं था. उल्टे में पर्यावरण और खेत की उर्वरक शक्ति पर असर पड़ता था. बढ़ी हुई कीमतों के कारण किसानों ने इसे बेचने का फैसला किया है. यहां से राजस्थान भूसा जा रहा है और किसानों को अच्छी कमाई हो रही है.

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