ग्लूकोज मीटर टेस्ट से पता चलेगा कोरोना से लड़ने के लिए शरीर कितना तैयार है, यह है पूरी प्रॉसेस

Glucose Meter Test To Monitor Covid Antibody

शरीर में कोरोना से लड़ने वाली एंटीबॉडी (Antibody) का स्तर क्या है, इसका पता ग्लूकोज मीटर से लगाया जा सकेगा. ग्लूकोज मीटर की मदद से यह जाना जा सकेगा कि शरीर कोविड के लड़ने के लिए कितना तैयार है. अमेरिका की जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी (Johns Hopkins University) के शोधकर्ताओं ने ऐसा आसान ग्लूकोज मीटर टेस्ट (Glucose Meter Test) विकसित किया है जो शरीर में कोविड के खिलाफ मौजूद एंटीबॉडी के लेवल की जानकारी देता है. एंटीबॉडी एक ऐसा प्रोटीन होता है जो वायरस के लड़ने में मदद करता है. शरीर में यह दो तरह से बनती है, पहली वायरस के संक्रमण के बाद. दूसरी, वैक्सीन लगने के बाद.

क्या है ग्लूकोज मीटर टेस्ट, इसे कैसे किया जाता है, यह कितना असरदार है , जानिए इन सवालों के जवाब…

ऐसे होता है टेस्ट

ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लूकोज मीटर आसानी उपलब्ध हो सकता है और इसे इस्तेमाल करना आसान होता है. इस पर रिसर्च करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है, कोविड से रिकवर हो चुके मरीजों का ग्लूकोज मीटर की मदद से टेस्ट किया गया. टेस्ट से एंटीबॉडीज के स्तर का पता चला. अब समझते हैं, यह कैसे पता लगाया जाता है.

शोधकर्ताओं का कहना है, उन्होंने ऐसी टेस्ट स्ट्रिप बनाई जिस पर SARS-CoV-2 का स्पाइक प्रोटीन होता है, जब इस स्ट्रिप को मरीज के सैम्पल में डुबोया जाता है तो मरीजें के सैम्पल में कोरोना के खिलाफ मौजूद एंटीबॉडी उस प्रोटीन के साथ जुड़ जाती है. इसके बाद IgG फ्यूजन प्रोटीन की रिएक्शन होती और स्ट्रिप को ग्लूकोज मीटर में लाया जाता है. रिएक्शन के बाद ग्लूकोज मीटर की स्क्रीन पर एंटीबॉडीज की जानकारी मिलती है.

शोधकर्ताओं का दावा, ट्रायल सफल रहा

शोधकर्ताओं का दावा है कि यह टेस्ट एंटीबॉडीज के लेवल को बताने में सफल रहा है. मरीजों पर इसका ट्रायल भी किया गया है, जो सफल रहा है. उनका कहना है, इसकी मदद से कोविड के सभी वेरिएंट और दूसरे संक्रमण फैलाने वाले वायरस खिलाफ बनने वाली एंटीबॉडीज का स्तर पता लगाया जा सकता है.

क्या होती हैं एंटीबॉडीज और कैसे काम करती हैं?

क्या होती हैं, एंटीबॉडीज, अब इसे भी जान लेते हैं. जब भी कोई वायरस शरीर को संक्रमित करता है तो उससे लड़ने के लिए कुछ प्रोटीन बनते हैं. आसान भाषा में समझें तो ये प्रोटीन एक तरह से वायरस को अपनी मेमोरी में शामिल कर लेते हैं. इन्हीं प्रोटीन को एंटीबॉडी कहते हैं. जब दोबारा इसी वायरस का संक्रमण होता है तो ये उससे लड़ते हैं. ये एंटीबॉडीज शरीर में कई तरह से बनती हैं. जैसे- कोविड का संक्रमण होने के बाद ये बनना शुरू होती हैं. इसके अलावा वैक्सीन लगने के बाद शरीर में कोरोना के खिलाफ लड़ने वाली एंटीबॉडीज बनती हैं.

शोधकर्ताओं का दावा है कि टेस्ट के नतीजे उत्साहित करने वाले हैं और यह मरीजों के लिए खास टेस्ट साबित होगा, हालांकि यह टेस्ट आम लोगों के लिए कब और कैसे उपलब्ध होगा शोधकर्ताओं ने इसको लेकर कोई जानकारी नहीं दी है.

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