गुजरात में क्या डोलेगी कांग्रेस की नैया? राहुल के मैसेज के बाद भी चिंतन शिविर से नदारद रहे हार्दिक पटेल, जानें क्या है ‘नाराजगी’ की वजह

Hardik Patel Gujarat

कांग्रेस (Congress) नेता हार्दिक पटेल पार्टी के उदयपुर में हो रहे चिंतन शिविर में नहीं पहुंचे. कांग्रेस का दावा है कि उनको बुलाया ही नहीं गया क्योंकि वो आमंत्रण की किसी भी कैटेगरी में नहीं आते. हालांकि हार्दिक (Hardik Patel) जैसे ही युवा नेता कन्हैया कुमार कमेटी के सदस्य के रूप में चिंतन शिविर में शामिल हैं. हार्दिक के करीबी दावा कर रहे हैं की उनको अलग से निमंत्रण मिला था लेकिन उन्होंने जाने से इनकार कर दिया. गुजरात में पाटीदार या पटेल समुदाय चुनाव में निर्णायक भूमिका अदा करते हैं. ऐसे में हार्दिक की भूमिका चुनाव में बढ़ जाती है. ऐसे में अब सवाल उठता है कि हार्दिक क्यों नाराज हैं.

दरअसल हार्दिक पटेल, पटेलों के बड़े चेहरे नरेश पटेल के कांग्रेस में शामिल होने की खबरों से परेशान हैं. अब तक वो पार्टी के सबसे बड़े पटेल चेहरा थे. लेकिन कांग्रेस नेतृत्व नरेश से लगातार बात कर रहा है और उनको पार्टी में लेने पर सहमति बन रही है. नरेश लेऊवा पटेल हैं, जबकि हार्दिक कड़वा पटेल. नरेश बड़े उद्योगपति भी हैं. लेऊवा पटेल वोटरों की संख्या भी ज्यादा है और नरेश की अपनी बिरादरी में इज्जत एवं पैठ भी बहुत ज्यादा है, क्योंकि वो खोडल धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं. नरेश का सामाजिक कार्यों की वजह से बहुत रसूख है. ऐसे में शायद हार्दिक को लगता है कि नरेश की एंट्री से उनका पूछ कम हो जाएगी.

बीजेपी की तरफ खिसकते हुए नजर आए हार्दिक

हार्दिक पहले से कांग्रेस के स्थानीय नेताओं द्वारा अनदेखी किए जाने और किनारे लगाए जाने की शिकायत करते रहे हैं. नरेश के पक्ष में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पैरवी भी है, जिन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से अपने प्रेजेंटेशन में नरेश को पार्टी में शामिल करने की वकालत की था. हार्दिक पटेल पिछले कुछ दिनों से इशारों-इशारों में बीजेपी की तारीफ करते दिखे हैं. गुजरात कांग्रेस (Gujarat Congress) के एक सूत्र ने तो दावा किया कि हार्दिक कभी भी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. हार्दिक की लगातार बीजेपी से बातचीत भी चल रही है. हालांकि, जब हार्दिक से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने इन खबरों को खारिज कर दिया.

राजस्थान में हुआ चिंतन शिविर का आयोजन

गौरतलब है कि आज राजस्थान के उदयपुर में कांग्रेस के चिंतन शिविर की शुरुआत हुई है. इसमें देशभर से 400 से ज्यादा नेता पहुंचे हैं. कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इस कार्यक्रम में कांग्रेस ने कई बातों पर सहमति व्यक्त की. इसमें एक परिवार, एक टिकट सबसे महत्वपूर्ण रहा है. इसके अलावा, बीजेपी की साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति से कैसे लड़ना है. कैसे महंगाई, बेरोजगारी, किसानी, गरीबी जैसे आम आदमी के मुद्दों को आगे लाना है, इसे लेकर भी चर्चा की गई. इस बात पर सहमति बनी कि 50 साल से कम उम्र वाले युवाओं को संगठन में जगह दी जाए.

चिंतन शिविर में कहा गया कि कांग्रेस अध्यक्ष समेत संगठन के किसी पद पर कोई 5 साल के कार्यकाल को पूरा कर ले तो फिर तीन साल का कूलिंग ऑफ पीरियड होना चाहिए. वहीं, एक परिवार से एक टिकट हो, परिवार के दूसरे व्यक्ति को तभी टिकट दिया जाए, जब वो पांच साल संगठन और राजनीति में सक्रिय रहा हो, साथ ही जिताऊ हो. ये नियम गांधी परिवार पर भी लागू हो. 50 फीसदी SC/ST/OBC माइनॉरिटी को संगठन में प्रतिनिधित्व दिया जाए. राज्यसभा में लगातार कितने टर्म कोई नेता जाए, इसका नियम बने. वहीं, राहुल गांधी ने आर्थिक विषय की कमेटी में हिस्सा लिया, जबकि प्रियंका गांधी वाड्रा ने राजनीतिक.

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