गेहूं के बाद क्या आटा निर्यात पर रोक लगाने की हो रही तैयारी, जानिए सरकार का जवाब

Wheat Flour Export Ban

भारत ने चालू वित्त वर्ष में अब तक लगभग 30 लाख टन गेहूं का निर्यात (Wheat Export) किया है. साथ ही अनाज की आपूर्ति के लिए कुछ देशों के अनुरोध पर विचार किया जा रहा है. सरकार ने बुधवार को यह जानकारी दी. आटा निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की योजना के बारे में, खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा कि सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और उचित समय पर कदम उठाएगी. सरकार ने गेहूं की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने और मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए इसके निर्यात पर रोक लगा दी थी जो 13 मई से प्रभावी हुआ था. हालांकि सरकार ने कहा था कि वह अलग अलग मामलों के आधार पर अन्य देशों को गेहूं निर्यात की अनुमति देने के बारे में सोचेगी.

खाद्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव पार्थ एसदास ने कहा कि कई देशों से अनुरोध आए हैं, उन पर विचार किया जा रहा है. दास ने हालांकि उन देशों के नामों का खुलासा नहीं किया जिन्होंने भारतीय गेहूं के लिए अनुरोध किया है. अधिकारी ने कहा कि कुछ देशों के लिए कुछ मात्रा को मंजूरी दी गई है. उदाहरण के लिए 1.5 लाख टन गेहूं बांग्लादेश को निर्यात किया गया है. उन्होंने कहा कि देश ने चालू वित्तवर्ष में 14 जून तक कुल 29.70 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है. इसी अवधि में गेहूं के आटे (आटा) का निर्यात 2.59 लाख टन था.

गेहूं की खरीद और उत्पादन में आई है कमी

मार्च के महीने में अत्यधिक गर्मी के कारण भारत में गेहूं के उत्पादन में गिरावट दर्ज हुई है. मार्च के महीने में ही गेहूं परिपक्व होता है. अधिक तापमान के कारण दाने पूरी तरह तैयार नहीं हो पाए और सिकुड़ गए. इस वजह से वजन काफी कम हो गया. वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण गेहूं सहित अन्य खाद्यानों की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई और कटाई शुरू होने से पहले ही कीमतों में काफी बढ़ोतरी हो गई. इसका फायदा किसानों ने उठाया. उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की बिक्री करने की बजाय खुले बाजार में अधिक दरों पर बेचकर अतिरिक्त कमाई की.

खुले बाजार में बिक्री का असर गेहूं की सरकारी खरीद पर भी पड़ा. इस बार 4.44 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया था जबकि पिछले साल देश में 4.33 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी. कम उत्पादन और किसानों के खुले बाजार में गेहूं की बिक्री को देखते हुए सरकार ने खरीद लक्ष्य को घटा दिया. गेहूं खरीद की तारीख भी बढ़ाई गई, बावजूद इसके खरीद लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका. वहीं गेहूं की कीमतें बढ़ने के कारण घरेलू बाजार में खाद्यानों की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई. इसी को काबू करने के लिए भारत ने गेहूं निर्यात पर रोक लगा दी.

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