गौरक्षा के लिए 52 दिन का अनशन रखा और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का अहम चेहरा रहे आचार्य धर्मेंद्र

श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का अहम चेहरा रहे आचार्य धर्मेंद्र नहीं रहे. उन्होंने 80 साल की उम्र में जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में अंतिम सांस ली. वह पिछले कई दिन से बीमार थे और आईसीयू में भर्ती थे.

श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का अहम चेहरा रहे आचार्य धर्मेंद्र नहीं रहे.

Image Credit source: फाइल फोटो

श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का अहम चेहरा रहे आचार्य धर्मेंद्र नहीं रहे. उन्होंने 80 साल की उम्र में जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में अंतिम सांस ली. वह पिछले कई दिन से बीमार थे और आईसीयू में भर्ती थे. आचार्य धर्मेंद्र विश्व हिन्दू परिषद के मार्गदर्शक मंडल में शामिल रहे. 1966 में गौरक्षा आंदोलन का चेहरा बने और और देश में कई जनजागरण अभियान चलाए.

गुजरात के मालावाडा में 9 जनवरी, 1942 को जन्मे श्रीपंचखण्ड पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी धर्मेंद्र एक प्रखर वक्ता होने के साथ विश्व हिंदी परिषद के मंत्रिमंडल में भी शामिल रहे. गौहत्या को बंद कराने के लिए उन्होंने 1965 में बड़े स्तर पर आंदोलन की शुरुआत की थी. 52 दिन का अनशन रखा. उनका पूरा जीवन हिन्दुत्व के लिए समर्पित रहा. उन्होंने सबसे लंबा समय जयपुर में व्यतीत बिताया.

जब खुद को बताया आरोपी नम्बर वन

आचार्य धर्मेंद्र ने अप्रैल 1984 पहली धर्म संसद में राम जन्मभूमि के दरवाजों का ताला खुलवाने के लिए जन-जागरण यात्राएं करने का प्रस्ताव रखा जो पारित भी हुआ. उसी साल सीतामढ़ी से लेकर दिल्ली में रामजानकी यात्रा निकाली गई. इस यात्रा में आचार्य धर्मेंद्र का अहम योगदान रहा.

आचार्य धर्मेंद्र राम मंदिर आंदोलन को लेकर काफी मुखर रहे हैं. आंदोलन को लेकर अपनी हर बात बेहद बेबाकी के साथ रखते थे. बाबरी विध्वंस मामले में कोर्ट का फैसला आने से पहले तो उन्होंने अपना बयान दिया. कहा- अब सजा से कैसा डरना, मैंने जो किया सबके सामने किया. मैं आरोपी नम्बर वन हूं. आचार्य धर्मेंद्र ने किताब भी लिखी थी जिसमें महात्मा गांधी को लेकर कई खुलासे किए गए थे. हालांकि उस किताब को प्रतिबंधित कर दिया गया था.

आचार्य के ये 3 बयान चर्चा में रहे

  1. आचार्य धर्मेंद्र के कई बयान चर्चा में रहे. मीडिया को दिए अपने एक बयान में भगवान के प्रति आस्था न रखने वालों पर निशाना साधते हुए कहा था कि अगर कोई इंसान ईश्वर पर विश्वास नहीं करता है तो उसे चौराहे पर खड़ा करके गोली मार देनी चाहिए. भगवान की सृष्टि ही उनके होने का प्रमाण है. ऐसे में भगवान को न मानने वालों के जिन्दा रहने का क्या मतलब है.
  2. उन्होंने अपने एक बयान में कहा था, मैं खुद को व्यवस्थित रखता हूं. हमेशा अपने पास एक आइना रखता हूं. मैं बेशक फैशन नहीं करता, लेकिन बाल व्यवस्थित रखता हूं. मैं ऐसे भगवान शिव और नारायण का भक्त हूं जिन्हें समुद्र मंथन से विष और लक्ष्मी की प्राप्ति हुई.
  3. मध्य प्रदेश के अमरकंटक में स्कूली शिक्षा पर दिया गया उनका बयान सुर्खियों में रहा था. उन्होंने कहा था, अगर देश के किसी स्कूल में ब्राह्मांड और धर्म के बारे में नहीं बताया जाता तो ऐसी शिक्षा का क्या मतलब है.
  4. अमरकंटक के सत्संग समारोह में उन्होंने कहा था कि कोई सूत कातने वाला डेढ़ पसली का इंसान भारत का राष्ट्रपिता नहीं हो सकता. महात्मा गांधी भारत माता के पुत्र हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रपिता नहीं.

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